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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : सुबह का वक्त था। पीवीयूएनएल पतरातू टाउनशिप के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में आम दिनों की तरह चहल-पहल थी, लेकिन उस दिन माहौल कुछ अलग था। एक कमरे के बाहर महिलाएं जुटी थीं। किसी के चेहरे पर उत्सुकता थी तो किसी की आंखों में उम्मीद। कुछ महिलाएं शायद यह सोच रही थीं कि अब तक घर और परिवार तक सीमित रहने वाला उनका हुनर क्या सचमुच उनकी कमाई का जरिया बन सकेगा। फिर रिबन कटा और ‘प्रगति 2.0 टेलरिंग सेंटर’ की शुरुआत हो गई।
यह सिर्फ एक सेंटर का उद्घाटन नहीं था। यह उन महिलाओं के लिए एक नए रास्ते की शुरुआत थी, जिनके हाथों में हुनर तो है, लेकिन उसे आगे बढ़ाने के लिए सही प्रशिक्षण और मौका नहीं मिला। अब हनुमानगढ़ी, शाह कॉलोनी और कटिया की महिलाओं को सिलाई और कढ़ाई का प्रशिक्षण मिलेगा। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इन्हीं हाथों से कपड़े भी सिलेंगे और परिवारों की जिंदगी भी।
अब हुनर घर की चारदीवारी में नहीं रहेगा
गांवों में ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं, जो बचपन से सिलाई-कढ़ाई का काम करती आ रही हैं। किसी ने मां से सीखा, किसी ने पड़ोस की महिला से। किसी के पास पुरानी मशीन है तो किसी के पास सिर्फ हुनर। लेकिन सही प्रशिक्षण, बेहतर तकनीक और बाजार की जानकारी के अभाव में यह हुनर अक्सर घर की चारदीवारी तक ही सीमित रह जाता है। ‘प्रगति 2.0 टेलरिंग सेंटर’ इसी कहानी को बदलने की कोशिश है। यहां महिलाओं को सिलाई और कढ़ाई की ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्हें सिर्फ कपड़ा सिलना नहीं सिखाया जाएगा, बल्कि काम को बेहतर तरीके से करने की तकनीक भी बताई जाएगी। ताकि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे किसी के भरोसे न रहें और अपने हुनर के दम पर काम शुरू कर सकें।

सप्ताह में छह दिन मशीनों के साथ चलेगा सीखने का सिलसिला
इस सेंटर में चयनित महिलाओं को सप्ताह में छह दिन नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा। यानी सीखने का यह सफर सिर्फ कभी-कभार होने वाली कक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। महिलाएं नियमित रूप से सेंटर आएंगी और सिलाई के साथ-साथ कढ़ाई, डिजाइनिंग और एडवांस तकनीक सीखेंगी। कोशिश होगी कि वे बाजार की जरूरत के हिसाब से काम करने के लिए तैयार हों। आज के समय में सिर्फ सिलाई आना ही काफी नहीं है। ग्राहक क्या चाहते हैं, किस तरह के डिजाइन चल रहे हैं और कपड़ों की फिटिंग कैसी होनी चाहिए, इन बातों की जानकारी भी जरूरी है। इसी दिशा में महिलाओं को तैयार किया जाएगा।
एक मशीन, एक हुनर और बदल सकता है पूरा घर
किसी महिला के लिए सिलाई मशीन सिर्फ एक मशीन नहीं होती। कई घरों में यही मशीन मुश्किल वक्त में सहारा बनती है। बच्चों के कपड़े सिलने से लेकर पड़ोस के कपड़े सिलने तक, धीरे-धीरे यही काम आमदनी का जरिया बन सकता है। यही वजह है कि ‘प्रगति 2.0’ से जुड़ी पहल को केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसका बड़ा मकसद महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करना है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद महिलाएं घर से सिलाई का काम शुरू कर सकती हैं। धीरे-धीरे अपने ग्राहक बना सकती हैं। आगे चलकर अपना छोटा टेलरिंग सेंटर खोल सकती हैं। कुछ महिलाएं मिलकर भी काम शुरू कर सकती हैं। यानी शुरुआत एक सिलाई मशीन से होगी, लेकिन मंजिल आत्मनिर्भरता तक पहुंच सकती है।
रेणु सहगल बोलीं- महिला सशक्तीकरण का मतलब आर्थिक मजबूती भी
उद्घाटन के मौके पर स्वर्णरेखा महिला समिति की अध्यक्ष रेणु सहगल ने महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता को बेहद जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को पढ़ाना और शिक्षित करना जरूरी है, लेकिन उनकी क्षमता तब और बढ़ती है, जब उनके पास अपना हुनर और कमाई का साधन भी हो। आर्थिक रूप से मजबूत महिला अपने फैसले खुद ले सकती है और परिवार व समाज में सम्मान के साथ अपनी जगह बना सकती है। ‘प्रगति 2.0’ के पीछे भी यही सोच है कि महिलाएं किसी पर निर्भर रहने के बजाय अपने हुनर को अपनी ताकत बनाएं।

पतरातू की महिलाओं के लिए खुला उम्मीद का नया दरवाजा
हनुमानगढ़ी, शाह कॉलोनी और कटिया जैसे इलाकों की महिलाओं के लिए यह सेंटर कई मायनों में खास है। अब उन्हें प्रशिक्षण के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं होगी। अपने आसपास ही सीखने का अवसर मिलेगा। कई महिलाओं के लिए यह पहली बार होगा, जब वे नियमित रूप से किसी प्रशिक्षण केंद्र में जाकर अपने हुनर को बेहतर बनाएंगी। उनके लिए यह सीखने के साथ-साथ घर से बाहर निकलकर अपने लिए एक नई पहचान बनाने का अवसर भी है। शायद इसी वजह से उद्घाटन के मौके पर महिलाओं के चेहरों पर उत्साह साफ दिखाई दे रहा था।
आज शुरुआत हुई है, कल कई घरों में बदलेगी तस्वीर
उद्घाटन समारोह में स्वर्णरेखा महिला समिति के सदस्य, पीवीयूएनएल के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने इस पहल की सराहना की। लेकिन इस सेंटर की असली कहानी उद्घाटन के दिन नहीं, आने वाले दिनों में लिखी जाएगी। जब यहां प्रशिक्षण लेने वाली कोई महिला पहली बार अपने हाथों से कपड़ा सिलकर कमाई करेगी। जब कोई महिला घर से अपना छोटा काम शुरू करेगी। जब किसी परिवार को उसकी आमदनी से सहारा मिलेगा। तब शायद यह समझ में आएगा कि ‘प्रगति 2.0’ सिर्फ एक टेलरिंग सेंटर नहीं है। यह उन महिलाओं के लिए एक शुरुआत है, जो अपने हुनर को पहचान बनाना चाहती हैं। उन परिवारों के लिए उम्मीद है, जिन्हें अतिरिक्त आमदनी की जरूरत है। और उन बेटियों के लिए एक संदेश भी, कि अगर हाथों में हुनर हो और मन में हौसला, तो जिंदगी की सिलाई अपने हिसाब से भी की जा सकती है।
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