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Patna : बिहार के किसी गांव में सुबह-सुबह कोई बच्चा खाली मैदान में दौड़ लगा रहा है। कहीं कोई युवा टूटी-फूटी पिच पर गेंदबाजी का अभ्यास कर रहा है। किसी पंचायत में कोई लड़की बिना बेहतर सुविधाओं के भी लंबी छलांग लगाने की कोशिश कर रही है। अब सरकार ऐसे ही बच्चों और युवाओं को तलाशने के लिए गांव-गांव जाने की तैयारी में है। बिहार में 15 सितंबर से हर पंचायत में विशेष खेल प्रतिभा खोज अभियान शुरू होगा। सरकार का मकसद साफ है, जो प्रतिभा अब तक संसाधनों और सही मंच के अभाव में गांवों तक सीमित है, उसे पहचानकर आगे बढ़ाया जाए। सीएम सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को पटना के राजवंशीनगर स्थित ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित खेल सम्मान समारोह में कहा कि बिहार के खिलाड़ियों को अब बड़े सपने देखने चाहिए। सरकार उन्हें मैदान, प्रशिक्षण, छात्रवृत्ति और नौकरी, हर स्तर पर मदद देने की दिशा में काम कर रही है।

अब गांव के मैदान निकलेगा खिलाड़ी
पिछले दो वर्षों में बिहार में 5 हजार खेल मैदानों का निर्माण पूरा किया गया है। सरकार अब इन मैदानों को सिर्फ खाली जगह नहीं रहने देना चाहती। इन मैदानों से खिलाड़ियों की नई पीढ़ी तैयार करने की योजना है। सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि 15 सितंबर से पंचायत स्तर पर खेल प्रतिभाओं की पहचान की जाएगी। बच्चों और युवाओं को अलग-अलग खेलों में उनकी क्षमता के आधार पर चुना जाएगा। इसके बाद उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका मतलब यह है कि अब किसी खिलाड़ी को सिर्फ इसलिए पीछे नहीं रहना पड़ेगा कि वह पटना, गया या किसी बड़े शहर में पैदा नहीं हुआ है। सरकार चाहती है कि गांव का खिलाड़ी भी बड़े मंच तक पहुंचे।

जिनके हाथ में मेडल आया, उन्हें नौकरी भी मिली
पटना में आयोजित कार्यक्रम में ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत 19 खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी आकाश दीप और मुकेश कुमार को डीएसपी बनाया गया। एथलेटिक्स खिलाड़ी पियूष राज को पुलिस सब इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्ति दी गई। पांच पैरा खिलाड़ियों सहित अलग-अलग खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी सरकारी नौकरी दी गई। सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि खिलाड़ियों को यह भरोसा होना चाहिए कि अगर वे मैदान पर मेहनत करते हैं और देश व राज्य का नाम रोशन करते हैं तो सरकार उनके भविष्य की भी चिंता करेगी।
बिहार के लिए यह इसलिए भी खास मौका है क्योंकि पहली बार किसी खिलाड़ी को डीएसपी जैसे बड़े पद पर नियुक्ति दी गई है। एक खिलाड़ी के लिए यह सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए संदेश है जो आज किसी छोटे मैदान में अपने सपनों की शुरुआत कर रहे हैं।

लक्ष्य सिर्फ पदक नहीं, बिहार को नंबर-1 बनाना है
सीएम सम्राट चौधरी ने खिलाड़ियों से कहा कि अब लक्ष्य केवल पदक जीतना नहीं होना चाहिए। बिहार को राष्ट्रीय खेलों में देश का नंबर-1 राज्य बनाने का लक्ष्य रखना होगा। उन्होंने कहा कि बिहार के खिलाड़ियों को ओलंपिक, विश्व कप, एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और आईपीएल जैसे बड़े मंचों तक पहुंचाने के लिए तैयारी की जा रही है। बिहार में प्रतिभा की कमी नहीं है। कमी रही है तो बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाओं और लगातार मौके की। सरकार अब इसी कमी को दूर करने पर जोर दे रही है।
मोइनुल हक स्टेडियम फिर बनेगा बड़े मुकाबलों का केंद्र
पटना का मोइनुल हक स्टेडियम भी अब नए रूप में नजर आएगा। स्टेडियम का पुनर्विकास किया जा रहा है और इसके संचालन की जिम्मेदारी बीसीसीआई को दी गई है। करीब 40 हजार दर्शकों की क्षमता वाला यह स्टेडियम आधुनिक सुविधाओं से तैयार किया जाएगा। यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबले हो सकेंगे। जिस बिहार के खिलाड़ियों को कभी बड़े टूर्नामेंट के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था, उसी बिहार में आने वाले समय में बड़े मुकाबले होंगे और राज्य के खिलाड़ी अपने ही घर में विश्वस्तरीय सुविधाओं के बीच तैयारी कर सकेंगे।

नालंदा की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी से लेकर गांव के खेल मैदान तक
बिहार में खेलों को बढ़ावा देने के लिए नालंदा में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई है। राज्य में अलग-अलग खेलों के विश्व कप स्तर के आयोजन भी हो चुके हैं। सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की धरती पर भारत ने तीन विश्व कप जीते हैं। यह राज्य के लिए गर्व की बात है और इससे बिहार की खेल क्षमता को नई पहचान मिली है। अब सरकार की कोशिश है कि बड़े संस्थानों और स्टेडियमों के साथ-साथ पंचायत स्तर के मैदान भी खेल व्यवस्था का हिस्सा बनें। यानी एक तरफ नालंदा की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी होगी तो दूसरी तरफ गांव का मैदान, दोनों मिलकर खिलाड़ी तैयार करेंगे।
637 खिलाड़ियों को मिलेगी लाखों की छात्रवृत्ति
खिलाड़ियों को सिर्फ नौकरी ही नहीं, उनकी तैयारी के लिए आर्थिक मदद भी दी जाएगी। बिहार खेल छात्रवृत्ति योजना 2026 के तहत इस वित्तीय वर्ष में 637 खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति देने की योजना है। इनमें उत्कर्ष छात्रवृत्ति के तहत 21 खिलाड़ियों को 20 लाख रुपये प्रतिवर्ष दिये जायेंगे। वहीं, सक्षम छात्रवृत्ति के तहत 184 खिलाड़ियों को 5 लाख रुपये प्रतिवर्ष और प्रेरणा छात्रवृत्ति के तहत 432 खिलाड़ियों को 3 लाख रुपये प्रतिवर्ष दिये जायेंगे। इस रकम से खिलाड़ियों को ट्रेनिंग, पोषण, खेल सामग्री, प्रतियोगिताओं में भाग लेने और खेल विज्ञान से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। प्रेरणा छात्रवृत्ति के 432 खिलाड़ियों में 269 का चयन राज्यव्यापी मशाल प्रतिभा खोज कार्यक्रम के जरिए किया गया है।

सेतु मिश्रा को 37.50 लाख, मरियम फातिमा को 9 लाख
समारोह में खिलाड़ियों की मेहनत को सम्मानित भी किया गया। एशियन अंडर-23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में स्वर्ण और रजत पदक जीतने वाले सेतु मिश्रा को 37.50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीतने वाला बिहार का पहला खिलाड़ी बनने पर यह सम्मान मिला। भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले विभास्कर कुमार को 2 लाख रुपये दिए गए। शतरंज खिलाड़ी मरियम फातिमा को कॉमनवेल्थ यूथ शतरंज चैंपियनशिप 2026 की ब्लिट्ज स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने पर 9 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई।
बड़े मंचों पर नाम रोशन करेंगे बिहार के खिलाड़ी
बिहार में खेल प्रतिभा खोज का यह अभियान सिर्फ सरकारी योजना नहीं, बल्कि उन बच्चों के लिए उम्मीद है जिनके पास प्रतिभा तो है, लेकिन उसे दिखाने का मंच नहीं। किसी गांव में क्रिकेट खेलने वाला बच्चा हो, किसी पंचायत में दौड़ने वाली लड़की हो या किसी छोटे कस्बे का शतरंज खिलाड़ी, अब सरकार उन्हें तलाशने की तैयारी में है। सीएम सम्राट चौधरी ने खिलाड़ियों से कहा कि आने वाले वर्षों में बिहार के खिलाड़ी ओलंपिक, एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स, विश्व कप और आईपीएल जैसे बड़े मंचों पर राज्य और देश का नाम रोशन करें।
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