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Ranchi : भीड़भाड़ से भरा रांची रेलवे स्टेशन, अनाउंसमेंट की गूंज और ट्रेन पकड़ने के लिए तेजी से कदम बढ़ाते लोग। किसी को घर पहुंचने की जल्दी, तो कोई महीनों पहले टिकट न मिल पाने के मलाल में काउंटर से लेकर प्लेटफॉर्म तक भटकता हुआ। ट्रेन पकड़ने की इसी हड़बड़ी और मजबूरी का फायदा उठाकर कुछ शातिर दिमागों ने रांची रेलवे स्टेशन को ठगी का अड्डा बना रखा था। फर्क सिर्फ इतना था कि इस बार ठगी जेबकतरों ने नहीं, बल्कि गले में फर्जी पहचान पत्र और चेहरे पर सरकारी अफसर की अकड़ लिए घूम रहे ‘नकली TTE’ ने की।
भरोसा देकर जेब ढीली कराने का हुनर
25 जुलाई की सुबह रांची स्टेशन का नजारा रोज जैसा ही था। यूटीएस बुकिंग काउंटर के पास यात्रियों की चहल-पहल थी। इन्हीं के बीच उमर साद खान नाम का एक यात्री काफी परेशान दिख रहा था। उसे कन्फर्म टिकट की सख्त जरूरत थी। तभी दो शख्स बड़ी आत्मीयता से उसके पास पहुंचते हैं। बातचीत में खुद को रेलवे का बड़ा अधिकारी और TTE बताते हैं।
“टिकट की चिंता छोड़िए, अभी कन्फर्म करा देते हैं,” यह भरोसा देकर वे उमर से 2,000 रुपये नकद ले लेते हैं। लेकिन जैसे ही रुपये हाथ में आए, दोनों धीरे-धीरे खिसकने की कोशिश करने लगे। उमर को जब तक अहसास होता कि उनके साथ खेल हो चुका है, तब तक RPF की टीम सीन में आ चुकी थी।
RPF का ‘ऑपरेशन रक्षक’ और दो संदेही
दरअसल, RPF को काफी समय से गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं कि स्टेशन परिसर में कुछ लोग यात्रियों को कन्फर्म टिकट का झांसा देकर ठग रहे हैं। RPF ने सादे लिबास में अपने जवानों को तैनात कर रखा था। सुबह की निगरानी के दौरान RPF की नजर यूटीएस काउंटर के पास घूम रहे दो संदिग्धों पर पड़ी। पूछताछ में उन्होंने अपना नाम महेश साहनी और चंदन कुमार बताया। जब पीड़ित उमर साद खान ने आपबीती बताई और तलाशी ली गई, तो उनके पास से ठगी के 2000 रुपये नकद और कई मोबाइल फोन बरामद हुए।
एक के बाद एक खुलती गईं परतें
महेश और चंदन से जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो पता चला कि यह दो लोगों का काम नहीं, बल्कि पूरा एक गिरोह है जो स्टेशन पर आने वाले सीधे-सादे और मजबूर यात्रियों को अपना निशाना बनाता है। उनकी निशानदेही पर RPF की टीम ने तुरंत स्टेशन परिसर के दूसरे हिस्सों में छापेमारी की और गिरोह के दो और सदस्यों सीतल राय और संतोष साहनी को दबोच लिया। इनके पास से कुल 7 मोबाइल बरामद हुए, जिनमें से 2 चोरी के निकले।
अब जेल की सलाखों के पीछे ‘फर्जी साहेब’
पूछताछ में चारों ने कबूल किया कि वे एक संगठित गिरोह चला रहे थे। TTE का नाटक करना, फर्जी रौब दिखाना और जरूरतमंद यात्रियों को कन्फर्म टिकट के नाम पर लूटना उनका रोज का काम था। धोखाधड़ी, फर्जी पहचान बनाने और आपराधिक साजिश रचने जैसी धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए RPF ने चारों आरोपियों, जब्त मोबाइल और जब्ती सूची को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए GRP रांची के हवाले कर दिया है। GRP ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इस सफल कार्रवाई में IPF शिशुपाल कुमार, SI बसंत मलिक, SI पवन कुमार, SI कमल दास, ASI शक्ति सिंह, मुन्तज़िर अंसारी, अफरोज आलम और राजू गुरूंग की अहम भूमिका रही।
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