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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : जब मंच से अनाउंसमेंट हुआ, “मास कम्यूनिकेशन डिपार्टमेंट की टॉपर कीर्ति चौहान…”, तो पूरा दीक्षांत मंडप तालियों से गूंज उठा। लाल पाड़ वाली सफेद साड़ी और कंधे पर दीक्षांत स्कार्फ डाले कीर्ति जैसे ही सधे कदमों से मंच की ओर बढ़ीं, दर्शक दीर्घा में बैठे उनके माता-पिता की आंखें भर आईं। यह सिर्फ एक डिग्री लेने का पल नहीं था, बल्कि रामगढ़ के एक साधारण परिवार की बेटी के उस लंबे संघर्ष की जीत थी, जिसने पत्रकारिता की दुनिया में अपनी पहचान बनाने का सपना देखा था। झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने जैसे ही कीर्ति के गले में गोल्ड मेडल डाला, हॉल में मौजूद हर शख्स ने इस होनहार बिटिया के जज्बे को सलाम किया।
रात के सन्नाटे में जली टेबल लैंप और फील्ड रिपोर्टिंग का कड़ा इम्तिहान
मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं होती, इसमें फील्ड की धूल फांकनी पड़ती है और खबरों की सच्चाई तक पहुंचने की मशक्कत होती है। कीर्ति बताती हैं कि पढ़ाई के शुरुआती दिनों में कई बार लगा कि डगर कठिन है। नोट्स तैयार करना, असाइनमेंट्स पूरे करना और साथ ही मीडिया के तकनीकी पहलुओं को समझना आसान नहीं था। लेकिन जब भी हौसला डगमगाता, घर के उस कोने में जलने वाली टेबल लैंप और माता-पिता का भरोसा हिम्मत बन जाता था। कीर्ति ने कहा कि यह गोल्ड मेडल सिर्फ उनका नहीं है, बल्कि उनके शिक्षकों की डांट-दुलार और मां-बाप के हर उस त्याग का नतीजा है, जो उन्होंने इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए चुपचाप सहे।
दीक्षांत में चमकी आधी आबादी, 71 में से 44 गोल्ड मेडल बेटियों के नाम
रांची विश्वविद्यालय के 39वें दीक्षांत समारोह का यह दिन बेटियों की कामयाबी का गवाह बना। विभिन्न संकायों के 6923 विद्यार्थियों को डिग्रियां बांटी गईं, लेकिन असली रौनक गोल्ड मेडलिस्ट्स की कतार में दिखी। कुल 58 विद्यार्थियों को 71 गोल्ड मेडल दिए गए, जिनमें से 44 मेडल अकेले छात्राओं के नाम रहे। लड़कों के हिस्से सिर्फ 14 मेडल आए। कीर्ति की तरह कई ऐसी बेटियां थीं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत के दम पर मंच पर सबसे आगे खड़ी नजर आईं।
पारंपरिक परिधान, अपनापन और मंच से मिला बड़ा वादा
समारोह में औपनिवेशिक गाउन की जगह अपनी मिट्टी की संस्कृति साफ झलकी। छात्र जहां सफेद कुर्ता-पायजामा में थे, वहीं छात्राएं पारंपरिक परिधानों में सजी थीं। विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट्स के छात्रों ने ‘मैं हूं रांची विश्वविद्यालय’ नृत्य-नाटिका के जरिए कॉलेज की ऐतिहासिक यात्रा को मंच पर सजीव कर दिया। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने कहा कि छात्रों की प्रतिभा को बेहतर मंच देने के लिए इस दीक्षांत मंडप को जल्द ही एक आधुनिक और स्थायी ऑडिटोरियम का रूप दिया जाएगा।
समारोह के बाद भी काफी देर तक कीर्ति को बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। हाथ में गोल्ड मेडल थामे मुस्कुराती कीर्ति ने साफ कर दिया कि उनकी मंजिल सिर्फ यह मेडल नहीं है। अब उनका अगला पड़ाव समाज के दबे-कुचले तबके की आवाज बनना और जनसंचार के जरिए सकारात्मक बदलाव की नई कहानी लिखना है।
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