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Patna : बाहर से जगमगाती कांच की दीवारें, आलीशान सोफे, मुस्कुराते दरबान और धीमा बजता संगीत। पटना के इन बड़े होटलों में घुसते ही लगता है कि ठाठ-बाट का कोई जवाब नहीं। जेब ढीली कर जब लोग यहां टेबल बुक करते हैं, तो उन्हें लगता है कि वे शहर का सबसे उम्दा और सुरक्षित खाना खाने जा रहे हैं। लेकिन शुक्रवार को खाद्य संरक्षा विभाग की टीम ने जब इन होटलों के चमचमाते डाइनिंग हॉल को पार कर पीछे की रसोई में कदम रखा, तो हकीकत कुछ और ही निकली। दरवाजे के पीछे गंदगी का अंबार था, फ्रिज में सड़ा हुआ मीट दबा था और दाल-सब्जियों के साथ एक्सपायरी मसाले रखे हुए थे। खाद्य संरक्षा आयुक्त कुमार रवि के निर्देश पर एक साथ पटना के पांच बड़े होटलों पर हुई इस कार्रवाई ने साफ कर दिया कि इन हाई-फाई होटलों का किचन बेहद निचले दर्जे का है।
फ्रीजर में सड़ा हुआ मीट और बिना तारीख की ब्रेड
द पनाश होटल का नाम शहर के महंगे ठिकानों में गिना जाता है। टीम जब इसके फ्रीजर रूम में पहुंची, तो वहां की बदबू और लापरवाही हैरान करने वाली थी। लगभग दस किलो मटन और चिकन पॉलिथीन में लपेटकर ठूंसा हुआ मिला। पैकेट पर न तो यह लिखा था कि यह मीट कब काटा गया और न ही यह कि इसे कब तक खाया जा सकता है। जांच अधिकारियों ने जब इसे परखा, तो साफ हो गया कि यह मांस इंसानों के खाने के लायक बिल्कुल नहीं बचा था। करीब सवा छह हजार रुपये कीमत के इस पूरे चिकन-मटन को फौरन जब्त कर कूड़े में नष्ट कराया गया। इसी तरह बिना किसी तारीख वाले छह पैकेट ब्रेड भी फेंकवा दिए गए। हद तो तब हो गई जब पीने के पानी की जांच हुई। टीडीएस मीटर पर पानी का स्तर महज 44 निकला, जो मानकों के हिसाब से सही नहीं है। यानी जिस पानी और खाने के लिए लोग भारी-भरकम बिल भर रहे हैं, वह सेहत बिगाड़ने का पूरा इंतजाम कर रहा था।
रसोई में कबूतरों का बसेरा और वेज-नॉनवेज एक ही जगह
होटल पाटलिपुत्र एक्सोटिका का नजारा तो किसी ढाबे से भी बदतर निकला। यहां रसोई का वेंटिलेटर लंबे समय से टूटा पड़ा था और उसी रास्ते किचन के अंदर कबूतर उड़ रहे थे। जिस जगह खाना पक रहा था, ठीक उसी के ऊपर परिंदे मंडरा रहे थे। स्टोर रूम में सामान रखने का कोई सलीका नहीं था। यहां से छह किलो एक्सपायर हो चुका राज मिल्क, आठ किलो खराब बेकरी मिक्स, डेढ़ किलो हाइड्रो और एक्सपायरी जीरा सीप बरामद हुआ, जिसे मौके पर ही नष्ट करवाया गया। होटल ग्राहकों को जो बिल थमा रहा था, उस पर फूड सेफ्टी का अनिवार्य नंबर तक नहीं था। कुछ ऐसा ही हाल होटल गार्गी ग्रैंड में दिखा। यहां शाकाहारी और मांसाहारी सामान एक साथ मिलाकर रखा हुआ था। खाने-पीने की चीजें कब आईं और कब इस्तेमाल होंगी, इसका कोई हिसाब नहीं था। कर्मचारियों के पास फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं थे और पानी की जांच तो दो साल पहले 2024 में कराई गई थी।
मौर्या में जंग लगे फ्रिज और लेमन ट्री से उठाए गए नमूने
गांधी मैदान के प्रतिष्ठित होटल मौर्या की साख पर भी इस जांच ने बड़ा बट्टा लगाया है। यहां की रसोई में खाना पकाने के लिए प्रतिबंधित एल्युमिनियम के बर्तनों का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा था। टीम ने इन बर्तनों के इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगा दी। डीप फ्रीजर की हालत ऐसी थी कि उसके कोनों में जंग लगा हुआ था। कचरे के डिब्बे बिना ढक्कन के खुले पड़े थे और कर्मचारियों की साफ-सफाई की हालत बेहद खराब थी। टीम ने यहां से पनीर और साल्टेड बटर के नमूने जब्त कर अगमकुआं लैब जांच के लिए भेजे हैं। उधर लेमन ट्री होटल में भी पनीर, चीज और सॉस के नमूने भरे गए, साथ ही खुली पड़ी नालियों को ढंकने का फरमान सुनाया गया।
विभाग ने सभी पांचों होटलों को चौदह दिन का सख्त अल्टीमेटम थमा दिया है। साफ कह दिया गया है कि दो हफ्ते के भीतर अगर किचन का ढर्रा नहीं सुधरा, तो अगली कार्रवाई सीधे ताला लगाने और लाइसेंस रद्द करने की होगी।
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