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Ranchi : 15 अगस्त की सुबह रांची के गांधीनगर स्थित महात्मा गांधी क्रीड़ांगन का नजारा बिल्कुल अलग और खास था। चारों तरफ तिरंगे की छटा, देशभक्ति के तराने और लोगों के चेहरों पर झलकता गर्व। मौका था 80वें स्वतंत्रता दिवस के जश्न का, जिसे CCL यानी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड ने पूरे जोशो-खरोश के साथ मनाया। समारोह की शुरुआत CCL के सीएमडी निलेंदु कुमार सिंह द्वारा तिरंगा फहराने और राष्ट्रगान की गूंज के साथ हुई। सीएमडी ने CISF के जवानों, सुरक्षाकर्मियों और स्कूली बच्चों की सधी हुई परेड का निरीक्षण कर उनकी सलामी ली, जबकि आसमान में छोड़े गए तिरंगे गुब्बारों ने माहौल में आजादी की नई उमंग भर दी। इस मौके पर कंपनी के आला अधिकारी, यूनियन प्रतिनिधि और भारी संख्या में कर्मचारी अपने परिवारों के साथ इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने।
कोयला उत्पादन में 20 फीसदी की छलांग
मंच से देश के वीर शहीदों को नमन करते हुए सीएमडी निलेंदु कुमार सिंह ने न सिर्फ आजादी के महत्व को याद किया, बल्कि कंपनी की शानदार तरक्की की तस्वीर भी सामने रखी। उन्होंने बताया कि CCL ने चालू वित्तीय वर्ष में कोयला उत्पादन में पिछले साल के मुकाबले लगभग 20 प्रतिशत की जबर्दस्त छलांग लगाई है। देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के क्रम में मगध परियोजना की क्षमता को 20 से बढ़ाकर 24 एमटीवाई कर दिया गया है। इसके साथ ही नई खदानों, फॉरेस्ट लैंड डायवर्जन और रेल साइडिंग के विस्तार पर भी काम पूरी रफ्तार से चल रहा है, जिससे झारखंड के औद्योगिक विकास को एक नई गति मिल रही है।
पर्यावरण संरक्षण और सौर ऊर्जा की ओर कदम
कोयला खनन के साथ-साथ प्रकृति और पर्यावरण के संतुलन को साधना सीसीएल की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर नजर आया। सीएमडी ने साझा किया कि कंपनी अब हरित ऊर्जा की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है, जहां सौर ऊर्जा क्षमता 32.3 मेगावाट के स्तर को छू चुकी है। बरका-सयाल के ओबी डंप पर 5 मेगावाट का सोलर प्लांट तैयार हो रहा है और गिरिडीह में 100 मेगावाट क्षमता वाली स्टोरेज युक्त सौर परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। पर्यावरण को हरा-भरा रखने के संकल्प के तहत कंपनी ने तय लक्ष्य 279 हेक्टेयर को पीछे छोड़ते हुए 322 हेक्टेयर इलाके में सघन पौधरोपण किया है।
गांवों तक पानी और महिला सशक्तिकरण की मिसाल
CCL का यह जश्न सिर्फ उत्पादन के आंकड़ों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें आम जनजीवन और समाज से जुड़ाव की गहरी झलक भी दिखी। खदानों से निकलने वाले अतिरिक्त पानी को रिफाइन कर आज आसपास के 140 गांवों के लगभग ढाई लाख लोगों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों की पेयजल समस्या दूर हो रही है। वहीं पिपरवार के बचरा में स्थापित ‘कोल नीर’ बॉटलिंग प्लांट के संचालन की कमान स्थानीय महिलाओं को सौंपी जा रही है, जो महिला सशक्तिकरण और स्थानीय आजीविका की एक बेहतरीन मिसाल बनकर उभरा है।
सांस्कृतिक रंग और प्रतिभाओं का सम्मान
समारोह के रंग उस वक्त और चटख हो गए जब डीएवी गांधीनगर, केंद्रीय विद्यालय और ज्ञानोदय स्कूल के बच्चों ने देशभक्ति गीतों पर दिल छू लेने वाली प्रस्तुतियां दीं। बच्चों के उत्साह और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उत्कृष्ट सेवा देने वाले सीआईएसएफ जवानों, सुरक्षाकर्मियों, एनसीसी कैडेट्स और दसवीं-बारहवीं बोर्ड में अव्वल रहे मेधावी विद्यार्थियों को मंच पर सम्मानित किया गया। इससे पहले दरभंगा हाउस मुख्यालय और गांधीनगर अस्पताल में निदेशक (मानव संसाधन) हर्ष नाथ मिश्र ने ध्वजारोहण कर उत्सव का आगाज किया था। पूरे कार्यक्रम का यूट्यूब पर सीधा प्रसारण भी हुआ, जिससे दूर-दराज की कोयला खदानों में तैनात कर्मचारी भी इस गौरवशाली पल का हिस्सा बने रहे।
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