अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Patna : राजधानी के बापू टावर में आयोजित ‘भावांजलि धरोहर-2026’ में पहुंचे सीएम सम्राट चौधरी ने कला, संस्कृति और शिक्षा को लेकर अपनी बात रखी। पटना लिटरेरी फेस्टिवल की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में सीएम ने कहा कि जीवन में ज्ञान के साथ-साथ संगीत का होना भी बेहद जरूरी है। संगीत की धुन और ताल न केवल मन को सुकून पहुंचाती हैं, बल्कि यह इंसान की सेहत पर भी अच्छा असर डालती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर संगीत के क्षेत्र में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर कोई आगे आकर काम करना चाहता है, तो बिहार सरकार उसका पूरा सहयोग करेगी।

क्षेत्रीय भाषाओं में होगी प्राथमिक पढ़ाई
सीएम ने बिहार की बोलियों और सांस्कृतिक विरासत पर जोर देते हुए कहा कि भोजपुरी, मैथिली, मगही, अंगिका और वज्जिका जैसी भाषाएं राज्य की असली पहचान हैं। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत अब प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को उनकी क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसका सीधा मकसद यही है कि आने वाली पीढ़ी अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपरा से हमेशा जुड़ी रहे और उसे अपनी मातृभाषा पर गर्व महसूस हो।

एक साल में विक्रमशिला पर काम तेज करेगी सरकार
बिहार के पुराने गौरव को याद करते हुए सीएम ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय इस बात का जीता-जागता सबूत है कि हजारों साल पहले भी हमारी सभ्यता कितनी आगे थी। इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार अगले एक साल में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर तेजी से काम करेगी। इससे न सिर्फ बिहार की पुरानी शैक्षणिक पहचान वापस लौटेगी, बल्कि ज्ञान के क्षेत्र में राज्य की स्थिति और मजबूत होगी।
कार्यक्रम के दौरान सीएम ने मॉस्को से आईं डॉ. श्वेता सिंह उमा का गायन सुना और मशहूर नृत्यांगना संयुक्ता सिन्हा की कथक प्रस्तुति भी देखी। कार्यक्रम में पटना लिटरेरी फेस्टिवल के संस्थापक सचिव खुर्शीद अहमद ने सीएम का स्वागत किया, जबकि अध्यक्ष सत्यजीत ने स्वागत भाषण दिया। इस मौके पर भवन निर्माण और कला-संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार समेत कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
इसे भी पढ़ें : मुजफ्फरपुर में 141 करोड़ का मेगा लेदर क्लस्टर शुरू, सीएम बोले- 2030 से पहले रोकेंगे पलायन


