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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : आमतौर पर सुबह के वक्त कॉलेज का जो कोना-कोना छात्रों के शोरगुल और पढ़ाई की हलचल से गुलजार रहता है, वहां आज एक अजीब सी खामोशी पसरी हुई थी। वजह थी चितरपुर महाविद्यालय के सचिव शफीक अनवर के सिर से उनकी मां अमीना खातून का साया उठ जाना। 73 बरस की उम्र में जब उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा, तो यह नुकसान सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे कॉलेज कुनबे को भीतर तक झकझोर गया।
इस दुख की घड़ी में साथ खड़े होने के लिए परिसर में एक सादी लेकिन बेहद भावुक शोक सभा बुलाई गई। वहां मौजूद हर शख्स के चेहरे पर एक अपना खोने की उदासी साफ दिख रही थी। शिक्षकों से लेकर शिक्षकेतर कर्मचारियों और क्लास से निकलकर आए छात्र-छात्राओं तक, सब एक कतार में खड़े थे। सभी ने सिर झुकाकर एक मिनट का मौन रखा और उस बुजुर्ग मां की रूह की सुकूनियत के लिए दुआ मांगी, जिन्होंने जिंदगी भर अपने परिवार को संवारने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

कॉलेज की प्राचार्या डॉ. संज्ञा ने भरे मन से बात रखते हुए कहा कि जिंदगी में मां की जगह कोई और कभी नहीं ले सकता। उनका चले जाना ऐसा खालीपन छोड़ जाता है जिसे कोई शब्द नहीं भर सकते। उन्होंने सचिव शफीक अनवर और उनके पूरे परिवार के साथ पूरी कॉलेज बिरादरी की ओर से गहरी संवेदना बांटी और ईश्वर से प्रार्थना की कि वे इस टूटे दिल वाले परिवार को हौसला दें।
उस दोपहर माहौल इतना संजीदा था कि शोक सभा में शामिल प्रो. अंजनी करमाली, प्रो. निरंजन महतो, प्रो. उत्तम कुमार, प्रो. शबाना अंजुम, प्रो. दीपक कुमार, प्रो. मीना मुंडा और प्रो. इब्राहिम अहमद तक सबकी जुबान खामोश थी। वहीं जफरुल हसन खान, रवि कुमार, आसिया आफरीन, कुसुम कुमारी, सोनू कुमार, राजेश तिवारी और भारी तादाद में मौजूद छात्र-छात्राएं भी अपनी जगह चुपचाप खड़े रहकर बस उस गमगीन परिवार के दुख को बांटने की कोशिश करते नजर आए।
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