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Saharsha : बिहार के सहरसा में शुक्रवार सुबह शिक्षा विभाग के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) अजीत अमर के ठिकानों पर EOU यानी आर्थिक अपराध इकाई ने बड़ी कार्रवाई शुरू की। भोर से ही EOU की अलग-अलग टीमें उनके नयाबाजार स्थित आवास, शिक्षा विभाग के कार्यालय समेत कुल चार ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर रही हैं। सहरसा के अलावा सिवान और छपरा में भी एक साथ कार्रवाई चल रही है। कई घंटों से जारी इस छापेमारी के दौरान टीम महत्वपूर्ण दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े कागजातों की बारीकी से जांच कर रही है।
आय से अधिक संपत्ति के आरोप की जांच
EOU की शुरुआती जांच में सामने आया है कि डीपीओ अजीत अमर ने अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से करीब 72 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की है। इसी आरोप के आधार पर आर्थिक अपराध इकाई ने यह कार्रवाई शुरू की है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि उनके नाम या परिजनों के नाम पर कितनी संपत्ति है, उसका स्रोत क्या है और वित्तीय लेन-देन में कहीं कोई अनियमितता तो नहीं हुई।
ईओयू के अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामले में की जा रही है। टीम बैंक खातों, निवेश, जमीन-जायदाद और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की भी जांच कर रही है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
कार्यालय में नहीं मिले दस्तावेज, दूसरे ठिकानों से मिली अहम सामग्री
जांच में शामिल अधिकारियों ने बताया कि सहरसा स्थित शिक्षा विभाग के कार्यालय से कोई खास दस्तावेज बरामद नहीं हुए हैं। हालांकि बिहार के अन्य तीन ठिकानों पर चल रही छापेमारी के दौरान कई संदिग्ध दस्तावेज और अन्य सामग्री मिली है। बरामद कागजातों की जांच अलग-अलग टीमें कर रही हैं और उनकी पड़ताल के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।
EOU के एक अधिकारी ने बताया कि सहरसा, सिवान और छपरा में एक साथ कार्रवाई चल रही है। शुरुआती जांच में आय से 72 प्रतिशत अधिक संपत्ति होने की बात सामने आई है। फिलहाल बरामद दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है और जांच पूरी होने के बाद ही विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।
देर शाम तक जारी रह सकती है कार्रवाई
छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में ईओयू के अधिकारी और पुलिस बल तैनात हैं। किसी भी दस्तावेज को बिना जांच के नहीं छोड़ा जा रहा है। टीम संपत्ति से जुड़े कागजात, बैंक रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों को खंगाल रही है। फिलहाल कार्रवाई जारी है और अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितनी संपत्ति, दस्तावेज या अन्य सामग्री बरामद हुई है और आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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