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New Delhi : नई दिल्ली में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन शुक्रवार को पूरा हो गया। 8 और 9 अक्टूबर को चले इस मंथन में देशभर के राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बिहार की तरफ से समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता और विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल सम्मेलन में शामिल हुए। कार्यक्रम के आखिरी दिन समापन सत्र में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे और उन्होंने राज्यों के मंत्रियों व वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन किया।
आंगनबाड़ी और सुरक्षा व्यवस्था पर राज्यों के साथ लंबा मंथन
इस सम्मेलन का मुख्य मकसद महिलाओं और बच्चों से जुड़े पुराने कानूनों और नियमों की समीक्षा करना था। राज्यों के साथ विचार-विमर्श के बाद बैठक में तय हुआ कि अब आंगनबाड़ी केंद्रों की पूरी तस्वीर बदली जाएगी। यहां केवल पोषण आहार बांटने तक सीमित रहने के बजाय आधुनिक तकनीक और बेहतर शुरुआती शिक्षा पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी कड़े कदम उठाने पर बात हुई, ताकि दफ्तरों से लेकर सार्वजनिक जगहों तक वे खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर सकें और किसी भी परेशानी में उन्हें तुरंत कानूनी या प्रशासनिक मदद मिल सके।

बाल संरक्षण और महिला आत्मनिर्भरता को जमीन पर उतारने की तैयारी
चर्चा के दौरान बच्चों के अधिकारों और उनकी देखरेख से जुड़े कानूनों को सख्ती से लागू करने पर सहमति बनी। जरूरतमंद बच्चों के पुनर्वास के लिए एक मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार करने की योजना है। दूसरी ओर, महिलाओं को आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए चल रही सरकारी योजनाओं को सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। बैठक में बिहार की समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने राज्य में चल रहे नए प्रयोगों और योजनाओं का ब्योरा रखा। उन्होंने केंद्रीय कानूनों को मजबूत करने के लिए बिहार का पक्ष सामने रखते हुए कहा कि केंद्र और राज्यों के इस तालमेल से जमीनी स्तर पर काम तेजी से आगे बढ़ेगा।
समापन सत्र में पहुंचे प्रधानमंत्री, योजनाओं को असरदार बनाने की दी सीख
सम्मेलन के समापन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक को संबोधित किया। उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभवों का हवाला देते हुए मौजूद मंत्रियों और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि योजनाएं सिर्फ कागजों पर न रहें। प्रधानमंत्री ने कहा कि चाहे आंगनबाड़ी केंद्रों को सुधारना हो, बच्चों की हिफाजत करनी हो या महिलाओं को आगे बढ़ाना हो, इन सभी कदमों को एक मजबूत समाज की नींव बनना चाहिए। सभी विभाग आपसी तालमेल से काम करें, ताकि योजनाओं का सीधा असर आम लोगों की जिंदगी में दिखाई दे सके।
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