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Ranchi : जब किसी इलाके में भारी मशीनें चलती हैं और जमीन से काला कोयला निकाला जाता है, तो आमतौर पर जेहन में धूल और धुएं की तस्वीर उभरती है। लेकिन झारखंड के दूर-दराज गांवों में पिछले कुछ सालों में एक अलग ही कहानी लिखी जा रही है। वहां खदानों के आस-पास सिर्फ कोयला नहीं निकल रहा, बल्कि खेती की नई राहें बन रही हैं और बंजर मानी जाने वाली जमीनों पर हरियाली लहलहा रही है। बदलाव की इसी जमीनी कोशिश की गूंज देश की राजधानी तक पहुंची। मौका था नई दिल्ली के रेडिसन ब्लू होटल में सजे ‘चौथे फॉर्च्यून लीडरशिप अवॉर्ड्स 2026’ के मंच का, जहां CCL यानी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड ने एक साथ तीन बड़े राष्ट्रीय सम्मान जीतकर यह साबित कर दिया कि असली तरक्की वही है, जो गांव के आखिरी आदमी के चेहरे पर मुस्कान लाए।
चौपाल से निकलकर मंच तक पहुंची बदलाव की दास्तान
दिल्ली की चमचमाती लाइटों और देश भर से जुटे बड़े उद्योगपतियों के बीच जब CCL का नाम पुकारा गया, तो तालियां सिर्फ एक कंपनी के लिए नहीं, बल्कि झारखंड के उन हजारों ग्रामीणों और किसानों की मेहनत के लिए बजीं, जिनके जीवन में बदलाव आया है। कंपनी को यह पहचान किसी दफ्तरी रिपोर्ट की वजह से नहीं, बल्कि समाज के प्रति उसकी सच्ची जवाबदेही और सीधे लोगों से जुड़ने वाले अभियानों के दम पर मिली है। ग्रामीण विकास और सामुदायिक कल्याण के तहत सीसीएल ने अपने खदान क्षेत्रों के पास बुनियादी सुविधाओं, रोजगार के अवसरों और शिक्षा-स्वास्थ्य की ऐसी डोर बांधी है, जिससे स्थानीय परिवारों को सीधा सहारा मिला है।
एक मजबूत विजन और किसानों के पसीने को मिला सम्मान
इस पूरे समारोह का सबसे खास पल वह रहा जब CCL के निदेशक (मानव संसाधन) हर्ष नाथ मिश्र को ‘सीएसआर लीडर ऑफ द ईयर’ के खिताब से नवाजा गया। यह सम्मान उन्हें इसलिए मिला क्योंकि उन्होंने योजनाओं को केवल बजट और फाइलों में कैद रखने के बजाय अफसरों को सीधे गांव की चौपाल तक भेजा। उन्होंने ऐसी रणनीति बनाई जिससे जरूरतमंदों की असली समस्या पहचानी जा सके। इसके साथ ही पूरी कंपनी को उसके निरंतर सामाजिक सरोकारों के लिए ‘सीएसआर एक्सीलेंस अवॉर्ड’ दिया गया। वहीं खेती को मुनाफे का जरिया बनाने वाली ‘उन्नत कृषि: स्मार्ट एग्रीकल्चर’ पहल के लिए कंपनी को ‘रूरल डेवलपमेंट इम्पैक्ट अवॉर्ड’ सौंपा गया। मंच पर यह पुरस्कार सीसीएल के सीएसआर प्रबंधक जॉन अमित बोदरा ने ग्रामीणों के प्रतिनिधि के रूप में स्वीकार किया।
आधुनिक खेती ने बदली खेत-खलिहान की तकदीर
जिस पहल की सबसे ज्यादा चर्चा रही, वह थी गांवों में स्मार्ट खेती का मॉडल। कभी पारंपरिक तरीकों और मौसम की मार से परेशान रहने वाले किसानों को सीसीएल ने उन्नत किस्म के बीज, ड्रिप सिंचाई और आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ा। नतीजा यह हुआ कि कम लागत में पैदावार बढ़ने लगी और कई किसान जो कभी पलायन की सोच रहे थे, अब अपने ही खेतों से बेहतर आमदनी जुटा रहे हैं। सीसीएल की इस कोशिश ने दिखा दिया कि खदान उद्योग भी पर्यावरण और समाज के साथ तालमेल बिठाकर चल सकता है। दिल्ली में मिले इन सम्मानों ने साफ संदेश दिया है कि जब कॉर्पोरेट जगत अपनी नजरें जमीन की तरफ मोड़ता है, तो नतीजे केवल मुनाफे में नहीं, बल्कि जिंदगियों के बदलने में गिने जाते हैं।
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