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Ranchi : झारखंड की गठबंधन सरकार पर भाजपा ने एक बार फिर जोरदार हमला बोला है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने आरोप लगाया है कि राज्य में अधिकारियों पर सरकार का नियंत्रण लगभग खत्म हो गया है। यही वजह है कि प्रशासनिक अनुशासन कमजोर पड़ता जा रहा है और जनता से जुड़े मामलों में अधिकारियों की जवाबदेही भी लगातार कम हो रही है।
प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रदीप सिन्हा ने कहा कि सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के निर्देशों की भी अधिकारी अनदेखी कर रहे हैं। इससे साफ है कि सरकार अपने ही प्रशासनिक तंत्र पर नियंत्रण बनाए रखने में नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि जब मंत्री और जनप्रतिनिधि ही अधिकारियों से जवाब मांगते रह जाएं और अधिकारी उनकी बात तक सुनने को तैयार न हों, तो यह स्थिति पूरे प्रशासनिक सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
देवघर एसपी के व्यवहार पर उठाए सवाल
प्रदीप सिन्हा ने हाल के दिनों में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के साथ देवघर के एसपी के कथित व्यवहार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने राज्य की प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों का अधिकारियों से संवाद होना सामान्य प्रक्रिया है। ऐसे में उनके साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार किसी भी स्थिति में उचित नहीं माना जा सकता।
उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू के फोन का अधिकारियों द्वारा जवाब नहीं दिए जाने का भी आरोप लगाया। प्रदीप सिन्हा ने कहा कि किसी जनप्रतिनिधि का फोन तक रिसीव नहीं करना अधिकारियों के गैर-जिम्मेदार रवैये को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और उनकी उपेक्षा करना जनता की आवाज की उपेक्षा करने जैसा है।
‘पहले भी राजनीतिक प्रतिशोध में कार्रवाई हुई’
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि यह पहली बार नहीं है, जब सरकार के संरक्षण में प्रशासन का दुरुपयोग किया गया हो। उन्होंने भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश के खिलाफ देशद्रोह जैसे गंभीर मामले में मुकदमा दर्ज किए जाने का जिक्र करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि उस समय भी प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल उठे थे और आज भी उसी तरह की मानसिकता प्रशासनिक व्यवस्था में दिखाई दे रही है। उनका आरोप था कि सरकार की चुप्पी के कारण अधिकारी अपनी मनमानी करने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं।
‘संविधान ने सबकी भूमिका तय की है’
प्रदीप सिन्हा ने कहा कि संविधान ने विधायिका और कार्यपालिका दोनों की भूमिका और जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय की हैं। जनप्रतिनिधि जनता की समस्याओं को लेकर अधिकारियों से संवाद करते हैं। ऐसे में अधिकारियों का भी दायित्व है कि वे संवैधानिक मर्यादा, शिष्टाचार और जवाबदेही का पालन करें। उन्होंने कहा कि अगर अधिकारी जनप्रतिनिधियों की बात सुनने से इनकार करेंगे या उनकी उपेक्षा करेंगे, तो इसका सीधा असर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ेगा। इससे जनता का प्रशासन और सरकार दोनों पर भरोसा कमजोर होगा।
मुख्यमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि पिछले करीब एक महीने से राज्य में मंत्रियों और अधिकारियों के बीच खींचतान की स्थिति बनी हुई है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री की ओर से कोई स्पष्ट हस्तक्षेप नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि राज्य में प्रशासन सरकार के निर्देशों के अनुसार चलेगा या अधिकारियों की मनमानी से।
प्रदीप सिन्हा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की चुप्पी प्रशासनिक अराजकता को अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण दे रही है। उन्होंने सरकार से प्रशासनिक अनुशासन बहाल करने, अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और जनप्रतिनिधियों के सम्मान की रक्षा के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा प्रदेश मीडिया विभाग के सह-संयोजक अजय राय और नीरज सिंह भी मौजूद थे।
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