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Ranchi : राजधानी रांची के बिरसा चौक स्थित मामा नगर में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब रेलवे की जमीन खाली कराने के लिए प्रशासनिक अमला बुलडोजर लेकर पहुंच गया। प्रशासन की इस कार्रवाई की भनक लगते ही बस्ती के सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए और विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच जोरदार टकराव हो गया। भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस को अंततः लाठिया चटकानी पड़ी। अचानक हुए इस घटनाक्रम से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और माहौल को शांत रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया है।
अचानक पहुंचे बुलडोजर का महिलाओं ने किया घेराव
सुबह जब प्रशासनिक दस्ता पुलिस बल के साथ बस्ती में दाखिल हुआ, तो लोगों ने काम रोकने की गुहार लगाई। कार्रवाई रुकती न देख बस्ती की महिलाएं आगे आ गईं और उन्होंने प्रशासनिक टीम का रास्ता रोक दिया। महिलाओं और पुलिसकर्मियों के बीच पहले तीखी बहस हुई, जो जल्द ही धक्का-मुक्की में बदल गई। इस बीच भीड़ की तरफ से पुलिस टीम पर हमला करने का प्रयास भी किया गया। हालात बिगड़ते देख मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने मोर्चा संभाला और लाठियां भांजकर उग्र लोगों को खदेड़ा। इस हंगामे के चलते काफी देर तक मौके पर अफरा-तफरी मची रही और लोग इधर-उधर भागते नजर आए।

20 साल की गृहस्थी पर चला हथौड़ा, रोते-बिलखते दिखे लोग
कार्रवाई के दौरान अपने आशियाने को जमींदोज होते देख बस्ती के परिवारों में मायूसी छा गई। महिलाओं और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था। सालों की मेहनत से संजोए घरों से लोग आनन-फानन में अपना सामान बाहर निकालते दिखे। कई परिवार खुले आसमान के नीचे अपने सामान के साथ बेबस बैठे नजर आए। स्थानीय लोगों का कहना है कि मामा नगर में 200 से भी ज्यादा मकान बने हुए हैं। प्रशासन की इस अचानक की गई कार्रवाई से कई परिवारों के सिर से छत छिन गई है और उनके सामने अब रहने का बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
बिना पुनर्वास तोड़े जा रहे घर, आंदोलन की चेतावनी
इस तोड़फोड़ के खिलाफ बस्ती बचाओ संघर्ष समिति ने कड़ा एतराज जताया है। समिति के प्रतिनिधियों का कहना है कि यहां लोग पिछले 20 सालों से अपनी गृहस्थी जमाए बैठे हैं। सरकार और रेलवे को अगर जमीन खाली करानी ही थी, तो पहले इन गरीब परिवारों के लिए कोई वैकल्पिक जमीन या रहने का इंतजाम करना चाहिए था। समिति ने साफ मांग रखी है कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की पुख्ता व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक बुलडोजर की कार्रवाई पूरी तरह रोकी जाए। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें बिना छत के यूं ही उजाड़ा गया, तो वे चुप नहीं बैठेंगे और बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।
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