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Pawan Thakur / Dharmendra Pradhan
Ranchi/Ramgarh : कोल इंडिया की सिरमौर कंपनी सीसीएल सिर्फ कोयला निकालने वाली कोई खदान भर नहीं है, बल्कि यह उन लाखों परिवारों के लिए एक ऐसा मजबूत आशियाना है जो हर सुख-दुख में उनके साथ खड़ा रहता है। खदान की अथाह गहराइयों में उतरकर देश की तरक्की के लिए पसीना बहाने वाले छोटे से छोटे कामगार से लेकर बड़े इंजीनियर तक, सीसीएल हर किसी का ख्याल एक परिवार के मुखिया की तरह रखती है। कार्यस्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम हों, कामगारों के बच्चों की बेहतर पढ़ाई-लिखाई, परिवार के लिए मुफ्त उम्दा इलाज या फिर रिटायरमेंट के बाद सम्मानजनक जिंदगी के लिए तय समय पर पेंशन और तमाम सुविधाएं… कंपनी अपनी हर नीति में मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देती आई है। इसी संवेदनशीलता और पारदर्शी कार्यशैली के बूते सीसीएल ने देश के दिल में अपनी साख बनाई है। लेकिन अफसोस कि इसी विशाल और नेक दिल व्यवस्था की छांव में कुछ ऐसे भ्रष्ट मुलाजिम भी दीमक की तरह पैठ बना लेते हैं, जो अपने लालच से पूरे संस्थान की गरिमा पर कालिख पोतने में जरा भी नहीं हिचकते। ऐसा ही एक शर्मनाक चेहरा बुधवार को रामगढ़ के सौंदा डी में बेनकाब हुआ, जहां उम्र भर कंपनी की सेवा करने वाले एक बुजुर्ग मजदूर की लाचारी का सौदा कर रहे ऑफिस सुपरिटेंडेंट को सीबीआई ने रंगे हाथ दबोच लिया।
जीवन भर की निष्ठा के बदले दफ्तर के अंतहीन फेरे
जिस मजदूर ने अपनी जिंदगी के बेहतरीन साल सीसीएल की सेवा में गुजार दिए, रिटायरमेंट के बाद उसकी उम्मीद बस इतनी थी कि बची हुई जिंदगी सुकून और मान-सम्मान के साथ कटेगी। कंपनी का नियम भी यही कहता है कि रिटायर हुए कामगार को उसका वाजिब हक बिना किसी परेशानी के फौरन मिलना चाहिए। लेकिन सौंदा डी, सीसीएल सौंदा व सेंट्रल सौंदा के पर्सनल सेक्शन में बैठे ऑफिस सुपरिटेंडेंट अभय कुमार बक्शी के इरादे कुछ और ही थे। वह बुजुर्ग मजदूर अपने जरूरी कागजात और पेंशन से जुड़े काम को लेकर पिछले कई महीनों से पर्सनल सेक्शन की चौखट नाप रहा था। हर बार उसे उम्मीद की जगह सिर्फ टालमटोल और खोखले आश्वासन मिलते। थके कदमों से हर रोज खाली हाथ घर लौटना उस बुजुर्ग की मजबूरी बन चुका था। जब उसने हाथ जोड़कर अपनी बेबसी और परेशानी बक्शी के सामने रखी, तो मदद की उम्मीद में पहुंचे उस रिटायर्ड कर्मी के पैरों तले जमीन खिसक गई। बक्शी ने साफ शब्दों में कह दिया कि अगर फाइलों को तेजी से आगे बढ़ाना है, तो पहले जेब ढीली करनी होगी और घूस का इंतजाम करना पड़ेगा।
झुकने के बजाय लड़ी हक की जंग, सीधे रांची में दी दस्तक
ईमानदारी से खदान में काम करने वाले उस बुजुर्ग को यह बात भीतर तक कचोट गई कि जिस कंपनी ने उसे हमेशा सम्मान दिया, उसके एक मुलाजिम की ऐसी जुर्रत कि वह उसके खून-पसीने के हक पर डाका डाले। उसने हार मानकर रिश्वत देने या घुटने टेकने के बजाय उस भ्रष्ट व्यवस्था पर वार करने का कड़ा फैसला किया। बुजुर्ग ने पैसे का बंदोबस्त करने के नाम पर थोड़ा समय मांगा और सीधे रांची स्थित सीबीआई दफ्तर जा पहुंचा। वहां उसने अफसरों के सामने पूरी दास्तान बयान की और बताया कि किस तरह सीसीएल की साख की आड़ में पर्सनल सेक्शन में मजदूरों का शोषण हो रहा है। सीबीआई के अफसरों ने मामले की गंभीरता को समझा और उस घूसखोर को उसके अंजाम तक पहुंचाने के लिए पूरा चक्रव्यूह तैयार कर लिया।
‘थम्स-अप’ का इशारा, केमिकल के रंग और उड़ गए होश
तय योजना के मुताबिक बुधवार को सीबीआई की टीम ने केमिकल लगे हुए नोट मजदूर को सौंपे। मजदूर सौंदा डी परियोजना कार्यालय पहुंचा और ऑफिस सुपरिटेंडेंट अभय कुमार बक्शी के हाथ में घूस की रकम थमा दी। अपनी जेब गर्म होते ही बक्शी के चेहरे पर मुस्कान तैर गई और वह अपनी गाड़ी से घर जाने के लिए निकल पड़ा। उसे अंदाजा भी नहीं था कि उसका खेल अब खत्म हो चुका है। बाहर निकलते ही मजदूर ने निगरानी कर रही सीबीआई टीम की तरफ देखकर ‘थम्स-अप’ का इशारा कर दिया। यह इशारा मिलते ही सीबीआई के अधिकारियों ने बिजली की तेजी से उसकी गाड़ी को घेर लिया और उसे वहीं धर दबोचा। जब पानी मंगाकर बक्शी के हाथ धुलवाए गए, तो केमिकल के असर से पानी का रंग तुरंत बदल गया। अपनी चोरी पकड़े जाते ही चंद मिनट पहले तक रौब झाड़ने वाले सुपरिटेंडेंट का चेहरा फक पड़ गया और जुबान लड़खड़ाने लगी।
क्लब में गहन पूछताछ, कोलियरी में मजदूरों ने ली राहत की सांस
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई की टीम आरोपी को भुरकुंडा ऑफिसर्स क्लब ले गई। वहां गवाहों की मौजूदगी में उससे गहन पूछताछ की गई, बयान दर्ज किए गए और कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद टीम उसे अपने साथ रांची ले गई। इस छापेमारी की खबर जैसे ही पूरे बरका सयाल क्षेत्र और परियोजना कार्यालयों में फैली, घूसखोरी के आदी हो चुके कर्मियों में हड़कंप मच गया। वहीं दूसरी तरफ, खदानों में काम करने वाले आम मजदूरों ने राहत की सांस ली। कई कर्मचारियों ने दबी जुबान में खुलकर कहा कि कंपनी तो हमेशा मजदूरों के हित में सोचती है, लेकिन पर्सनल सेक्शन में बैठे ऐसे कुछ लोग बिना ‘चढ़ावा’ लिए किसी का जायज काम भी नहीं होने देते थे और लोगों को इस कदर परेशान करते थे कि वे थक-हारकर पैसे देने पर मजबूर हो जाएं। मजदूरों ने सीबीआई की इस सख्त कार्रवाई की दिल खोलकर तारीफ की और उम्मीद जताई कि ऐसे भ्रष्ट तत्वों पर शिकंजा कसने से सीसीएल की साफ-सुथरी और परोपकारी छवि पर लगा यह दाग हमेशा के लिए धुल सकेगा।
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