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Mathura/Lucknow : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर कान्हा की नगरी मथुरा पहुंचे सीएम योगी आदित्यनाथ ने जनपद को 1,051 करोड़ रुपये लागत की 229 विकास परियोजनाओं का बड़ा तोहफा दिया। सीएम ने यहां वैष्णव भक्ति और भारतीय संगीत परंपरा के महान प्रवर्तक स्वामी श्री हरिदास जी महाराज के नाम पर बने भव्य प्रेक्षागृह का लोकार्पण किया। समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी राष्ट्र केवल कंक्रीट, सड़कों और इमारतों से महान नहीं बनता, बल्कि अपनी स्मृतियों, संस्कृति और मूल जड़ों से जुड़कर ही महानता हासिल करता है। जिस समाज को अपनी जड़ों और इतिहास का बोध नहीं होता, वह आधुनिकता के नाम पर सिर्फ दूसरों की नकल करता है। इसके विपरीत, जिस समाज को अपनी विरासत पर गर्व होता है, वह दुनिया से अच्छी बातें सीखता भी है और पूरी मानवता को जीने की नई राह भी दिखाता है।
पूज्य साधु-संतों का अभिनंदन करते हुए सीएम ने कहा कि ब्रजभूमि महज एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना, भक्ति, संगीत, लोक कला और आध्यात्मिक ऊर्जा का जीवंत केंद्र है। उन्होंने अफसोस जताया कि लंबे समय तक देश में विकास की परिभाषा को केवल सड़क, नाली, बिजली और उद्योग तक सीमित कर दिया गया था। विकास के नाम पर हमारी पहचान और विरासत की घोर उपेक्षा की गई। मध्यकाल में विदेशी हमलावरों ने हमारे गौरवशाली प्रतीकों और मंदिरों को नष्ट करने की साजिशें कीं, लेकिन वे भारतीय जनमानस के हृदय से भगवान श्रीकृष्ण और सनातन मूल्यों की पावन स्मृतियों को कभी नहीं मिटा पाए।

स्वामी हरिदास जी की साधना के आगे सम्राट भी नतमस्तक हुए
स्वामी श्री हरिदास जी के आध्यात्मिक योगदान को नमन करते हुए सीएम ने कहा कि उन्होंने भक्ति को संगीत और संगीत को साधना का सर्वोच्च स्वरूप देकर सीधे समाज की चेतना से जोड़ दिया। स्वामी जी की साधना का प्रताप इतना अलौकिक था कि संगीत शिरोमणि तानसेन जैसे महान व्यक्तित्व उनके शिष्य बने। तानसेन स्वयं संगीत के शिखर पुरुष थे, लेकिन जिस संत की साधना ने तत्कालीन दिल्ली के मुगल सम्राट को भी राजसी ठाट छोड़कर भक्ति रस में झुकने पर विवश कर दिया, वह केवल स्वामी हरिदास जी की साधना की दिव्यता थी।
सीएम ने कहा कि मथुरा में बने इस नए आधुनिक प्रेक्षागृह से ब्रज की समृद्ध नाट्य, संगीत और लोक कला को एक अंतरराष्ट्रीय मंच मिला है। यह केंद्र स्थानीय फनकारों और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ेगा। स्वामी हरिदास संगीत एवं नृत्य महोत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से देश-विदेश के शीर्ष कलाकार ब्रज की धरा पर जुटेंगे, जिससे यहां के सांस्कृतिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।
कानून का राज स्थापित होने से मथुरा में लौटा उत्सव का माहौल
पूर्ववर्ती सरकारों के दौर की याद दिलाते हुए सीएम ने कहा कि एक समय था जब उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था बदहाल थी और ब्रज क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा। उन्होंने वर्ष 2016 के जवाहरबाग कांड का उल्लेख करते हुए कहा कि उस भयावह हिंसा में 29 बेकसूर लोगों की जान चली गई थी और दो जांबाज पुलिस अधिकारियों ने कर्तव्य की वेदी पर सर्वोच्च बलिदान दिया था। उस कालखंड में प्रदेश के भीतर किसी बड़े उत्सव, सुरक्षित माहौल या पर्यटन विकास की कल्पना करना भी असंभव था।
उन्होंने कहा कि तब त्योहारों से पहले दंगों और उपद्रव की आशंका से लोग सहमे रहते थे, लेकिन आज माहौल पूरी तरह बदल चुका है। अब त्योहार से पहले उपद्रव का डर नहीं होता, बल्कि शासन और प्रशासन मिलकर श्रद्धालुओं के स्वागत, सुरक्षा और भव्य व्यवस्था की तैयारी में जुटते हैं। पूरे राज्य से कर्फ्यू, दंगा और गुंडागर्दी खत्म हो चुकी है। सीएम ने कहा कि जब तक कानून का राज नहीं होगा, तब तक न तो कोई बाहरी निवेशक यहां पूंजी लगाएगा और न ही देश-दुनिया से श्रद्धालु अपने परिवारों के साथ यहां आने में सुरक्षित महसूस करेंगे। आज हमारी माताएं-बहनें बिना किसी डर के रात-दिन बाहर निकल रही हैं, यही बदलते उत्तर प्रदेश की असली तस्वीर है।

हमारा इतिहास केवल सत्ता का नहीं, सतत संघर्ष और पुनर्निर्माण का है
इतिहास की चर्चा करते हुए सीएम ने कहा कि भारत का इतिहास केवल सत्ता हथियाने और भौतिक उपलब्धियों की कहानी नहीं है। यह इतिहास आक्रमणों के सामने सीना तानकर खड़े रहने, निरंतर संघर्ष करने, अपने मंदिरों को फिर से खड़ा करने और सनातन परंपरा की अटूट निरंतरता को बचाए रखने का जीवंत दस्तावेज है। मथुरा इसका सबसे बड़ा साक्ष्य है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थित श्री केशवदेव मंदिर ने सदियों में कई भीषण आक्रमण झेले। हमलावरों ने ईंट-पत्थर के ढांचे जरूर तोड़े, लेकिन वे भक्तों के हृदय में बसे भगवान श्रीकृष्ण के अटूट विश्वास को कभी नहीं हिला पाए।
सीएम ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद न मथुरा की जन्माष्टमी रुकी, न बरसाना की लठमार होली थमी, न गोवर्धन की परिक्रमा टूटी और न ही वृंदावन की गलियों में राधा नाम का कीर्तन बंद हुआ। यही सनातन की अमर शक्ति है। काशी में बाबा विश्वनाथ के दरबार को बार-बार क्षति पहुंचाई गई, लेकिन लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जैसी विभूतियों ने उसका पुनर्निर्माण कराकर परंपरा को जीवित रखा और आज काशी विश्वनाथ धाम भव्यता से जगमगा रहा है। अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मंदिर को गिराकर गुलामी का ढांचा खड़ा किया गया, पर वहां भी न तो रामनवमी का मेला रुका और न ही परिक्रमा की परंपरा टूटी। आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनकर त्रेतायुग के गौरव को फिर से स्थापित कर चुका है।

डबल इंजन सरकार में आस्था और अर्थव्यवस्था साथ-साथ
सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने विकास की अवधारणा को नया आयाम दिया है। अब विकास और विरासत एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के मजबूत पूरक हैं। हम परंपरा को आधुनिकता से जोड़ रहे हैं और आस्था को आम नागरिक की आजीविका का माध्यम बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में अकेले उत्तर प्रदेश में लगभग 156 करोड़ देशी-विदेशी पर्यटकों और श्रद्धालुओं का आगमन हुआ, जो राज्य की सुदृढ़ कानून व्यवस्था, विश्वस्तरीय सड़कों और नागरिक सुविधाओं पर जनता के बढ़ते भरोसे को साबित करता है।
उन्होंने समझाया कि तीर्थ स्थलों के विकास से समाज के हर तबके को सीधा आर्थिक लाभ मिलता है। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं से केवल धार्मिक कार्य नहीं चलते, बल्कि रिक्शा चालक, होटल व्यवसायी, फूल-माला बेचने वाले, पेड़ा बनाने वाले हलवाई, हस्तशिल्पी और छोटे दुकानदार सभी की आय में बढ़ोतरी होती है। विरासत का यह पुनरुद्धार विकसित और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को धरातल पर उतार रहा है।

धार्मिक महाआयोजनों का विश्वस्तरीय प्रबंधन
सीएम ने कहा कि हाल ही में सावन माह के दौरान गाजियाबाद से हरिद्वार के बीच करीब 5 करोड़ कांवड़िए शांतिपूर्ण ढंग से निकले। इसके अलावा पूरे प्रदेश में करोड़ों शिवभक्तों ने बिना किसी असुविधा के अपनी यात्रा पूरी की। उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ का उदाहरण देते हुए कहा कि उस आयोजन में देश-दुनिया से करीब 66 करोड़ श्रद्धालु संगम तट पर आए। इतनी विशाल जनमेदिनी के बावजूद पूरा आयोजन स्वच्छता, सुरक्षा और आधुनिक तकनीक के साथ संपन्न हुआ। दुनिया के तमाम देशों ने माना कि भारत अपने सबसे बड़े आस्था के आयोजनों का प्रबंधन आधुनिक व्यवस्थाओं के दम पर बेहद कुशलता से कर सकता है। वही विश्वस्तरीय मॉडल अब ब्रज क्षेत्र में भी लागू किया जा रहा है।
ब्रज का कायाकल्प : परिक्रमा मार्ग, रोप-वे और सौभरि वन
राज्य स्मार्ट सिटी मिशन और उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के कार्यों की जानकारी देते हुए सीएम ने बताया कि पिछले 8 वर्षों में करीब 1,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं से ब्रज का कायाकल्प किया गया है। मथुरा, वृंदावन, बरसाना, नंदगांव, गोवर्धन, राधाकुंड, गोकुल और बल्देव को एक सुनियोजित पर्यटन सर्किट के तौर पर परस्पर जोड़ा जा रहा है। 84 कोसी, पंच कोसी और तीनों वन परिक्रमा मार्गों को सुगम, पक्का और हरा-भरा बनाया जा रहा है। प्राचीन कुंडों का वैज्ञानिक जीर्णोद्धार जारी है।
उन्होंने बताया कि वृंदावन में जाम से निजात दिलाने के लिए रोप-वे और विशाल मेगा पार्किंग बनाई जा रही है। मथुरा में राया अर्बन नोड परियोजना आधुनिक शहरीकरण और रोजगार का बड़ा केंद्र बनेगी। ब्रज भाषा के संरक्षण के लिए सूरदास ब्रज भाषा अकादमी की स्थापना की गई है। इसके अलावा, वृंदावन की नगरीय सीमा में लगभग 400 एकड़ क्षेत्र में एशिया के सबसे बड़े सिटी फॉरेस्ट के रूप में सौभरि वन विकसित किया जा रहा है, जो द्वापर युगीन हरियाली लौटाने के साथ पर्यावरण और ईको-टूरिज्म को नई दिशा देगा। कार्यक्रम से पूर्व सीएम ने खुद पारिजात का पौधा रोपित कर पर्यावरण का संदेश दिया।
कल्याणकारी योजनाओं का लाभ और कलाकारों का सम्मान
सीएम ने कहा कि सरकार की विकास यात्रा केवल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की खुशहाली हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने सपेरा समाज जैसे घुमंतू समुदायों का जिक्र करते हुए कहा कि लंबे समय तक उपेक्षित रहे इन परिवारों को अब आवासीय पट्टे और पक्के मकान दिए जा रहे हैं। कार्यक्रम में सीएम ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को पक्के आवास व ट्रैक्टरों की चाभियां, टूल किट, नियुक्ति पत्र और चेक वितरित किए।
मंच पर आने से पहले सीएम ने प्रो-पुअर पर्यटन परियोजना की प्रदर्शनी देखी, बच्चों का अन्नप्राशन कराया और गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की। उन्होंने पूर्व आईएएस आराधना जौहरी की पुस्तक ईकोज ऑफ डिग्निटी का विमोचन किया। कार्यक्रम में ब्रज तीर्थ विकास परिषद की लघु फिल्म दिखाई गई और कलाकारों द्वारा कलर्स ऑफ कृष्णा सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई। समारोह में गन्ना विकास मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी, सांसद हेमा मालिनी, विधायक श्रीकांत शर्मा, ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजा कांत मिश्रा सहित कई जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में संतजन उपस्थित रहे। अंत में सीएम ने सभी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की बधाई दी।
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