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Patna/New Delhi : बिहार को बिजली के मामले में मजबूत बनाने के लिए अगले पांच साल में 1,38,541 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने उद्योग जगत से बिहार में निवेश का आह्वान करते हुए कहा कि राज्य ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। सरकार निवेशकों को हर जरूरी सहयोग देगी। उनका कहना था कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब बिहार भी मजबूत और समृद्ध बने। नई दिल्ली में आयोजित भारत इलेक्ट्रिसिटी-2026 के बिहार फोकस स्टेट सेशन में ऊर्जा मंत्री ने कहा कि बिहार में बिजली के क्षेत्र में काम करने की काफी संभावनाएं हैं। राज्य में सौर ऊर्जा से लेकर बैटरी स्टोरेज, थर्मल पावर, पंप्ड स्टोरेज और न्यूक्लियर ऊर्जा तक कई क्षेत्रों में निवेश के रास्ते खुले हैं। उन्होंने उद्योगपतियों से कहा कि बिहार आएं, निवेश करें, नई परियोजनाएं लगाएं और राज्य के साथ मिलकर आगे बढ़ें।
छठ में सूर्य की पूजा, अब इसी सूर्य से बिजली बनाने पर जोर
ऊर्जा मंत्री ने बिहार की पहचान से जुड़ी छठ पूजा का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में सूर्य की पूजा की पुरानी परंपरा है। अब इसी सूर्य की रोशनी का इस्तेमाल बिजली बनाने में ज्यादा से ज्यादा किया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि दिन में सौर ऊर्जा का अधिकतम इस्तेमाल हो और उस बिजली को स्टोर किया जाए, ताकि शाम के समय जब बिजली की मांग बढ़े तो स्टोरेज से आपूर्ति की जा सके। उन्होंने कहा कि बिहार में केवल बिजली पैदा करने के लिए ही निवेश की जरूरत नहीं है। सोलर उपकरणों के निर्माण, रूफटॉप सोलर, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और ऊर्जा से जुड़ी दूसरी परियोजनाओं में भी निवेश के बड़े अवसर हैं। सरकार इन क्षेत्रों में आने वाले निवेशकों को हरसंभव मदद देने के लिए तैयार है। बिहार में बिजली की मांग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। वित्तीय वर्ष 2022 में राज्य की अधिकतम बिजली मांग 6,627 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर 9,475 मेगावाट हो गई है। अनुमान है कि 2030 तक यह मांग करीब 11,747 मेगावाट तक पहुंच सकती है। ऐसे में सरकार उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ बिजली को गांवों और शहरों तक पहुंचाने वाले नेटवर्क को भी मजबूत करने की तैयारी में है।
पीरपैंती और नबीनगर जैसी परियोजनाओं पर जोर
अगले पांच साल में होने वाले 1.38 लाख करोड़ रुपए के निवेश में सबसे ज्यादा राशि बिजली उत्पादन पर खर्च होगी। उत्पादन के लिए 82,679 करोड़ रुपए, ट्रांसमिशन के लिए 24,683 करोड़, वितरण व्यवस्था के लिए 28,809 करोड़ और रखरखाव के लिए 2,370 करोड़ रुपए का प्रावधान बताया गया है। बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए 2,400 मेगावाट की पीरपैंती थर्मल पावर परियोजना और 1,440 मेगावाट नबीनगर टीपीपी स्टेज-2 जैसी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। कजरा में सोलर परियोजना को बैटरी स्टोरेज के साथ विकसित करने की योजना है। इसके अलावा सोलर पार्क, रूफटॉप सोलर और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य में बिजली की नई जरूरतों को देखते हुए इंट्रा-स्टेट ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर विकसित करने की भी तैयारी है। इससे अलग-अलग इलाकों में बनने वाली बिजली को जरूरत वाले क्षेत्रों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
बिजली कंपनियों की हालत सुधरी, घाटे से पहुंचीं लाभ में
ऊर्जा सचिव सह अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, BSPHCL अजय यादव ने बिजली क्षेत्र में हुए बदलावों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य की बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति में काफी सुधार हुआ है। वित्तीय वर्ष 2022 में जहां 2,218 करोड़ रुपए का घाटा था, वहीं वित्तीय वर्ष 2026 में करीब 2,375 करोड़ रुपए का अस्थायी लाभ दर्ज किया गया। बिजली वितरण में होने वाला AT&C लॉस भी 29.27 प्रतिशत से घटकर 11.54 प्रतिशत रह गया है। वहीं ACS-ARR गैप भी 0.43 रुपए प्रति यूनिट के अधिशेष में पहुंच गया है। राज्य में अब तक 94 लाख से ज्यादा स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। इससे बिजली खपत की निगरानी और बिलिंग व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिली है।
2030 तक 24 GW नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य
बिहार ने 2030 तक करीब 24 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ 6 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता तैयार करने की योजना है। कृषि फीडरों का सोलराइजेशन, घरों की छतों पर सोलर पैनल और सोलर के साथ बैटरी स्टोरेज जैसी योजनाओं पर काम किया जा रहा है। करीब 2,400 मेगावाट पंप्ड स्टोरेज क्षमता की परियोजनाओं के लिए एमओयू भी हो चुके हैं। सरकार दूसरी संभावित परियोजनाओं की भी जांच कर रही है।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि बिहार में बड़ा बाजार, युवा कार्यबल और सड़क, रेल व हवाई कनेक्टिविटी में लगातार सुधार निवेशकों के लिए बेहतर माहौल बना रहा है। राज्य सरकार ने निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज-2025 भी तैयार किया है। इसके तहत विनिर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि निवेश प्रक्रिया आसान हो और उद्योगों को जमीन, वित्तीय सहायता, आधारभूत सुविधाएं और जरूरी मंजूरियां समय पर मिल सकें।
ऊर्जा मंत्री ने उद्योग जगत को संदेश देते हुए कहा कि बिहार में ऊर्जा क्षेत्र में काम करने का समय है। निवेशक बिहार आएं, यहां परियोजनाएं लगाएं और राज्य के विकास के साथ खुद भी आगे बढ़ें। सरकार का मानना है कि बिजली के क्षेत्र में होने वाला यह बड़ा निवेश आने वाले वर्षों में राज्य की बढ़ती बिजली जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा।
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