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Ranchi : झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर छात्रों का आंदोलन अब और तेज हो गया है। शुक्रवार को आंदोलन के 14वें दिन राजधानी रांची में सड़क से लेकर विधानसभा तक विरोध की गूंज सुनाई दी। छात्रों के समर्थन में विधानसभा मार्च निकाल रहे AISA कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच कई जगह धक्का-मुक्की हुई। इसी दौरान AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंके जाने की घटना भी सामने आई। हालांकि, स्याही किसने फेंकी और इसके पीछे क्या वजह थी, इसे लेकर अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
नेहा बोरा विधानसभा मार्च से पहले जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचीं, जहां पिछले करीब दो सप्ताह से छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों से मुलाकात की, उनका हाल जाना और कहा कि उनकी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाया जाएगा। इसके बाद AISA के बैनर तले बड़ी संख्या में छात्र और कार्यकर्ता विधानसभा की ओर बढ़े।
#WATCH | रांची, झारखंड | ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंकी गई।
उन्होंने कहा, “20 जुलाई को हम पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए, पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया; जब हम तब नहीं डरे, तो यह मामूली स्याही हमारा क्या बिगाड़ लेगी?…” pic.twitter.com/uU7E2a6Qvl
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 7, 2026
विधानसभा मार्च के दौरान बढ़ा तनाव
विधानसभा मार्च के दौरान माहौल उस समय अचानक गरमा गया, जब नेहा बोरा पर स्याही फेंकने की घटना हुई। घटना के बाद कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया। पुलिस ने स्थिति को संभालने की कोशिश की और मार्च को आगे बढ़ने से रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी। शुक्रवार को विधानसभा के बाहर प्रदर्शन जारी रहा तो अंदर भी यही मुद्दा गूंजता रहा। JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा, जिससे प्रश्नकाल भी प्रभावित हुआ। आंदोलन अब केवल सड़क तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर विधानसभा की कार्यवाही पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
भर्ती परीक्षाओं की जांच की मांग पर अड़े छात्र
आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं बरती गई। उनका आरोप है कि पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में कई तरह की अनियमितताएं हुई हैं। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि मौजूदा जांच से उन्हें संतोष नहीं है।
इधर, अभ्यर्थी न्याय मंच ने सरकार से बातचीत की तैयारी भी शुरू कर दी है। मंच ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है। इस प्रतिनिधिमंडल में रामावतार महतो, दीनबंधु मंडल, चंदन कुमार, रवि शंकर, प्रेम कुमार, अमित कुमार और विमल कुमार शामिल हैं। यह प्रतिनिधिमंडल छात्रों और अभ्यर्थियों की मांगों को सरकार के सामने रखेगा।
आंदोलन लगातार लंबा खिंचने के साथ भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की सेहत भी चिंता का विषय बनती जा रही है। शुक्रवार को एक छात्र की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं और आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।
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