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Patna : सीएम सम्राट चौधरी ने लोक सेवक आवास के ‘संकल्प’ सभागार में मंगलवार को जब अधिकारियों की बैठक बुलाई, तो उनके तेवर बिल्कुल साफ थे। चेहरा गंभीर था और आवाज में दो टूक हिदायत। उन्होंने अधिकारियों को सीधे शब्दों में कहा कि बाढ़ की इस आफत में सरकार की पहली और आखिरी जिम्मेदारी सिर्फ एक है… पीड़ितों को तुरंत राहत, सुरक्षा और मदद। उन्होंने साफ ताकीद की कि कागजी सर्वे या दफ्तरों की सुस्ती की वजह से कोई भी जरूरतमंद परिवार छूटना नहीं चाहिए। अगर कोई पात्र परिवार छूट गया है, तो अफसर एक हफ्ते के भीतर उसका नाम जोड़ें और मदद पहुंचाएं।
इसी दो टूक निर्देश के साथ सीएम ने एक सिंगल क्लिक से राज्य के 8 लाख 27 हजार 472 बाढ़ प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में 579.23 करोड़ रुपए की आनुग्रहिक राहत राशि डीबीटी के जरिए ट्रांसफर कर दी। हर परिवार के खाते में सीधे 7-7 हजार रुपए पहुंचे हैं।


एक क्लिक, 7 हजार रुपए और तिरपाल के नीचे बंधी थोड़ी सी आस
सीएम का यह फैसला उन लाखों लोगों के लिए फौरी मरहम जैसा है, जिनका सब कुछ पानी के तेज बहाव में बह गया। राज्य के 15 जिलों, 88 प्रखंडों, 575 पंचायतों, 2,642 गांवों और 21 शहरों के 136 वार्डों में सैलाब ने जो तबाही मचाई है, उससे करीब 50 लाख लोग बेहाल हैं। 55 हजार हेक्टेयर में लगी फसलें गाद और पानी के नीचे दब चुकी हैं।
सभागार में आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल की प्रेजेंटेशन देखने के बाद सीएम ने कहा कि यह वक्त सिर्फ आंकड़े जुटाने का नहीं, बल्कि लोगों के आंसुओं को पोंछने का है। जैसे ही खातों में पैसे पहुंचे, ऊंचे बांधों और सड़कों के किनारे तिरपाल तानकर गुजारा कर रहे परिवारों के मोबाइलों पर संदेश बजने लगे। संकट के इस दौर में यह सात हजार रुपए किसी के लिए बच्चों के दूध का सहारा बने, तो किसी के लिए जरूरी दवाओं और सूखे राशन का जरिया।

‘जब तक हालात सामान्य नहीं होते, राहत का पहिया नहीं थमेगा’
सभागार से सीएम ने साफ ऐलान किया कि जब तक पानी पूरी तरह उतर नहीं जाता और आखिरी व्यक्ति सुरक्षित अपने घर नहीं लौट जाता, तब तक सरकार का राहत अभियान बिना रुके चलेगा। उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 21 टीमें लगातार ग्राउंड पर मोर्चा संभाले हुए हैं।
भूख से जूझते परिवारों के लिए अब तक 1200 से ज्यादा कम्युनिटी किचन चालू किए गए हैं, जहां से 1 करोड़ 28 लाख से ज्यादा खाने की थालियां बांटी जा चुकी हैं। सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि खाने के पैकेट, शुद्ध पीने का पानी, ओआरएस और जरूरी दवाओं की सप्लाई चेन में रत्ती भर भी रुकावट नहीं आनी चाहिए।
‘बिल्ड बैक बेटर दैन बिफोर’: सिर्फ मलबा नहीं हटाना, नए सिरे से जिंदगी गढ़नी है
सीएम सम्राट चौधरी ने केवल तात्कालिक राहत पर बात नहीं की, बल्कि पानी उतरने के बाद की असली जंग का खाका भी खींचा। उन्होंने अधिकारियों को ‘बिल्ड बैक बेटर दैन बिफोर’ यानी पहले से बेहतर पुनर्निर्माण की थीम पर काम करने का संकल्प दिलाया। उन्होंने अल्टीमेटम दिया कि एक महीने के भीतर सभी बहाली और पुनर्निर्माण के काम पूरे होने चाहिए। टूटी सड़कों की मरम्मत, बिजली और पानी की बहाली के साथ-साथ किसानों को कृषि इनपुट सब्सिडी देने का काम युद्धस्तर पर पूरा किया जाए।
बुधवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने आ रहे हैं। इसे देखते हुए सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि फसलों, मवेशियों और घरों को पहुंचे नुकसान का बिल्कुल सटीक और तथ्यात्मक ब्योरा तैयार रखें। सीएम ने कहा कि सरकार की मंशा सिर्फ लोगों को इस आपदा से बाहर निकालना नहीं है, बल्कि उन्हें पहले से ज्यादा मजबूत स्थिति में खड़ा करना है।
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