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Patna : राजधानी पटना लगातार बढ़ रही है। आबादी बढ़ रही है, नए मोहल्ले बस रहे हैं और शहर की सीमाएं हर साल थोड़ी और आगे खिसक रही हैं। लेकिन शहर जितनी तेजी से फैल रहा है, उतनी ही तेजी से ट्रैफिक, अव्यवस्थित कॉलोनियां, बुनियादी सुविधाओं की कमी और अनियोजित निर्माण जैसी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। ऐसे समय में बिहार सरकार अब पटना को बिना योजना के फैलाने के बजाय सोच-समझकर बसाने की तैयारी में जुट गई है। इसी सोच के साथ पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप की विकास योजना-2047 (प्रारूप) को अधिसूचित कर दिया गया है। नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा का कहना है कि यह सिर्फ एक सरकारी अधिसूचना नहीं है, बल्कि आने वाले दो दशकों के पटना की नई तस्वीर तैयार करने की शुरुआत है।
अब रुकेगा नहीं विकास का पहिया
मंत्री नीतीश मिश्रा ने बताया कि 31 जुलाई को बिहार शहरी आयोजना एवं विकास बोर्ड की 14वीं बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई थी। अब इसके प्रारूप को अधिसूचित कर दिया गया है। सबसे अहम बात यह है कि इस क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण पर लगी रोक भी हटा दी गई है। इस फैसले के बाद लंबे समय से इंतजार कर रहे जमीन मालिकों, खरीदारों और निवेशकों को राहत मिलेगी। अब जमीन से जुड़े काम दोबारा शुरू हो सकेंगे और इलाके में विकास की गतिविधियां भी तेज होंगी।
सरकार अकेले नहीं बनाएगी योजना, लोगों की राय भी होगी शामिल
सरकार चाहती है कि शहर का भविष्य सिर्फ सरकारी दफ्तरों में बैठकर तय न हो। इसलिए विकास योजना का प्रारूप राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया है और अगले 60 दिनों तक आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी जाएंगी। अगर किसी व्यक्ति, संस्था या जमीन मालिक को लगता है कि योजना में किसी बदलाव की जरूरत है, तो वह अपनी बात सरकार तक पहुंचा सकता है। सभी सुझावों पर नियम के अनुसार विचार किया जाएगा और उसके बाद ही अंतिम विकास योजना तैयार होगी।
एक ऐसा शहर, जहां पहले होगी प्लानिंग, फिर होगा निर्माण
आज पटना के कई इलाकों में सड़क बनने के बाद नाली खोदी जाती है, बिजली के खंभे लगाने के लिए नई सड़क काटी जाती है और कई कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाएं बाद में पहुंचती हैं। सरकार का दावा है कि ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप में ऐसा नहीं होगा। यहां पहले पूरी प्लानिंग होगी, उसके बाद सड़कें, जल निकासी, बिजली, हरित क्षेत्र, सार्वजनिक सुविधाएं और अन्य आधारभूत ढांचे विकसित किए जाएंगे। कोशिश यह रहेगी कि लोगों को शुरू से ही बेहतर शहरी सुविधाएं मिलें।
मुख्यमंत्री के विजन को आगे बढ़ाने की कोशिश
मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी विकसित, आधुनिक और सुनियोजित बिहार का विजन लेकर आगे बढ़ रहे हैं। पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप उसी सोच का अहम हिस्सा है। यहां विश्वस्तरीय शहरी सुविधाएं, बेहतर कनेक्टिविटी, पर्यावरण के अनुकूल विकास और नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप आधारभूत ढांचा तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में जब पटना की आबादी और बढ़ेगी, तब यह परियोजना शहर का दबाव कम करने और लोगों को बेहतर जीवन देने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार हो रही है योजना
शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शहर का विस्तार तभी सफल माना जाता है, जब वहां सड़क, पानी, सीवर, हरित क्षेत्र, परिवहन और आवास जैसी सुविधाएं पहले से तय योजना के तहत विकसित हों। बिहार सरकार भी अब इसी मॉडल पर आगे बढ़ने की बात कर रही है। पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप की विकास योजना-2047 को इसी नजरिए से तैयार किया गया है। सरकार का दावा है कि यह परियोजना सिर्फ नई इमारतें खड़ी करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक व्यवस्थित, सुविधाजनक और टिकाऊ शहरी व्यवस्था तैयार करेगी।
नई दिशा, नया भरोसा
जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक हटने से लोगों का भरोसा भी बढ़ा है। निवेशकों के लिए रास्ता खुला है, जमीन मालिकों को राहत मिली है और सरकार को उम्मीद है कि जनता की भागीदारी के साथ तैयार होने वाली यह योजना आने वाले समय में पटना के विकास की नई पहचान बनेगी। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार आगे बढ़ा, तो आने वाले वर्षों में राजधानी का यह इलाका बिहार के सबसे आधुनिक और सुनियोजित शहरी क्षेत्रों में गिना जाएगा।
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