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Patna : बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में विद्यार्थियों को मिलने वाले शिक्षा ऋण में कटौती की खबर सामने आने के बाद सरकार ने स्थिति साफ की है। उच्च शिक्षा विभाग का कहना है कि विद्यार्थियों को मिलने वाली आर्थिक मदद कम नहीं की गई है। व्यवस्था में बदलाव जरूर किया गया है, लेकिन इसका मकसद विद्यार्थियों को पहले से ज्यादा विकल्प देना है। अब 2 लाख रुपए तक की राशि बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम से मिलेगी, जबकि 2 लाख से 4 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार के मुताबिक, इसे शिक्षा ऋण घटाने के तौर पर देखना सही नहीं है। पहले बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम के माध्यम से 4 लाख रुपए तक की राशि उपलब्ध कराई जाती थी। अब ऋण की व्यवस्था को अलग-अलग संस्थानों से जोड़ा गया है, ताकि विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता हासिल करने में परेशानी नहीं हो।
2 लाख के बाद बैंक से मिलेगा ऋण, कुल मदद 4 लाख तक
उच्च शिक्षा विभाग के सचिव के अनुसार, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत पहले 2 लाख रुपए तक का शिक्षा ऋण बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम से मिलेगा। इसके बाद 2 लाख से 4 लाख रुपए तक की जरूरत होने पर अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। यानी किसी विद्यार्थी को उच्च शिक्षा के लिए 4 लाख रुपए तक की जरूरत है तो उसके लिए पूरा रास्ता बंद नहीं हुआ है। राशि उपलब्ध कराने का तरीका बदला है। पहले 4 लाख रुपए तक की राशि एक ही माध्यम से मिलती थी, जबकि अब दो संस्थागत माध्यमों को इसमें जोड़ा गया है।
सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आसानी से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। खासकर ऐसे विद्यार्थियों को इससे फायदा मिलने की उम्मीद है, जिनके सामने फीस, हॉस्टल, किताब और दूसरी पढ़ाई से जुड़ी जरूरतों के लिए पैसे की समस्या रहती है।
पीएम विद्यालक्ष्मी से 10 लाख तक शिक्षा ऋण का विकल्प
बिहार सरकार ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन योजना, पीएम विद्यालक्ष्मी पोर्टल और बैंकों से भी जोड़ा है। इसका मतलब है कि विद्यार्थियों के पास अब शिक्षा ऋण लेने के लिए एक से ज्यादा विकल्प मौजूद हैं। पीएम विद्यालक्ष्मी योजना के माध्यम से विद्यार्थी 10 लाख रुपए तक का शिक्षा ऋण भी हासिल कर सकते हैं। इससे खासकर उन विद्यार्थियों को मदद मिल सकती है, जिन्हें उच्च शिक्षा के लिए 4 लाख रुपए से अधिक राशि की जरूरत है। सरकार का कहना है कि पूरी व्यवस्था को एक साथ देखने पर तस्वीर साफ हो जाती है। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत सहायता का रास्ता बंद या छोटा नहीं किया गया है, बल्कि अलग-अलग वित्तीय संस्थानों को जोड़कर विकल्प बढ़ाए गए हैं।
पिछले साल से इस बार 64 करोड़ ज्यादा खर्च की मंजूरी
सरकार ने योजना के बजट का आंकड़ा भी सामने रखा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 886 करोड़ रुपए के व्यय की स्वीकृति दी गई थी। वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के लिए 950 करोड़ रुपए के व्यय की स्वीकृति मिली है। यानी पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले इस साल योजना के लिए 64 करोड़ रुपए ज्यादा खर्च करने की मंजूरी दी गई है। ऐसे में सरकार का कहना है कि योजना के लिए बजट घटने की बात भी सही नहीं है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल के मुकाबले इस साल योजना के लिए अधिक राशि रखी गई है।
सरकार का पूरा जोर इस बात पर है कि आर्थिक तंगी की वजह से किसी विद्यार्थी की उच्च शिक्षा न रुके। इसके लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को बैंकों और पीएम विद्यालक्ष्मी जैसी व्यवस्थाओं से जोड़कर वित्तीय सहायता का दायरा बढ़ाने की कोशिश की गई है। विभाग का कहना है कि विद्यार्थियों को उपलब्ध विकल्पों की जानकारी मिलने के बाद वे अपनी जरूरत के मुताबिक शिक्षा ऋण हासिल कर सकेंगे।
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