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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : बीमारी में डॉक्टर की जगह ओझा के पास जाना एक हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह तबाह कर गया। भदानीनगर ओपी क्षेत्र के पारगढ़ा गांव में अंधविश्वास के चलते दो मासूम भाइयों की जान चली गई, जबकि उनकी मां अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। जिन बच्चों को समय पर अस्पताल ले जाकर बचाया जा सकता था, उन्हें घरवाले तीन दिन तक तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक के सहारे ठीक करने की कोशिश करते रहे। नतीजा यह हुआ कि बीमारी पूरे शरीर में फैल गई और सदर अस्पताल पहुंचने से पहले ही दोनों भाइयों ने रास्ते में दम तोड़ दिया।
तीन दिन तक चलता रहा झाड़-फूंक का खेल, जब बिगड़ी तबीयत तो दौड़े अस्पताल
पारगढ़ा गांव के रहने वाले शंकर बेदिया के घर में तीन-चार दिन पहले अचानक आफत आई। उनके 15 साल के बेटे रामकिशुन, 10 साल के छोटे बेटे साहिल और पत्नी संगीता देवी को एक साथ तेज बुखार चढ़ा। परिजनों को लगा कि कोई ऊपरी हवा का चक्कर है। उन्होंने तुरंत अस्पताल ले जाने की बजाय गांव के ही एक तांत्रिक को बुला लिया। घर में तीन दिनों तक अगरबत्तियां जलती रहीं, मंत्र पढ़े जाते रहे और झाड़-फूंक का सिलसिला चलता रहा। इस बीच तीनों की तबीयत लगातार गिरती चली गई, लेकिन किसी ने उन्हें डॉक्टर को दिखाने की जहमत नहीं उठाई।
पांच से दस मिनट के भीतर बुझ गए दोनों चिराग, मां रिम्स रेफर
गुरुवार को जब तीनों की हालत बेकाबू हो गई और वे बेहोशी की हालत में पहुंच गए, तब जाकर परिजनों के हाथ-पांव फूले। घबराए परिजन उन्हें लेकर भुरकुंडा के एक निजी नर्सिंग होम पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने मरीजों की नब्ज देखते ही कह दिया कि केस उनके हाथ से बाहर है और तुरंत सदर अस्पताल ले जाने को कहा। बदहवास परिजन तीनों को गाड़ी में लादकर रामगढ़ सदर अस्पताल की ओर भागे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। रास्ते में महज पांच से दस मिनट के भीतर पहले बड़े भाई रामकिशुन और फिर छोटे साहिल की सांसें थम गईं। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। मां संगीता की धड़कनें कमजोर पड़ रही थीं, जिन्हें फौरन गंभीर हालत में रांची के रिम्स भेज दिया गया।
पिता परदेश में कर रहे मजदूरी, गांव के हैंडपंपों की जांच शुरू
इस पूरी घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि बच्चों के पिता शंकर बेदिया रोजी-रोटी कमाने के लिए ओडिशा गए हुए हैं। उन्हें अभी यह भी ठीक से नहीं पता कि उनके घर की खुशियां उजड़ चुकी हैं और जिन बेटों को वे पढ़ा-लिखाकर बड़ा आदमी बनाना चाहते थे, वे अब इस दुनिया में नहीं हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद पतरातू के बीडीओ मनोज कुमार गुप्ता गांव पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और सरकारी नियमों के मुताबिक मुआवजा दिलाने की बात कही। वहीं अचानक एक ही घर के तीन लोगों के बीमार पड़ने को देखते हुए पीएचई विभाग की टीम ने भी गांव का दौरा किया। टीम ने आसपास के चापाकलों से पानी के नमूने लिए हैं ताकि यह पता चल सके कि कहीं यह किसी जहरीले पानी या संक्रमण का असर तो नहीं था। गांव में फिलहाल मातम पसरा हुआ है और हर कोई इसी बात पर अफसोस जता रहा है कि अगर सही वक्त पर डॉक्टर के पास चले जाते, तो आज दोनों बच्चे जिंदा होते।
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