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Ranchi : सुबह के वक्त रांची की हल्की ठंड और सीसीएल मुख्यालय के गंगोत्री कन्वेंशन सेंटर परिसर में गूंजती देशभक्ति की धुनें। रोजमर्रा की भागदौड़, फाइलों के अंबार और खदानों के उत्पादन के गणित से इतर शनिवार की सुबह यहां का माहौल बिल्कुल जुदा था। मौका था देश को एक सूत्र में पिरोने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती का। जैसे ही वंदे मातरम् और कोल इंडिया गीत की पंक्तियां हवा में घुलीं, पूरा परिसर एक अलग ही ऊर्जा से भर उठा। बड़े साहब से लेकर दफ्तर का काम संभालने वाले आम कर्मचारी तक, सब कतार में खड़े होकर सरदार पटेल की तस्वीर पर फूल चढ़ा रहे थे और एक मजबूत भारत के शिल्पकार को दिल से याद कर रहे थे।
जब एक आवाज में गूंजी देश की अखंडता की शपथ
पुष्पांजलि के बाद माहौल में एक ठहराव आया और फिर मंच से निदेशक (मानव संसाधन) हर्ष नाथ मिश्र ने माइक संभाला। उन्होंने वहां मौजूद हर अधिकारी और कर्मचारी को अपने साथ दोहराने को कहा। कुछ ही पलों में पूरा कन्वेंशन सेंटर परिसर एक सामूहिक आवाज से गूंज उठा। सबने एक साथ हाथ आगे बढ़ाकर देश की एकता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखने का संकल्प लिया। शपथ की हर पंक्ति इस बात का अहसास करा रही थी कि सीमा पर तैनात जवान ही नहीं, बल्कि दफ्तरों और खदानों में पसीना बहाने वाला हर नागरिक भी देश को मजबूत बनाने की इस कड़ी का उतना ही अहम हिस्सा है।

सरदार के विचार आज भी दिखाते हैं आगे बढ़ने का रास्ता
समारोह को आगे बढ़ाते हुए निदेशक (वित्त) पवन कुमार मिश्रा ने जब बोलना शुरू किया, तो उन्होंने सरदार पटेल की सादगी और उनके फौलादी इरादों को सीधे आज के दौर से जोड़ा। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल सिर्फ इतिहास का एक पन्ना नहीं हैं, बल्कि वे एक ऐसी सोच हैं जो हमें हर मुश्किल से पार पाना सिखाती है। आजादी के समय सैकड़ों बिखरी हुई रियासतों को बिना किसी टकराव के एक देश बना देना कोई मामूली बात नहीं थी। आज जब हम कोयला उद्योग में काम करते हैं या देश के विकास की बात करते हैं, तो हमें उसी एकजुटता की जरूरत है। उन्होंने सभी से कहा कि आपसी तालमेल और टीम वर्क ही वह ताकत है, जिससे कोई भी संस्थान या देश आगे बढ़ता है। मंच पर निदेशक (योजना एवं परियोजना) अनुप हंजुरा समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे और सबकी बातों का लब्बोलुआब यही था कि सरदार के आदर्शों को सिर्फ भाषणों में नहीं, बल्कि अपने रोज के काम में उतारना होगा।
सड़कों पर उतरे कदम, एकता मार्च ने बांधा समां
संबोधन खत्म होते ही माहौल में एक नया उत्साह दिखा। तीनों निदेशकों की अगुवाई में जब एकता मार्च शुरू हुआ, तो देखते ही देखते सैकड़ों कर्मचारियों का हुजूम उसमें शामिल हो गया। कोई अफसर था तो कोई कर्मचारी, लेकिन उस वक्त सबके कदम एक ही ताल पर आगे बढ़ रहे थे। परिसर की सड़कों से गुजरते इस मार्च ने यह साफ संदेश दिया कि जब मकसद बड़ा हो और दिल में देश के लिए जज्बा हो, तो सारे फासले खुद-ब-खुद मिट जाते हैं। यह पदयात्रा केवल एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि आपसी भाईचारे और साथ मिलकर आगे बढ़ने का जीवंत नजारा थी। मार्च के समापन पर जब सबने मिलकर सीना तानकर राष्ट्रगान गाया, तो इस सादे मगर गरिमामय आयोजन ने हर किसी के मन में देशभक्ति का एक गहरा असर छोड़ दिया।
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