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Home » नगाड़ों की गूंज के बीच CM हेमंत का संदेश- युवा भरोसा रखें, न्याय होगा
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नगाड़ों की गूंज के बीच CM हेमंत का संदेश- युवा भरोसा रखें, न्याय होगा

August 9, 2026No Comments9 Mins Read
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Ranchi : रांची के मोरहाबादी मैदान में रविवार को कुछ अलग ही नजारा था। चारों तरफ रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा, कहीं नगाड़े की थाप, कहीं लोकगीतों की आवाज और कहीं झारखंड की मिट्टी से जुड़ी कला और हस्तशिल्प की खुशबू। मैदान में पहुंचते ही ऐसा लग रहा था, जैसे झारखंड की अलग-अलग जनजातीय परंपराएं एक ही जगह जुट गई हों।

मौका था झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 के आगाज का। विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर आयोजित इस दो दिवसीय महोत्सव का उद्घाटन राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया। मंच से लेकर मैदान तक आदिवासी संस्कृति की झलक साफ दिखाई दी। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन और नगाड़ा फॉर्मेशन की प्रस्तुति ने माहौल में अलग ऊर्जा भर दी। इसके बाद हुए लोकनृत्यों ने लोगों को अपनी ओर खींच लिया।

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प्रदर्शनी शिविर, चित्रकला शिविर, वृत्तचित्र फिल्म महोत्सव और इमर्सिव जोन का भी उद्घाटन हुआ। अलग-अलग स्टॉलों पर आदिवासी कला, शिल्प, खान-पान, पहनावा और जीवनशैली को करीब से देखने का मौका लोगों को मिला।

कहीं कला दिखी, कहीं खान-पान और कहीं पूरी जिंदगी की कहानी

महोत्सव में सिर्फ नाच-गाना ही नहीं था। यहां आदिवासी समाज की जिंदगी के कई रंग एक साथ दिखाई दिए। किसी स्टॉल पर पारंपरिक हस्तशिल्प नजर आया तो कहीं कारीगर अपने हाथों से बनाई चीजों की कहानी बताते दिखे। पारंपरिक खान-पान के स्टॉल भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई अलग-अलग स्टॉल पर रुककर झारखंड की परंपराओं को करीब से देखने की कोशिश करता नजर आया।

मंच पर कलाकारों की प्रस्तुतियां चल रही थीं तो दूसरी तरफ लोग प्रदर्शनी में आदिवासी जीवन के अलग-अलग पहलुओं को समझ रहे थे। यही इस महोत्सव की खासियत भी रही कि यहां संस्कृति सिर्फ मंच पर नहीं थी, बल्कि पूरे मैदान में बिखरी हुई थी।

CM ने जोहार से किया अभिवादन, बोले- आदिवासी समाज की अपनी अलग पहचान

सीएम हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन की शुरुआत जोहार से की। उन्होंने विश्व आदिवासी दिवस पर राज्यवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की धरती पर अपनी अलग पहचान है और इस पहचान को बनाए रखना जरूरी है। इसी सोच के साथ आदिवासी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आयोजन में सिर्फ झारखंड के लोग ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों से आदिवासी समाज के लोग पहुंचे हैं। कलाकार, कारीगर और अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोग अपनी कला और परंपराओं को लेकर यहां आए हैं। उनके मुताबिक, मोरहाबादी मैदान में दिख रही तस्वीर सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम की नहीं है। यह बताती है कि आदिवासी समाज अपनी पुरानी परंपराओं को संभालते हुए आगे बढ़ना चाहता है।

राज्यपाल की मौजूदगी को बताया आदिवासी समाज के लिए खास

मुख्यमंत्री ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार की मौजूदगी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल की मौजूदगी ने समारोह की गरिमा बढ़ाई है। उन्होंने ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल यानी TAC की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि राज्यपाल के मार्गदर्शन में यह परिषद आदिवासी समाज के हित और विकास से जुड़े विषयों पर काम करती है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, आदिवासी समाज के विकास के साथ पूरे राज्य के भविष्य की दिशा तय करने में भी TAC की महत्वपूर्ण भूमिका है।

महोत्सव के मंच से छात्र आंदोलन पर भी बोले हेमंत

मंच पर मुख्यमंत्री ने जब युवाओं और छात्रों की बात शुरू की तो माहौल थोड़ा गंभीर हो गया। उन्होंने कहा कि एक तरफ राज्य विश्व आदिवासी दिवस मना रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ युवा और छात्र अपनी मांगों और अधिकारों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उनकी बातें सुन रही है और उनकी समस्याओं को गंभीरता से समझने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान बातचीत से निकाला जा सकता है। युवाओं को अपनी बात सरकार के सामने साफ और निर्भीक तरीके से रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ आंदोलन कर रहे युवाओं की ही चिंता नहीं कर रही है। ऐसे युवा भी हैं जो घर पर बैठे अपनी पढ़ाई, नौकरी और भविष्य को लेकर परेशान हैं। सरकार उन तक भी पहुंचने की कोशिश करेगी।

‘गड़बड़ी सामने आई है तो जांच होगी, दोषियों को सजा मिलेगी’

छात्रों से जुड़े मामले पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने साफ शब्दों में कहा कि उनके संज्ञान में गड़बड़ी की बात आई है। इसकी जांच होगी और अगर किसी ने गड़बड़ी की है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने युवाओं को भरोसा दिलाते हुए कहा कि उनके साथ न्याय होगा। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे भरोसा रखें, क्योंकि सरकार भी इसी मिट्टी से निकली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के साथ गलत नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को किसी राजनीतिक छत्रछाया की जरूरत नहीं है। कुछ लोग अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए युवाओं को इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं। ऐसे लोगों से युवाओं को सावधान रहने की जरूरत है।

‘न्याय सिर्फ होगा नहीं, होता हुआ दिखाई भी देगा’

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि वे खुद को युवाओं से अलग नहीं मानते। युवाओं की चिंता उनकी अपनी चिंता है। उन्होंने कहा कि सरकार संवैधानिक जिम्मेदारी के साथ काम कर रही है और युवाओं को भरोसा दिलाती है कि उनके साथ पारदर्शिता से न्याय होगा। उन्होंने एक बात खास तौर पर कही कि न्याय केवल होना नहीं चाहिए, बल्कि लोगों को होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।

‘झारखंड सिर्फ राज्य नहीं, वीरों की धरती है’

महोत्सव के मंच से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के इतिहास और यहां के संघर्ष की परंपरा को भी याद किया। उन्होंने कहा कि झारखंड सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि वीरों की भूमि है। जब देश के कई हिस्सों में आजादी का सपना अभी दूर था, तब झारखंड के वीर पूर्वज अपने अधिकार, अस्मिता और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने कहा कि झारखंड की यही संघर्ष की परंपरा आज भी जारी है। अलग राज्य बने झारखंड को 25 साल हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन वर्षों में राज्य ने अपनी पहचान बनाने और अपने पैरों पर खड़े होने की दिशा में लगातार प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि कभी झारखंड को केवल यहां के खनिज और प्राकृतिक संसाधनों के लिए देखा जाता था, लेकिन अब राज्य अपनी क्षमता के साथ आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है।

युवाओं से कहा- सही और गलत के बीच फर्क समझें

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की प्रगति को रोकने के लिए लोगों को अलग-अलग तरीकों से भ्रमित करने की कोशिश होती रहती है। कभी कोई चेहरा सामने आता है, कभी कोई दूसरा चेहरा और कभी पर्दे के पीछे से बातें पहुंचाई जाती हैं। उन्होंने युवाओं से ऐसे प्रयासों को समझने और सावधान रहने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के भीतर रहने वाले लोगों की समस्याओं का समाधान बातचीत और लोकतांत्रिक तरीके से ही किया जा सकता है। लाठी-डंडे से अपने ही लोगों की समस्या का समाधान नहीं हो सकता।

संविधान का जिक्र, बोले- अमीर हो या गरीब सब बराबर

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने भाषण में संविधान और सामाजिक असमानता की बात भी उठाई। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने देश को ऐसा संविधान दिया, जिसमें हर व्यक्ति को समान अधिकार मिला है। व्यक्ति अमीर हो या गरीब, संविधान सभी को बराबरी का अधिकार देता है। लेकिन उन्होंने कहा कि आजादी के 75 साल से ज्यादा समय बाद भी समाज से असमानता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। आर्थिक और सामाजिक अंतर बढ़ने पर तनाव भी बढ़ता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देश आजादी की शताब्दी की ओर बढ़ेगा। ऐसे में सभी वर्गों को बराबरी का अवसर देना और असमानता कम करना जरूरी है।

‘आदिवासी होना गर्व की बात’

आदिवासी महोत्सव को लेकर सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि यह सिर्फ दो दिन का कार्यक्रम नहीं है। यह अपनी जड़ों को याद करने का मौका है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसके जल, जंगल और जमीन से जुड़ी हुई है। ये सिर्फ संसाधन नहीं हैं, बल्कि आदिवासी जीवन और संस्कृति का हिस्सा हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे ऐसे पूर्वजों के वंशज हैं, जिन्होंने अपने अधिकारों और जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे आदिवासी हैं।

मोरहाबादी में दिखा झारखंड का असली रंग

महोत्सव में पूरे दिन लोगों की आवाजाही बनी रही। एक तरफ कलाकार अपने पारंपरिक नृत्य से लोगों का मन मोह रहे थे, तो दूसरी तरफ कारीगर अपने हुनर की कहानी सुना रहे थे। कहीं ढोल और नगाड़े की आवाज सुनाई दे रही थी तो कहीं पारंपरिक गीतों की धुन। बच्चों और युवाओं में भी खास उत्साह दिखा। कई लोग अपने मोबाइल में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और प्रदर्शनी की तस्वीरें लेते नजर आए। मोरहाबादी मैदान में सजे स्टॉलों ने झारखंड की विविधता को एक ही जगह समेट दिया। अलग-अलग समुदायों की बोली, पहनावा, खान-पान और कला के रंग एक साथ दिखाई दिए।

महोत्सव के बहाने नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की कोशिश

इस आयोजन की सबसे खास बात यही रही कि यहां संस्कृति को सिर्फ मंच की प्रस्तुति तक सीमित नहीं रखा गया। कोशिश यह दिखाने की रही कि आदिवासी समाज की संस्कृति उसकी रोजमर्रा की जिंदगी में भी मौजूद है। हस्तशिल्प से लेकर पारंपरिक खान-पान तक और लोकनृत्य से लेकर जीवनशैली तक, हर चीज के पीछे एक कहानी है। महोत्सव उसी कहानी को नई पीढ़ी और बाहर से आने वाले लोगों तक पहुंचाने का माध्यम बना।

मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि यह महोत्सव यादगार और प्रेरणादायक बनेगा और आदिवासी समाज अपनी पहचान, गौरव और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेगा।

राज्यपाल से लेकर अधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद

उद्घाटन समारोह में मंत्री राधा कृष्ण किशोर, राज्यसभा सांसद महुआ माजी, विधायक कल्पना सोरेन, विधायक अमित महतो, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल, अपर मुख्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा राज्य के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग मोरहाबादी मैदान पहुंचे।

मंच पर नेताओं के भाषण और मैदान में कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच एक बात लगातार महसूस होती रही कि झारखंड की आदिवासी संस्कृति सिर्फ इतिहास का हिस्सा नहीं है। वह आज भी यहां के लोगों की जिंदगी में सांस ले रही है। मोरहाबादी मैदान में इसी जीवंत संस्कृति की तस्वीर पूरे दिन दिखाई देती रही।

इसे भी पढ़ें : “जहां प्रकृति पूजनीय, वही हमारा…”, आदिवासी दिवस पर क्या संदेश दे गये सीएम हेमंत… जानें

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