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News Samvad : नौकरी और बच्चों की परवरिश के बीच तालमेल बैठाना कामकाजी माता-पिता के लिए हमेशा से बड़ी चुनौती रहा है। खासकर छोटे बच्चों की देखभाल को लेकर माता-पिता को अक्सर ऑफिस और घर के बीच काफी भागदौड़ करनी पड़ती है। अब नए लेबर कोड के तहत इस परेशानी को कम करने की कोशिश की गई है। काम करने वाली जगहों पर बच्चों की देखभाल की सुविधा को लेकर नियमों को ज्यादा व्यापक और लचीला बनाया गया है। सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, 2020 के प्रावधानों के साथ श्रम और रोजगार मंत्रालय की ओर से जारी स्पष्टीकरणों में क्रेच सुविधा को लेकर कई अहम बातें साफ की गई हैं। इसके तहत 50 या उससे ज्यादा कर्मचारी वाले संस्थानों में छह साल से कम उम्र के कर्मचारियों के बच्चों के लिए क्रेच की सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी होगा।
ऑफिस से एक किलोमीटर के दायरे में होनी चाहिए क्रेच सुविधा
नियमों के मुताबिक क्रेच की सुविधा ऐसी जगह होनी चाहिए, जहां कर्मचारियों के लिए बच्चों को लाना और ले जाना आसान हो। इसके लिए क्रेच ऑफिस या प्रतिष्ठान से एक किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए। कंपनियों के लिए यह जरूरी नहीं है कि वे हर हाल में अपने ऑफिस के अंदर ही अलग क्रेच बनाएं। कानून उन्हें दूसरे संस्थानों के साथ मिलकर साझा क्रेच सुविधा चलाने की भी अनुमति देता है। यानी आसपास की कई कंपनियां मिलकर एक क्रेच चला सकती हैं और वहां काम करने वाले कर्मचारियों के बच्चों को सुविधा दी जा सकती है। यह व्यवस्था खास तौर पर उन कंपनियों के लिए उपयोगी हो सकती है, जहां अलग से क्रेच बनाने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है।
अब सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं रहेगी क्रेच सुविधा
क्रेच से जुड़े नियमों में एक अहम बदलाव यह है कि इसका लाभ सिर्फ महिला कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। श्रम और रोजगार मंत्रालय की ओर से 16 मार्च 2026 को जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि ओएसएचडब्ल्यूसी कोड के तहत क्रेच की सुविधा सभी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध होनी चाहिए। इसका मतलब है कि अगर किसी पुरुष कर्मचारी के छोटे बच्चे हैं, तो वह भी इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकता है। इसी तरह महिला और पुरुष दोनों कर्मचारी अपने बच्चों की देखभाल के लिए क्रेच सुविधा का लाभ ले सकेंगे। हालांकि सोशल सिक्योरिटी कोड के कुछ प्रावधानों में महिला, विधुर और सिंगल पेरेंट जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। इसी वजह से इंडस्ट्री की ओर से इन प्रावधानों को और ज्यादा स्पष्ट करते हुए जेंडर न्यूट्रल बनाने की मांग भी उठ रही है।
क्रेच नहीं है तो मिल सकता है नकद भत्ता
कुछ मामलों में अगर कंपनी के लिए खुद क्रेच की सुविधा उपलब्ध कराना संभव नहीं है, तो कर्मचारियों की सहमति से नकद क्रेच भत्ता देने का विकल्प भी बताया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह भत्ता कम से कम 500 रुपये प्रति बच्चा हर महीने हो सकता है।इस सुविधा के लिए अधिकतम दो बच्चों को पात्र माना जा सकता है। हालांकि इस तरह के भत्ते की वास्तविक व्यवस्था कंपनी और लागू नियमों के मुताबिक तय होगी।
दिन में चार बार क्रेच जाने की अनुमति
कामकाजी माताओं के लिए क्रेच सुविधा के साथ कुछ दूसरी सहूलियतें भी जुड़ी हैं। नियमों के तहत महिला कर्मचारियों को काम के दौरान दिन में चार बार क्रेच जाने की अनुमति दी जा सकती है। इससे वे ऑफिस का काम प्रभावित किए बिना अपने छोटे बच्चे की स्थिति देख सकेंगी। इसके अलावा बच्चे के 15 महीने की उम्र तक महिला कर्मचारियों को रोजाना दो नर्सिंग ब्रेक देने का प्रावधान है। क्रेच तक आने-जाने के लिए अतिरिक्त समय की सुविधा भी दी जा सकती है। यह अतिरिक्त समय 15 मिनट तक हो सकता है। इन प्रावधानों का मकसद यह है कि छोटे बच्चे की देखभाल की वजह से माता-पिता को नौकरी छोड़ने या काम और परिवार में से किसी एक को चुनने जैसी स्थिति का सामना कम करना पड़े।
सिर्फ कमरा बना देना काफी नहीं, सुरक्षा भी जरूरी
क्रेच की जिम्मेदारी सिर्फ एक कमरा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। वहां बच्चों की सुरक्षा, साफ-सफाई और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना होगा। क्रेच में सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था, कर्मचारियों और देखभाल करने वाले स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन, पर्याप्त हवा और रोशनी, साफ पानी और फर्स्ट एड जैसी सुविधाएं जरूरी मानी गई हैं। बच्चों के खेलने और बैठने के लिए सुरक्षित जगह भी होनी चाहिए। यानी क्रेच ऐसी जगह होनी चाहिए जहां माता-पिता अपने बच्चों को सुरक्षित छोड़कर बिना ज्यादा चिंता के अपना काम कर सकें।
छोटे बच्चों वाले कर्मचारियों के लिए बढ़ेगी सुविधा
नए प्रावधानों का सबसे बड़ा फायदा उन कर्मचारियों को मिल सकता है, जिनके बच्चे अभी छोटे हैं। नौकरी के दौरान बच्चे की देखभाल की चिंता कम होने से माता-पिता अपने काम पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे। साथ ही कंपनियों के लिए भी यह व्यवस्था कर्मचारियों को काम और परिवार के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद कर सकती है। आने वाले समय में क्रेच की सुविधा को लेकर नियमों की स्पष्टता और बढ़ने की उम्मीद है, खासकर महिला, पुरुष, विधुर और सिंगल पेरेंट सभी कर्मचारियों के अधिकारों को एक समान तरीके से लागू करने को लेकर।
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