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Ranchi : जिस दफ्तर की चौखट कभी नए सपनों के साथ लांघी थी, तीन-चार दशकों बाद उसी चौखट को पार करते हुए शनिवार को 115 जोड़ी कदम ठिठक गए। CCL मुख्यालय दरभंगा हाउस में फाइलों के पन्नों से ज्यादा भारी वहां मौजूद हर शख्स का दिल था। जिस कुर्सी-मेज पर आधी से ज्यादा उम्र बीत गई, जहां चाय की चुस्कियों के बीच जिंदगी के अनगिनत सुख-दुख बंटे, आज वहां से हमेशा के लिए उठने का वक्त आ चुका था। विदाई के गुलदस्ते हाथों में थे, चेहरे पर फर्ज निभाने का संतोष था, लेकिन नम आंखों में सिर्फ एक ही बात तैर रही थी कि सोमवार की सुबह जब दफ्तर की घंटी बजेगी, तो ये गलियारे उनकी आवाज सुनने के लिए तरस जाएंगे। मौका था 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हुए कर्मियों के विदाई समारोह का, जहां मुख्यालय से 9 और विभिन्न क्षेत्रों से 106 कर्मियों समेत कुल 115 साथियों ने अपनी सेवा से सम्मानपूर्वक विराम लिया।
जब परदे पर चली जिंदगी की रील, तो छलक पड़े आंसू
दरभंगा हाउस के सभागार में जब एक छोटी डॉक्यूमेंट्री फिल्म शुरू हुई, तो पूरा हॉल खामोश हो गया। परदे पर एक-एक कर वे चेहरे आ रहे थे, जो कल तक गलियारों में जिम्मेदारियां निभाते और चाय के साथ काम की बातें करते दिखते थे। उन्होंने स्क्रीन पर अपनी पहली जॉइनिंग का दिन, शुरुआती संघर्ष, साथियों के साथ बिताए हल्के-फुल्के पल और CCL को अपनी आंखों के सामने आगे बढ़ते देखने का सफर साझा किया। कई कर्मचारियों की आंखें यह देखकर छलक पड़ीं कि जिस कुर्सी और मेज के साथ उन्होंने अपनी आधी से ज्यादा जिंदगी गुजार दी, सोमवार से वहां कोई और बैठेगा।
मुख्यालय से विदा लेने वालों में गांधीनगर अस्पताल में मरीजों की सेवा करने वाले डॉ. निखिल प्रसाद सिन्हा से लेकर वित्त का हिसाब-किताब रखने वाले मुख्य प्रबंधक संजय कुमार शामिल थे। वहीं प्रशासन विभाग के काशीनाथ यादव, कल्याण विभाग के कंचन पाटीदार, गांधीनगर अस्पताल के अब्दुल कादिर, वित्त विभाग के जोयजीत बोस, लेखा लिपिक ज्योत्सना झा, राजभाषा विभाग में हर जरूरी फाइल पहुंचाने वाले कैलाश उरांव और गांधीनगर अस्पताल के गलुवा भी अपने साथियों के बीच घिरे नजर आए।
जिंदगी का नया मोड़… काम की भागदौड़ से परिवार की छांव तक
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे CCL के निदेशक (वित्त) पवन कुमार मिश्रा ने बेहद आत्मीय अंदाज में कहा कि किसी भी दफ्तर की सबसे बड़ी ताकत वहां की इमारतें नहीं, बल्कि उसमें काम करने वाले लोग होते हैं। इन साथियों ने अपने पसीने और निष्ठा से CCL की बुनियाद को मजबूत किया है। कंपनी उनके योगदान को कभी नहीं भूल सकती।
वहीं निदेशक (मानव संसाधन) हर्ष नाथ मिश्र ने कहा कि रिटायरमेंट जिंदगी का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। अब तक इन लोगों ने कंपनी और काम को सबसे आगे रखा, लेकिन अब वह समय आया है जब वे अपने परिवार, बच्चों और नाती-पोतों के साथ खुलकर वक्त बिताएं। उन्होंने कहा कि दफ्तर के दरवाजों से बाहर जाने के बाद भी यह पारिवारिक रिश्ता हमेशा बना रहेगा।
शॉल ओढ़ाकर दी गई विदाई, अपनों के साथ संजोए आखिरी पल
समारोह के अंतिम पलों में जब सेवानिवृत्त कर्मियों को मंच पर बुलाकर शॉल, फूलों का गुलदस्ता और स्मृति चिह्न दिया गया, तो सभागार देर तक तालियों से गूंजता रहा। इस दौरान कर्मियों के परिजन भी साथ खड़े थे, जिनके चेहरों पर अपने बड़ों की बेदाग और लंबी सेवा पर गर्व साफ झलक रहा था। विदाई के बाद जूनियर कर्मचारियों ने अपने सीनियर्स के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और गले लगकर भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। दफ्तर से घर लौटते वक्त हाथ में मिले सम्मान के साथ हर किसी की जुबान पर बस यही था कि कंपनी छूट रही है, लेकिन CCL परिवार का यह अपनापन ताउम्र याद रहेगा।
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