अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ranchi : जिंदगी कई बार एक पल में सब कुछ छीन लेती है, लेकिन इंसानियत और सही समय पर मिली मदद अंधेरे में भी उम्मीद की एक किरण जगा देती है। उरीमारी की रहने वाली सुनीता देवी के लिए 24 सितंबर 2025 का दिन किसी बुरे सपने की तरह आया था। CCL के बरका-सयाल क्षेत्र की उरीमारी ओपन कास्ट परियोजना में रोज की तरह काम पर गए उनके पति महेश साव एक दर्दनाक हादसे का शिकार हो गए और कभी लौटकर घर नहीं आए। घर का इकलौता कमाने वाला चला गया, तो पीछे छूट गए आंसुओं से भीगे चेहरे और बच्चों के भविष्य को लेकर अनगिनत सवाल।
आंसुओं के बीच मिली राहत, प्रबंधन ने समझा परिवार का दर्द
पति के जाने के बाद सुनीता देवी के सामने सबसे बड़ी चिंता यह थी कि अब चूल्हा कैसे जलेगा और बच्चों की परवरिश कैसे होगी। इस गहरे दुख और अनिश्चितता के बीच सीसीएल प्रबंधन और भारतीय स्टेट बैंक ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मदद का हाथ आगे बढ़ाया। कोल इंडिया के कॉर्पोरेट सैलरी पैकेज के तहत स्वर्गीय महेश साव के क्लेम की प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया गया। गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को रांची में आयोजित एक सादे और भावुक कार्यक्रम में सुनीता देवी के हाथों में 1 करोड़ रुपये की सहायता राशि का चेक सौंपा गया।
जब नम आंखों से छलक पड़ा आभार, अधिकारियों ने बंधाया ढांढस
चेक लेते वक्त सुनीता देवी की आंखें भर आईं। उन्होंने रुंधे गले से सीसीएल और बैंक अधिकारियों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि उनके पति की कमी तो दुनिया की कोई दौलत पूरी नहीं कर सकती, लेकिन इस मदद ने उनके उजड़े हुए आशियाने को बिखरने से बचा लिया है। अब वे अपने बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य को लेकर बेफिक्र हो सकेंगी। कार्यक्रम में मौजूद एसबीआई के रीजनल मैनेजर कुमार नीलोत्पल, चीफ मैनेजर विकास कुमार पांडेय, सीसीएल की चीफ मैनेजर रूबी रंजन, पुष्पक लाला और स्टाफ ऑफिसर अजय कुमार समेत तमाम अधिकारियों ने सुनीता देवी को ढांढस बंधाया और कहा कि कंपनी हमेशा अपने कर्मियों के परिवारों के साथ एक ढाल बनकर खड़ी रहेगी।
कठिन वक्त में सामाजिक सुरक्षा बनी पीड़ित परिवार की ढाल
CCL प्रबंधन ने इस मौके पर कहा कि कोयला खदानों में काम करने वाले हर मजदूर का पसीना देश को रोशन करता है, इसलिए उनके और उनके परिवार के प्रति कंपनी की जिम्मेदारी सबसे ऊपर है। कॉर्पोरेट सैलरी पैकेज जैसी योजनाएं इसी मकसद से बनाई गई हैं ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में पीछे छूटे परिवार को दर-दर न भटकना पड़े। महेश साव के परिवार को मिली यह एक करोड़ की आर्थिक सहायता सिर्फ एक कागजी चेक नहीं, बल्कि उस भरोसे का सबूत है जो एक संस्थान अपने कामगार के प्रति निभाता है।
इसे भी पढ़ें : स्मार्ट वर्किंग, तेज फैसले… CCL में HR का ‘डिजिटल अवतार’











