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News Samvad : अगर आपका वजन अचानक कम हो रहा है और इसके साथ दिल तेजी से धड़क रहा है, हाथ कांप रहे हैं, पसीना ज्यादा आ रहा है या सामान्य से ज्यादा गर्मी महसूस हो रही है, तो इसे सिर्फ फिटनेस का नतीजा समझकर नजरअंदाज न करें। खासकर तब, जब आपने वजन कम करने के लिए न तो डाइटिंग शुरू की हो और न ही एक्सरसाइज बढ़ाई हो। ऐसे लक्षण हाइपरथायरॉइडिज्म की ओर इशारा कर सकते हैं। इस स्थिति में थायराइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाती है और शरीर में थायराइड हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है।
थायराइड बढ़ाता है शरीर का मेटाबॉलिज्म
थायराइड गर्दन के सामने मौजूद तितली के आकार की एक छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण ग्रंथि है। यह टी-4 यानी थायरॉक्सिन और टी-3 यानी ट्रायोडोथायरोनिन जैसे हार्मोन बनाती है। ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा के इस्तेमाल, हृदय की गति और कई दूसरे जरूरी कामों को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। जब थायराइड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगता है तो शरीर का मेटाबॉलिज्म सामान्य से तेज हो जाता है। ऐसे में शरीर ज्यादा ऊर्जा खर्च करने लगता है। इसका असर वजन पर भी पड़ता है। कई बार व्यक्ति की भूख सामान्य रहती है या पहले से ज्यादा हो जाती है, फिर भी उसका वजन तेजी से कम होने लगता है। हाइपरथायरॉइडिज्म में हर व्यक्ति में एक जैसे लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। कुछ लोगों में शुरुआत में केवल वजन कम होने या दिल की धड़कन बढ़ने जैसी समस्या दिखाई दे सकती है। धीरे-धीरे दूसरे लक्षण भी सामने आ सकते हैं।

दिल की धड़कन तेज, हाथ कांपना और नींद में परेशानी
इस बीमारी में दिल की धड़कन तेज या अनियमित हो सकती है। व्यक्ति को बिना ज्यादा मेहनत किए भी धड़कन महसूस हो सकती है। हाथों में हल्की या लगातार कंपकंपी, ज्यादा पसीना आना, गर्मी बर्दाश्त न होना और बेचैनी भी इसके आम लक्षणों में शामिल हैं।कुछ लोगों को रात में ठीक से नींद नहीं आती। चिड़चिड़ापन, घबराहट और किसी काम पर ध्यान लगाने में परेशानी भी हो सकती है। बाल पतले होने या झड़ने लग सकते हैं और त्वचा सामान्य से ज्यादा गर्म तथा नम महसूस हो सकती है। बार-बार मल त्याग या दस्त की शिकायत भी हो सकती है। महिलाओं में मासिक धर्म के सामान्य पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है। कई मामलों में गर्दन के सामने थायराइड ग्रंथि बढ़ने के कारण उभार भी नजर आ सकता है। ग्रेव्स डिजीज से जुड़े हाइपरथायरॉइडिज्म में आंखों से संबंधित समस्याएं भी हो सकती हैं। आंखों में सूजन, लालिमा, उभार या असहजता महसूस होना इसके संकेत हो सकते हैं।
समय पर जांच जरूरी, इलाज में देरी से बढ़ सकती है परेशानी
हाइपरथायरॉइडिज्म के कई कारण हो सकते हैं। इनमें ग्रेव्स डिजीज, थायराइड की कुछ गांठें और थायराइड ग्रंथि में सूजन प्रमुख कारणों में शामिल हैं। कुछ परिस्थितियों में शरीर में आयोडीन की अधिकता भी थायराइड हार्मोन के ज्यादा बनने की वजह बन सकती है। समय पर इलाज न मिलने पर इसका असर केवल वजन और मेटाबॉलिज्म तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक हाइपरथायरॉइडिज्म रहने से दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है और एट्रियल फिब्रिलेशन जैसी समस्या का खतरा बढ़ सकता है। हड्डियां भी कमजोर हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में थायरॉइड स्टॉर्म जैसी मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है, जिसमें तत्काल चिकित्सा की जरूरत पड़ती है।
अगर बिना किसी स्पष्ट वजह के तेजी से वजन कम हो रहा है और साथ में धड़कन तेज होना, हाथ कांपना, अत्यधिक पसीना, गर्मी ज्यादा लगना, बेचैनी या नींद की समस्या जैसे लक्षण भी हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। डॉक्टर स्थिति के अनुसार टीएसएच, टी-3 और टी-4 की रक्त जांच करा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर अन्य जांच भी की जा सकती हैं। इन लक्षणों का मतलब हमेशा हाइपरथायरॉइडिज्म ही हो, यह जरूरी नहीं है, इसलिए खुद से बीमारी या दवा का निष्कर्ष निकालने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना बेहतर है।
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