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Ranchi : आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ ही आज से शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो गया है। आज से अगले नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाएगी। पहले दिन घरों और पूजा पंडालों में कलश स्थापना के साथ देवी के आगमन का स्वागत हो रहा है। इसके साथ ही शक्ति के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना शुरू हो गई है। श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत रखकर मां की कृपा पाने के लिए दुर्गा चालीसा, सप्तशती पाठ और आरती करेंगे। मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान दुर्गा चालीसा का नियमित पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का साया
शास्त्रों में सुबह के समय देवी के आह्वान और कलश स्थापना को सबसे उत्तम माना गया है। पंचांग के अनुसार आज चित्रा नक्षत्र रात 10 बजकर 32 मिनट तक रहेगा, जबकि वैधृति योग रात 9 बजकर 5 मिनट तक बना रहेगा। ज्योतिषीय नियमों के अनुसार चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग की मौजूदगी में कलश स्थापना करते समय खास सावधानियां बरती जाती हैं, ताकि पूजा का पूरा फल मिल सके।
अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करना रहेगा सबसे श्रेष्ठ
शास्त्रों के जानकारों का कहना है कि चित्रा नक्षत्र के शुरुआती दो चरणों को छोड़कर कलश स्थापित करना चाहिए। ऐसे में दोपहर का अभिजीत मुहूर्त घटस्थापना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इस शुभ समय में घट स्थापना करने से सारे दोष समाप्त हो जाते हैं और पूजा निर्विघ्न पूरी होती है। घटस्थापना के बाद श्रद्धालु अखंड ज्योति प्रज्वलित कर नौ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व का संकल्प ले रहे हैं।


