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Ramgarh : नेमरा गांव की पगडंडियां रविवार को एक अजीब से सन्नाटे और भारी कदमों की आवाज से गूंज रही थीं। जिस आंगन और चौपाल में कभी सीएम हेमंत सोरेन की स्वर्गीय मां रूपी सोरेन की मौजूदगी पूरे गांव को अपनेपन की छांव देती थी, आज वहीं उनकी तस्वीर के सामने सिर झुकाए हजारों आंखें नम थीं। मौका था उनके संस्कार भोज का। मां को खोने की टीस चेहरे पर साफ झलक रही थी, लेकिन अपने निजी गम को भीतर समेटकर सीएम हेमंत सोरेन पूरे दिन हर आने वाले का हाथ थामे खड़े रहे। गांव का बेटा बनकर उन्होंने हर उस शख्स को सहारा दिया, जो इस दुख की घड़ी में उनके घर पहुंचा था।
चौपाल पर पसरा सन्नाटा, यादों में जिंदा रहीं ‘मां’
नेमरा के बुजुर्गों के लिए रूपी सोरेन सिर्फ मुख्यमंत्री की मां नहीं थीं, वे इस पूरे इलाके की अपनी थीं। आंदोलन के दौर से लेकर सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने के सफर में भी उनकी सादगी कभी नहीं बदली। आज जब संस्कार भोज के लिए पंडाल सजा, तो गांव की महिलाएं और बुजुर्ग उनकी पुरानी बातें याद कर भावुक हो उठे। कोई उनके हाथों से मिले भात की बात कर रहा था, तो कोई उनके स्नेह भरे बोल याद कर रहा था। सुबह से ही राज्य के अलग-अलग कोनों से मंत्रियों, सांसदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम ग्रामीणों का जो रेला शुरू हुआ, वह शाम ढलने तक थमा नहीं।

नम आंखों से हर बुजुर्ग के आगे झुका सीएम का सिर
पूरे आयोजन के दौरान सीएम हेमंत सोरेन एक नेता के तौर पर नहीं, बल्कि घर के जिम्मेदार बड़े बेटे के रूप में नजर आए। जब गांव के बुजुर्ग हाथ जोड़कर उनके पास पहुंचे, तो सीएम ने झुककर उनके पैर छुए और ढांढस बंधाया। कई मौकों पर माहौल बेहद भावुक हुआ, लेकिन हेमंत सोरेन ने आंसुओं को पीकर खुद को संभाले रखा ताकि परिवार और गांव के लोगों की हिम्मत न टूटे। उन्होंने पंडाल के एक-एक कोने में जाकर देखा कि दूर से आए किसी मेहमान या ग्रामीण को पानी और भोजन मिलने में कोई असुविधा तो नहीं हो रही है।
हजारों की भीड़ के बीच सहज बना रहा गांव का माहौल
गांव के छोटे से दायरे में आम से लेकर खास तक हजारों लोगों की मौजूदगी किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं थी, लेकिन अनुशासन ऐसा रहा कि कहीं कोई हड़बड़ी नहीं दिखी। गाड़ियों को गांव से पहले ही व्यवस्थित तरीके से पार्क कराया गया था। पुलिस और प्रशासन के जवान भी संवेदनशीलता के साथ लोगों को रास्ता दिखाते रहे। लाउडस्पीकर पर बजती धीमी धुनों और घोषणाओं के बीच पूरा कार्यक्रम बेहद गरिमामयी ढंग से संपन्न हुआ। शाम को जब लोग विदा होने लगे, तो सोरेन परिवार ने हाथ जोड़कर सबका आभार जताया और यह भरोसा भी दिया कि मां के संस्कार और गांव से उनका रिश्ता हमेशा यूं ही बना रहेगा।
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