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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : श्रीराम फैक्ट्री में रविवार को हुए हादसे में गंभीर रूप से जख्मी मजदूर रमेश ठाकुर आखिरकार जिंदगी की जंग हार गए। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। जिस रमेश के घरवालों को उनके ठीक होकर लौटने का इंतजार था, वहां अब मातम पसरा है। मौत की खबर मिलते ही परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लोग फैक्ट्री के बाहर धरने पर बैठ गए। घंटों चले विरोध और बातचीत के बाद प्रबंधन ने मृतक के परिवार को 22 लाख रुपए मुआवजा देने का आश्वासन दिया, तब जाकर आंदोलन थमा। लेकिन एक बड़ा सवाल पीछे छूट गया, क्या एक मजदूर की जान की कीमत सिर्फ 22 लाख रुपए है?
हादसे में झुलसे थे कई मजदूर, रमेश की हालत थी गंभीर
कुजू कोलियरी निवासी दरोगा ठाकुर के बेटे रमेश ठाकुर बीते रविवार को भी रोज की तरह श्रीराम फैक्ट्री में काम कर रहे थे। इसी दौरान हुए हादसे में वह गंभीर रूप से जख्मी हो गए। घटना में अन्य मजदूरों के भी झुलसने की बात सामने आई थी। रमेश की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। परिवार को उम्मीद थी कि इलाज के बाद वह ठीक होकर घर लौट आएंगे, लेकिन हालत बिगड़ती गई और आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया।
रमेश की मौत की सूचना मिलते ही उनके परिजन और ग्रामीण फैक्ट्री के बाहर जमा हो गए। लोगों का कहना था कि मजदूर अपने परिवार का पेट पालने के लिए काम करने जाता है। उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है जितनी उससे काम लेने की।
गुस्से में ग्रामीण, बोले- मुआवजे के साथ हादसे की वजह भी बताओ
रमेश की मौत के बाद ग्रामीणों ने धरना शुरू कर दिया। उनकी मांग थी कि मृतक के परिवार को उचित मुआवजा मिले, परिवार के भविष्य के लिए ठोस व्यवस्था हो और हादसे की निष्पक्ष जांच कराई जाए। ग्रामीणों का कहना था कि सिर्फ आर्थिक सहायता देकर मामले को खत्म नहीं किया जा सकता। लोगों ने फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि अगर काम के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे तो इतना गंभीर हादसा कैसे हुआ? मजदूरों के लिए सुरक्षा उपकरण और जरूरी सावधानियां किस स्तर पर लागू थीं? हादसे की असली वजह क्या थी? इन सवालों का जवाब सामने आना चाहिए। धरने की सूचना मिलने के बाद क्षेत्र के जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों और ग्रामीणों से बातचीत की और फिर फैक्ट्री प्रबंधन के साथ वार्ता शुरू कराई। बातचीत के दौरान मुआवजे के साथ मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया गया।
22 लाख के आश्वासन पर थमा आंदोलन, सुरक्षा पर सवाल बरकरार
बातचीत के बाद फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से रमेश ठाकुर के परिजनों को 22 लाख रुपए मुआवजा देने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने आंदोलन स्थगित कर दिया। फिलहाल धरना खत्म हो गया है, लेकिन हादसे को लेकर उठे सवाल अभी बाकी हैं। रमेश के परिवार के लिए 22 लाख रुपए कुछ आर्थिक सहारा जरूर बन सकते हैं, लेकिन उस व्यक्ति की कमी पूरी नहीं कर सकते जो परिवार के लिए कमाने जाता था। हादसे ने एक परिवार का सहारा छीन लिया है।
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