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Patna : बिहार के गांवों में अब महिलाओं को घरेलू कलह, दहेज प्रताड़ना या सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के लिए अकेले नहीं जूझना पड़ रहा है। जीविका की पहल से शुरू हुए ‘दीदी अधिकार केंद्र’ आज ग्रामीण महिलाओं के लिए हक, सम्मान और न्याय पाने का बड़ा ठिकाना बन चुके हैं। इन केंद्रों की मदद से अब तक 51 हजार से ज्यादा महिलाएं अपनी उलझनों को सुलझा चुकी हैं। राज्य के सभी 38 जिलों में फिलहाल 260 केंद्र चल रहे हैं, जहां महिलाएं बिना किसी झिझक के अपनी बात रखती हैं और उन्हें कानूनी सलाह से लेकर सरकारी योजनाओं का सीधा फायदा दिलाया जाता है।
दो प्रखंडों के प्रयोग से पूरे राज्य में फैला नेटवर्क
इस मजबूत पहल की शुरुआत महज दो प्रखंडों… पटना और मुजफ्फरपुर से एक छोटे से प्रयोग के तौर पर हुई थी। इसका मकसद था कि गांव की औरतों को उनके अपने माहौल में एक ऐसा मंच मिले, जहां वे घरेलू हिंसा या सामाजिक भेदभाव जैसी समस्याओं पर खुलकर बात कर सकें। प्रयोग इतना सफल रहा कि देखते ही देखते इसे पूरे राज्य में विस्तार दिया गया। आज सभी 38 जिलों में 260 केंद्र काम कर रहे हैं। यहां आने वाली महिलाओं को न केवल जरूरी कानूनी सलाह और मार्गदर्शन दिया जाता है, बल्कि उन्हें मानसिक और सामाजिक संबल भी मिलता है।
सीएनएलयू से मिल रहा कानूनी मार्गदर्शन, 421 प्रखंडों तक पहुंचने की तैयारी
महिलाओं को पेचीदा मामलों में सही कानूनी सलाह मिल सके, इसके लिए पटना स्थित चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (सीएनएलयू) में एक विशेष सहायता केंद्र बनाया गया है। यहां गंभीर मामलों, हिंसा और उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को कानून के जानकारों से सीधी मदद दिलाई जाती है। ग्रामीण विकास विभाग अब इस व्यवस्था को और बड़ा रूप देने जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026 के अंत तक इन केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 421 प्रखंडों तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है, ताकि दूर-दराज की कोई भी महिला मदद से दूर न रहे।
कागजी उलझनों से मुक्ति, सीधे योजनाओं से जोड़ने की पहल
अक्सर देखा जाता है कि जानकारी की कमी या कागजात न बन पाने के कारण ग्रामीण महिलाएं सरकारी सुविधाओं से महरूम रह जाती हैं। दीदी अधिकार केंद्र इस दूरी को पूरी तरह खत्म कर रहे हैं। यहां महिलाओं के जरूरी दस्तावेज तैयार करवाए जा रहे हैं, ताकि उन्हें राशन कार्ड, पेंशन, सरकारी आवास, आधार कार्ड और दिव्यांग कल्याण से जुड़ी योजनाओं का पूरा लाभ बिना किसी रुकावट के मिल सके। इससे महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपने हक के लिए खुद आगे आने लगी हैं।
“महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और सरकारी सुविधाओं तक उनकी पहुंच पक्की करना एक मजबूत बिहार के लिए जरूरी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में शुरू हुई जीविका ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़ा तो किया ही है, साथ ही उन्हें अपने हक, सुरक्षा और सम्मान के लिए आवाज उठाने की हिम्मत भी दी है। दीदी अधिकार केंद्र महिलाओं को अपनी बात रखने, सही सलाह पाने और न्याय की राह पर आगे बढ़ने में मजबूत सहारा बन रहे हैं।”
– श्रवण कुमार, मंत्री, ग्रामीण विकास एवं सूचना एवं जन-संपर्क विभाग, बिहार
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“महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और सरकारी सुविधाओं तक उनकी पहुंच पक्की करना एक मजबूत बिहार के लिए जरूरी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में शुरू हुई जीविका ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़ा तो किया ही है, साथ ही उन्हें अपने हक, सुरक्षा और सम्मान के लिए आवाज उठाने की हिम्मत भी दी है। दीदी अधिकार केंद्र महिलाओं को अपनी बात रखने, सही सलाह पाने और न्याय की राह पर आगे बढ़ने में मजबूत सहारा बन रहे हैं।”