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Patna : अगर सब कुछ योजना के मुताबिक आगे बढ़ा तो आने वाले दिनों में बिहार के लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे। सरकारी योजनाओं की जानकारी लेने से लेकर शिकायत दर्ज कराने और उसका जवाब पाने तक का काम अब अपनी ही भाषा में हो सकेगा। इसके पीछे वजह है बिहार सरकार और SarvamAI-BharatGPT के बीच हुआ वह अहम समझौता, जो राज्य को कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के जरिए नई पहचान देने की तैयारी है।
सीएम सम्राट चौधरी ने इस समझौते को बिहार के डिजिटल भविष्य की मजबूत शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और SarvamAI-BharatGPT के बीच हुए इस एमओयू से AI आधारित तकनीकों के विकास, शोध और जनसेवा को नई रफ्तार मिलेगी। सरकार चाहती है कि तकनीक सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि गांव के आखिरी व्यक्ति तक उसका लाभ पहुंचे।
सरकारी सेवाएं अब होंगी आसान और अपनी भाषा में
सरकार की सबसे बड़ी कोशिश यह है कि तकनीक लोगों के लिए बोझ नहीं, बल्कि सहूलियत बने। इसी सोच के तहत AI मॉडल हिंदी, मैथिली, भोजपुरी, मगही समेत कई भारतीय भाषाओं में तैयार किए जाएंगे।
इसका सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा। सरकारी योजनाओं की जानकारी समझने में आसानी होगी। शिकायत दर्ज कराने और उसका समाधान जानने के लिए अंग्रेजी या तकनीकी भाषा की जरूरत नहीं पड़ेगी। AI आधारित वर्चुअल असिस्टेंट लोगों को उनकी अपनी भाषा में जवाब देंगे और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा।
बिहार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सुशासन, नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था का अग्रणी केंद्र बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम।
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, बिहार सरकार एवं SarvamAI-BharatGPT के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) के माध्यम से राज्य में AI आधारित तकनीकों के विकास, अनुसंधान और…
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) July 16, 2026
डिजिटल बिहार की तैयारी पहले से चल रही थी
यह समझौता अचानक नहीं हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में बिहार सरकार लगातार डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने पर काम कर रही है। सम्राट सरकार आईटी नीति-2024, बिहार जीसीसी नीति-2026 और AI-प्रथम शासन मॉडल के जरिए तकनीकी ढांचे को मजबूत कर रही है। इसी कड़ी में आईआईटी पटना के सहयोग से AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जा रहा है। रिसर्च पार्क और इन्क्यूबेशन सेंटर का भी विस्तार हो रहा है। साथ ही बिहार की अपनी AI नीति को अंतिम रूप देने का काम तेजी से चल रहा है। सरकार का मानना है कि मजबूत डिजिटल आधार के बिना AI का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच सकता। इसलिए एक साथ कई मोर्चों पर काम किया जा रहा है।
छात्रों को मिलेगा अपना डिजिटल शिक्षक
AI का असर सबसे ज्यादा शिक्षा व्यवस्था में भी देखने को मिलेगा। सरकार की योजना है कि छात्रों को उनकी पढ़ाई और जरूरत के हिसाब से व्यक्तिगत अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाए। स्थानीय भाषाओं में पढ़ाई से जुड़े सवालों के जवाब, कठिन विषयों को आसान तरीके से समझाने की सुविधा और डिजिटल शिक्षण सहयोग मिलने से खासकर ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों को बड़ा फायदा होगा। इससे शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है।
किसानों तक पहुंचेगी समय पर सही जानकारी
खेती-किसानी में भी AI अहम भूमिका निभाएगा। किसान अपनी भाषा में मौसम का पूर्वानुमान, फसल से जुड़ी सलाह, मंडी के ताजा भाव और सरकारी योजनाओं की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि सही समय पर सही जानकारी मिलने से किसानों के फैसले बेहतर होंगे और खेती की लागत कम करने के साथ उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
दूर-दराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा सहारा
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी AI का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। खासकर ऐसे इलाकों में जहां विशेषज्ञ डॉक्टर आसानी से उपलब्ध नहीं हैं, वहां लोगों को AI आधारित प्रारंभिक स्वास्थ्य परामर्श और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता उपलब्ध कराई जाएगी। इससे छोटी स्वास्थ्य समस्याओं की समय रहते पहचान हो सकेगी और लोगों को जरूरी सलाह घर बैठे मिल सकेगी।
निवेश और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे
सरकार को उम्मीद है कि इस साझेदारी का असर सिर्फ सरकारी सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगा। AI और डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से बिहार में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय तकनीकी कंपनियों का निवेश बढ़ेगा। स्टार्टअप को बेहतर माहौल मिलेगा, नए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित होंगे और युवाओं के लिए तकनीक आधारित रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इससे बिहार की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।
2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ता बिहार
सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार का लक्ष्य सिर्फ नई तकनीक अपनाना नहीं, बल्कि उसे लोगों की जिंदगी आसान बनाने का माध्यम बनाना है। सरकार चाहती है कि AI का लाभ हर वर्ग तक पहुंचे और प्रशासन ज्यादा पारदर्शी, जवाबदेह और तेज बने। सरकार का मानना है कि यह साझेदारी “विकसित बिहार” और “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
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