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Ranchi : राजधानी में नियमों को ताक पर रखकर चल रहे कोचिंग संस्थानों पर अब RMC यानी रांची नगर निगम का हंटर चलने वाला है। छात्रों की सुरक्षा को लेकर निगम प्रशासन ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। नगर आयुक्त की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में साफ कर दिया गया कि अगर तय मानकों का पालन नहीं हुआ, तो कोचिंग सेंटरों को तुरंत सील कर दिया जाएगा। पूर्व में मिले नोटिस के बाद अपनी बात रखने पहुंचे संचालकों को दो टूक सुना दिया गया कि सिर्फ बातों से काम नहीं चलेगा। अगर किसी को संस्थान दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए मोहलत चाहिए, तो उसे बाकायदा नोटराइज्ड शपथ पत्र के साथ निगम में अर्जी लगानी होगी। कोरी जबानी गुहार पर कोई राहत नहीं मिलेगी।
आवासीय नक्शे पर धड़ल्ले से चल रही थी दुकानें
बैठक में जब संस्थानों के दस्तावेजों की पड़ताल हुई, तो कई बड़ी लापरवाहियां खुलकर सामने आईं। ज्यादातर कोचिंग संस्थान ऐसे मकानों में चल रहे हैं जिनके पास स्वीकृत भवन का नक्शा तक नहीं है। जिन चंद संचालकों ने नक्शा दिखाया भी, उनकी चालाकी तुरंत पकड़ में आ गई। उन्होंने नगर निगम से नक्शा तो आवासीय उपयोग के लिए पास कराया था, लेकिन वहां बिना इजाजत धड़ल्ले से व्यावसायिक कोचिंग संस्थान चला रहे थे। नियमों के इस खुले उल्लंघन पर अधिकारियों ने सख्त नाराजगी जताई और साफ किया कि तय कायदों से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा।

आग लगी तो भागने का रास्ता तक नहीं
निरीक्षण और समीक्षा के दौरान सुरक्षा इंतजामों की पोल पूरी तरह खुल गई। कई कोचिंग सेंटरों में छात्र-छात्राओं के वाहनों के लिए पार्किंग की कोई जगह नहीं है, जिससे सड़कों पर जाम की नौबत बनी रहती है। इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह रही कि आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए इमरजेंसी एग्जिट तक मौजूद नहीं थे। कई संस्थानों के पास फायर सेफ्टी से जुड़ा जरूरी एनओसी तक नहीं था। ऐसे में किसी अनहोनी की स्थिति में सैकड़ों बच्चों की जान सांसत में पड़ सकती थी। निगम ने दो टूक कहा कि छात्रों की सुरक्षा सबसे ऊपर है और इससे कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
मौखिक सिफारिशें खारिज, शपथ पत्र पर ही विचार
कार्रवाई के डर से कई संचालकों ने बैठक के दौरान अपनी कोचिंग को दूसरी जगह ले जाने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। इस पर नगर आयुक्त ने कड़े शब्दों में चेताया कि मौखिक अनुरोध का कोई मोल नहीं होगा। राहत तभी संभव है जब संचालक शपथ पत्र देकर यह लिखित गारंटी दें कि वे तय समय में मानकों को पूरा कर लेंगे या संस्थान हटा लेंगे। निगम इन आवेदनों की कानूनी जांच के बाद ही आगे कोई फैसला लेगा। प्रशासन ने सभी संचालकों से अपील की है कि वे फौरन पार्किंग, फायर एनओसी और इमरजेंसी एग्जिट के नियमों का पालन सुनिश्चित करें, वरना सीधी सीलिंग की कार्रवाई झलने को तैयार रहें।
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