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News Samvad : जब हौसलों में उड़ान हो और कुछ कर गुजरने की तमन्ना, तो गांव की संकरी गलियों से निकलकर देश की राजधानी तक का रास्ता तय करना मुश्किल नहीं रहता। कुछ ऐसी ही कहानी है मध्य प्रदेश के बड़वानी, विदिशा और रायसेन जिलों की उन पांच महिलाओं की, जिन्होंने अपने गांव में किराना दुकान की छोटी सी शुरुआत की और आज दूसरी महिलाओं के लिए मिसाल बन चुकी हैं। नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में रिलायंस फाउंडेशन और नीति आयोग ने इन पांच महिला किराना कारोबारियों को सम्मानित किया। इसके साथ ही उनके कारोबार को और आगे बढ़ाने के लिए 1-1 लाख रुपये का प्रोत्साहन अनुदान भी दिया।
छोटी सी दुकान, बड़ा बदलाव
गांव-देहात में किराना की दुकान चलाना सिर्फ सामान बेचने तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह गांव की रोजमर्रा की जरूरतों और सामाजिक तालमेल का एक अहम केंद्र होता है। बड़वानी, विदिशा और रायसेन की इन महिलाओं ने जब पहली बार दुकान संभाली, तो चुनौतियां कम नहीं थीं। हिसाब-किताब का डर, माल कहां से खरीदें और घाटे से कैसे बचें… ये सवाल हर रोज सामने आते थे। इसी झिझक को दूर करने के लिए रिलायंस फाउंडेशन और नीति आयोग के ‘महिला उद्यमिता मंच’ (WEP) ने ‘RWKE’ (एम्पावरिंग रूरल वूमेन किराना एंटरप्रेन्योर्स) नाम का एक विशेष पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया। इसमें तकनीकी साझेदार के रूप में ‘माइक्रोसेव कंसल्टिंग’ (MSC) ने भी अहम भूमिका निभाई।

जब अपनी बोली में सीखी व्यापार की बारीकियां
किसी भी नए काम को सीखने की पहली शर्त होती है भाषा की सरलता। महिलाओं को यह ट्रेनिंग किसी कठिन किताबी ज्ञान की तरह नहीं, बल्कि उनकी अपनी स्थानीय बोली में दी गई। दुकान चलाने के पुराने तरीकों को बदलकर उन्हें आधुनिक दौर से जोड़ा गया:
डिजिटल पेमेंट की शुरुआत : अब दुकानों पर QR कोड और UPI का इस्तेमाल होने लगा है। महिलाओं को मोबाइल Banking से लेनदेन करना सिखाया गया।
बजट और बचत का संतुलन : रोज की बिक्री में से कितना पैसा सामान मंगवाने में जाएगा और कितनी शुद्ध बचत होगी, इसका हिसाब-किताब खुद रखना सिखाया गया।
स्टॉक और नुकसान से बचाव : किस मौसम में किस सामान की मांग ज्यादा रहती है और माल को खराब होने से कैसे बचाया जाए, इसकी बारीक जानकारियां दी गईं।
1200 घंटे की मेहनत ने बदला आत्मविश्वास
इस अभियान के तहत अब तक 108 महिला दुकानदारों को जोड़ा जा चुका है। इनके लिए 175 से ज्यादा ट्रेनिंग सेशन आयोजित किए गए, जिनमें कुल मिलाकर 1,200 घंटे से अधिक का प्रशिक्षण दिया गया। नतीजा यह रहा कि जिन महिलाओं को कभी ऑनलाइन पेमेंट लेने में डर लगता था, वे अब अपनी दुकान का हर छोटा-बड़ा हिसाब खुद चुटकियों में कर लेती हैं।
दिल्ली के मंच पर मिला सम्मान और नया हौसला
दिल्ली के सम्मान समारोह में नीति आयोग के सदस्य डॉ. जोराम अनिया, महिला उद्यमिता मंच की मिशन निदेशक अन्ना रॉय, रिलायंस फाउंडेशन की महिला सशक्तिकरण प्रमुख दीप्ति नुकालापति और माइक्रोसेव कंसल्टिंग की सोनल जेटली सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सम्मान पाने के बाद इन महिलाओं के चेहरे पर गर्व साफ झलक रहा था। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि ट्रेनिंग से मिली जानकारी और अब मिले 1-1 लाख रुपये के अनुदान से वे अपनी दुकानों का विस्तार करेंगी।
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