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Patna : सोचिए, अगर किसी के मोबाइल पर बैंक अधिकारी बनकर फोन आए, ओटीपी या स्क्रीन शेयर करवाकर कुछ ही मिनटों में खाते से लाखों रुपये उड़ा दिए जाएं, तो सबसे पहले क्या करना चाहिए? अक्सर लोग घबरा जाते हैं, रिश्तेदारों को फोन करते हैं या बैंक का चक्कर लगाने लगते हैं। इसी देरी का फायदा साइबर अपराधी उठा लेते हैं। बिहार सरकार अब इसी देरी को खत्म करना चाहती है। सरकार का मानना है कि अगर हर व्यक्ति को यह पता हो कि साइबर ठगी होते ही 1930 हेल्पलाइन पर तुरंत शिकायत करनी है, तो बड़ी रकम बचाई जा सकती है। यही वजह है कि अब इस नंबर को लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और डीजीपी विनय कुमार ने राज्य के तमाम डीएम और पुलिस कप्तानों के साथ समीक्षा बैठक कर साफ कहा कि साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई सिर्फ पुलिस की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
हर दिन नजर आएगा 1930, ताकि जरूरत पड़ने पर याद रहे
सरकार की सबसे बड़ी चिंता यही है कि ठगी होने के बाद भी बड़ी संख्या में लोगों को यह नहीं पता होता कि तुरंत शिकायत कहां करें। इसलिए अब 1930 नंबर को हर उस जगह तक पहुंचाने की योजना है, जहां आम आदमी रोज आता-जाता है। अब बिजली के बिल पर यह नंबर छपा होगा। बिजली का बिल जमा करने वाले मोबाइल ऐप खोलते ही भी यह संदेश दिखाई देगा। सरकार चाहती है कि जब लोग हर महीने बिजली का बिल देखें तो यह नंबर भी उनकी नजर में रहे। यही नहीं, बिहार के लगभग हर घर तक पहुंचने वाला सुधा दूध भी साइबर जागरूकता का माध्यम बनेगा। दूध और अन्य डेयरी उत्पादों की पैकेजिंग पर 1930 हेल्पलाइन नंबर छापने की तैयारी है। सुधा पार्लर और बूथों पर भी इस नंबर को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। नगर निगमों को भी निर्देश दिया गया है कि शहरों के डिजिटल होर्डिंग, एलईडी स्क्रीन और सार्वजनिक स्थानों पर लगातार साइबर सुरक्षा से जुड़े संदेश चलाए जाएं।
बच्चों और युवाओं को भी बनाया जाएगा साइबर स्मार्ट
आज सबसे ज्यादा समय इंटरनेट पर युवा और बच्चे बिताते हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि साइबर अपराधियों के नए-नए तरीकों की जानकारी स्कूल और कॉलेज स्तर से ही दी जाए। इसी मकसद से ‘साइबर मंगलवार’ जैसे जागरूकता कार्यक्रमों को नियमित रूप से चलाने का फैसला लिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि जागरूक छात्र अपने परिवार को भी साइबर ठगी से बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
आंकड़े बता रहे हैं कि चुनौती कितनी बड़ी है
समीक्षा बैठक में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि बिहार साइबर अपराध के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहा है, लेकिन चुनौती अभी भी बड़ी है। ऑपरेशन साइबर प्रहार के तहत अब तक 6,251 म्यूल बैंक खातों का सत्यापन किया गया है। 702 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई है और 507 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। म्यूल बैंक खाते वे खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी की रकम इधर-उधर करने के लिए करते हैं। ऐसे खातों पर कार्रवाई से पूरे नेटवर्क पर असर पड़ता है।

बिहार के चार जिले देश के साइबर हॉटस्पॉट में
बैठक में यह भी बताया गया कि देश के प्रमुख साइबर हॉटस्पॉट जिलों में बिहार के चार जिले शामिल हैं। नवादा दूसरे, नालंदा चौथे, पटना सातवें और शेखपुरा पंद्रहवें स्थान पर है। इसके अलावा एटीएम और चेक के जरिए होने वाली वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में भी पटना देश के प्रमुख जिलों में गिना गया है। इसी वजह से इन जिलों में निगरानी बढ़ाने और अपराधियों के खिलाफ तेज कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
हजारों लोगों को वापस मिल रही ठगी की रकम
साइबर अपराध के मामलों में अब सिर्फ एफआईआर दर्ज करने पर ही जोर नहीं है, बल्कि पीड़ितों को उनका पैसा जल्द वापस दिलाने की कोशिश भी तेज हुई है। Money Restoration Module (MRM) के तहत बिहार में 16,593 मामलों पर काम चल रहा है। इनमें से 5,642 मामलों में पुलिस की कार्रवाई के बाद करीब 224.53 लाख रुपये वापस कराने के आदेश जारी किए जा चुके हैं। वहीं Grievance Redressal Module (GRM) के तहत बैंकों द्वारा गलत तरीके से फ्रीज किए गए खातों से जुड़ी 98 प्रतिशत से अधिक शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है।
दूसरे राज्यों के साथ भी बढ़ा तालमेल
साइबर अपराध की कोई सीमा नहीं होती। अपराधी एक राज्य में बैठकर दूसरे राज्य के लोगों को निशाना बनाते हैं। इसी वजह से राज्यों के बीच तालमेल बेहद जरूरी है। बिहार पुलिस ने समन्वय (CIAR) पोर्टल के जरिए दूसरे राज्यों से मिले 90.22 प्रतिशत जांच अनुरोधों का सफल निष्पादन किया है। वहीं सहयोग पोर्टल के माध्यम से भेजे गए अनुरोधों पर 75.65 प्रतिशत आपत्तिजनक और फर्जी यूआरएल हटवाए जा चुके हैं।
पुलिस को भी मिल रही नई तकनीक की ट्रेनिंग
साइबर अपराध लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में पुलिस को भी आधुनिक तकनीक से लैस किया जा रहा है। अब तक 4,221 से ज्यादा पुलिस अधिकारियों को साइबर अपराध अनुसंधान और साइबर सुरक्षा का विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि हर जिले में ऐसे प्रशिक्षित अधिकारी उपलब्ध रहें जो साइबर मामलों की जांच तेजी से कर सकें।
फर्जी सिम और म्यूल खातों पर होगी सख्ती
बैठक में अधिकारियों को साफ निर्देश दिया गया कि एक लाख रुपये या उससे अधिक की साइबर ठगी के मामलों में e-Zero FIR दर्ज करने की प्रक्रिया तेज की जाए और उसे तुरंत नियमित एफआईआर में बदला जाए। जिलाधिकारियों को बैंकों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर म्यूल खातों को तुरंत फ्रीज कराने और पीड़ितों की रकम वापस दिलाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही फर्जी दस्तावेजों पर सिम बेचने वाले एजेंटों और ऐसे गिरोहों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने का भी निर्देश दिया गया है।
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