अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : भुरकुंडा रिवर साइड स्थित सीसीएल कोलियरी कर्मचारी संघ के क्षेत्रीय कार्यालय में कुछ अलग ही माहौल था। सुबह से ही मजदूर और संगठन के कार्यकर्ता पहुंचने लगे थे। कोई साथियों के साथ आया था तो कोई सीधे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर तैयारियों में जुट गया। देखते ही देखते कार्यालय परिसर लोगों से भर गया। भारत माता के जयकारों के बीच जब झंडोतोलन हुआ तो पूरा माहौल जोश से भर उठा। मौका था भारतीय मजदूर संघ के 72वें स्थापना दिवस का। यह सिर्फ एक संगठन का स्थापना दिवस नहीं था, बल्कि उन हजारों मजदूरों की मेहनत और संघर्ष को याद करने का दिन भी था, जिन्होंने वर्षों से संगठन को मजबूती दी है।
दीप जला तो याद आया 1955 का वह सफर
झंडोतोलन के बाद सभागार में भारत माता, श्रम के देवता भगवान विश्वकर्मा और बीएमएस के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगड़ी के चित्रों पर माल्यार्पण किया गया। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। मंच पर मौजूद वक्ताओं ने BMS के 72 साल के सफर की चर्चा की। वर्ष 1955 में शुरू हुआ यह संगठन आज देश का सबसे बड़ा मजदूर संगठन बन चुका है। वक्ताओं ने कहा कि यह सफर सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है। इसके पीछे मजदूरों की एकजुटता, संघर्ष और संगठन के प्रति भरोसा है।

एक नारे में पूरी सोच
सीसीएल सीकेएस के महामंत्री शशिभूषण सिंह ने जब कहा, “देशहित में करेंगे काम, काम का लेंगे पूरा दाम”, तो यह नारा कार्यक्रम की पूरी भावना बन गया। उन्होंने कहा कि बीएमएस की सोच साफ है। मजदूर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएगा, लेकिन देश और उद्योग की प्रगति में भी अपनी भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित और मजदूर हित एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। देश मजबूत होगा तो उद्योग मजबूत होंगे और उद्योग मजबूत होंगे तो मजदूरों का भविष्य भी बेहतर होगा।
मजदूर उद्योग की असली ताकत
सीसीएल बरका-सयाल प्रक्षेत्र के महाप्रबंधक रंजन कुमार सिन्हा ने कहा कि बीएमएस सिर्फ एक यूनियन नहीं है। मजदूरों की समस्याओं को उठाने के साथ संगठन उद्योग और राष्ट्र की प्रगति में भी अपनी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी उद्योग की असली ताकत वहां काम करने वाले मजदूर होते हैं। उनकी मेहनत से उत्पादन होता है और संस्थान आगे बढ़ता है। इसलिए मजदूर हित और संस्थान हित के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।

सम्मान भी हुआ, संकल्प भी लिया
कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों को अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने दत्तोपंत ठेंगड़ी की विचारधारा और संगठन के सिद्धांतों पर भी चर्चा की। मजदूरों की समस्याओं को मजबूती से उठाने और संगठन को और मजबूत बनाने का संकल्प लिया गया।
क्षेत्रीय अध्यक्ष सुभाष चंद्र ओझा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मंच संचालन क्षेत्रीय सचिव शंभू प्रसाद सिंह ने किया। समारोह में महाप्रबंधक रंजन कुमार सिन्हा, एसओपी अजय सिंह, भुरकुंडा पीओ कुमार राकेश सत्यार्थी, सौंदा डी पीओ अजय कुमार मेहता, शिव शंकर सिंह, बृजकिशोर पासवान, सरोज कुमार राणा, अनिल पासवान, कन्हैया सिंह यादव, संतोष पांडेय, बीना देवी, रुखी देवी और जमुवंती देवी सहित सैकड़ों मजदूर और कार्यकर्ता शामिल हुए।
कार्यक्रम के अंत में एक बार फिर जयकारे गूंजे। 72 साल का सफर पूरा कर चुका बीएमएस अब भी उसी संकल्प के साथ आगे बढ़ने की बात कह रहा है, जिसमें मजदूर का सम्मान भी है और देशहित भी।
इसे भी पढ़ें : CCL में भविष्य की सबसे बड़ी सीख… स्मार्ट AI + इंसानी दिल = सुपर सफलता

