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Patna : बिहार में भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर सरकार अब पूरी व्यवस्था की समीक्षा कराने जा रही है। परीक्षा बोर्ड, आयोग, विश्वविद्यालय और भर्ती एजेंसियों की ओर से होने वाली परीक्षाओं में सुधार के लिए बनने वाली विशेषज्ञ समिति की कमान पटना हाईकोर्ट के जस्टिस हरीश कुमार को सौंपी गई है। सामान्य प्रशासन विभाग ने मंगलवार, 1 सितंबर को इसकी अधिसूचना जारी कर दी। समिति यह देखेगी कि परीक्षा व्यवस्था में कहां सुधार की जरूरत है और परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए सरकार को क्या सुझाव दिए जाएं।
23 अगस्त को हुआ था समिति बनाने का फैसला
दरअसल, बिहार सरकार ने 23 अगस्त को जारी अधिसूचना में परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने का प्रावधान किया था। सरकार के अधीन आने वाले अलग-अलग परीक्षा बोर्ड, आयोग, विश्वविद्यालय और दूसरी भर्ती एजेंसियों की ओर से आयोजित होने वाली परीक्षाओं को इसके दायरे में रखा गया है। अब इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने समिति के अध्यक्ष का नाम भी तय कर दिया है।
इस फैसले के पीछे मकसद राज्य में परीक्षाओं की मौजूदा व्यवस्था को नए सिरे से देखना है। सरकार चाहती है कि अलग-अलग संस्थाओं की ओर से होने वाली परीक्षाओं में एक बेहतर और भरोसेमंद व्यवस्था तैयार हो। समिति की सिफारिशों के आधार पर आगे जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं।

24 अगस्त को हाईकोर्ट से मांगा गया था नाम
सामान्य प्रशासन विभाग ने 24 अगस्त को पटना हाईकोर्ट के महानिबंधक को पत्र भेजा था। इसमें परीक्षा सुधार विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष के लिए एक नाम प्रस्तावित करने का अनुरोध किया गया था। इसके जवाब में हाईकोर्ट के महानिबंधक ने 28 अगस्त को जस्टिस हरीश कुमार के नाम की अनुशंसा सरकार को भेजी।
सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए अब जस्टिस हरीश कुमार को समिति का अध्यक्ष अधिसूचित कर दिया है। मंगलवार को जारी अधिसूचना में सामान्य प्रशासन विभाग ने साफ किया है कि राज्य सरकार ने उन्हें परीक्षा सुधार से जुड़ी विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष के रूप में मनोनीत किया है।
भर्ती से लेकर यूनिवर्सिटी की परीक्षाओं तक नजर
समिति का काम किसी एक परीक्षा या किसी एक भर्ती एजेंसी तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार के आदेश में राज्य के विभिन्न परीक्षा बोर्ड, आयोग, विश्वविद्यालय और अन्य भर्ती एजेंसियों की ओर से ली जाने वाली परीक्षाओं में व्यापक सुधार के लिए अनुशंसा करने की बात कही गई है।
यानी समिति परीक्षा व्यवस्था के अलग-अलग पहलुओं पर गौर कर सकती है। परीक्षा किस तरह आयोजित हो, उसकी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी हो, अभ्यर्थियों के लिए व्यवस्था कैसी हो और परीक्षा कराने वाली एजेंसियां अपनी जिम्मेदारी किस तरह निभाएं, इन सभी पहलुओं पर सुझाव सामने आने की उम्मीद है।
बिहार में पिछले कुछ समय में कई परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों की शिकायतें और विवाद सामने आए हैं। कहीं परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठे तो कहीं प्रश्नपत्र और परीक्षा संचालन को लेकर अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई। भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी की शिकायतों के कारण छात्रों और अभ्यर्थियों के बीच भी नाराजगी देखने को मिली है। ऐसे समय में परीक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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