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Pawan Thakur
पटना के एक सरकारी आवासीय परिसर में रात के दो बजे भी सन्नाटे के बीच पन्नों के पलटने की धीमी आवाजें गूंजती रहती हैं। मेज पर रखी चाय की ठंडी प्याली, सामने खुली किताबों का ढेर और आंखों में अपने पूरे परिवार की तकदीर बदलने की चमक। यह नजारा उन आम कमरों का नहीं है जहां महंगी फीस देकर छात्र रहते हैं, बल्कि यह सम्राट सरकार की राज्य कोचिंग योजना का ठिकाना है। यहां रहकर पढ़ रहे सैकड़ों नौजवानों के कंधों से घर के आर्थिक तंगी का भारी बोझ उतर चुका है। कल तक जिन होनहारों के सपने पिता की छोटी आमदनी और महंगे कोचिंग संस्थानों के विज्ञापनों के आगे दम तोड़ रहे थे, आज वही छात्र BPSC, JEE, NEET और दरोगा भर्ती जैसी मुश्किल परीक्षाओं की कतार में सबसे आगे खड़े हैं। सीएम सम्राट चौधरी का स्पष्ट मानना है कि प्रतिभा किसी की जागीर नहीं होती और केवल पैसों के अभाव में किसी भी मेधावी छात्र का सपना टूटना नहीं चाहिए। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए राज्य सरकार की मुफ्त कोचिंग योजना आज युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बन चुकी है। यहां छात्र-छात्राओं को न तो कमरे के किराये की फिक्र है और न ही किताबों के बिल का बोझ।
एक ही छत के नीचे पूरी दुनिया, 24 घंटे पढ़ाई का सुरक्षित माहौल
सीएम सम्राट चौधरी के निर्देशों के तहत इस व्यवस्था को इस तरह ढाला गया है कि अभ्यर्थियों का एक पल भी गैर-जरूरी चिंताओं में बर्बाद न हो। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले हर छात्र की सबसे बड़ी मुश्किल होती है रहने-खाने का इंतजाम और सही माहौल। इस योजना ने छात्रों की इसी सबसे बड़ी चिंता को पूरी तरह खत्म कर दिया है। छात्रों के लिए एक ही जगह रहने और खाने का मुकम्मल इंतजाम किया गया है, ताकि उनका ध्यान सिर्फ अपनी पढ़ाई पर रहे। नए पैटर्न और बदले हुए सिलेबस के हिसाब से विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए नोट्स और किताबें मुफ्त दी जाती हैं। परिसर में चौबीस घंटे खुली रहने वाली लाइब्रेरी बनाई गई है, जहां वाई-फाई की सुविधा के साथ-साथ देश के नामी संस्थानों की अध्ययन सामग्री और प्रतियोगी पत्रिकाएं हर वक्त मौजूद रहती हैं। जब चाहे छात्र आकर पढ़ सकते हैं और अपनी शंकाएं दूर कर सकते हैं।
जब बड़े अफसरों ने क्लास में आकर बढ़ाया हौसला
इस पूरे अभियान की सबसे अनूठी कड़ी वह है, जहां सरकार के आला प्रशासनिक अधिकारी खुद क्लासरूम में पहुंचकर छात्रों के मार्गदर्शक बनते हैं। तैयारी कर रही नरगिस बताती हैं कि जब बड़े-बड़े अधिकारी खुद आकर सामने बैठते हैं, तो ऐसा लगता है कि लक्ष्य अब ज्यादा दूर नहीं है। वे खुलकर बताते हैं कि परीक्षा की तैयारी में किन बातों का ध्यान रखना है और कौन सी गलतियां बिल्कुल नहीं करनी हैं। छात्रों को सीधे सवाल पूछने का मौका मिलता है, जिससे उनका हौसला कई गुना बढ़ जाता है। वहीं मोहम्मद इरशाद आलम कहते हैं कि अनुभवी शिक्षक हर विषय को इतनी बारीकी से समझाते हैं कि कठिन से कठिन सवाल भी आसान लगने लगते हैं। अब घर वालों से हर महीने फीस और राशन के पैसे मांगने का तनाव खत्म हो गया है और पूरा ध्यान सिर्फ रिजल्ट पर है।

हर जिले तक पहुंचेगा यह मॉडल, गांव के बच्चे भी बनेंगे अफसर
मेहनत और सही मार्गदर्शन का यह तालमेल आंकड़ों में भी साफ दिखाई दे रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में यहां पढ़ने वाले 545 छात्रों ने विभिन्न परीक्षाओं में परचम लहराया, तो वहीं 2025-26 के सत्र में 498 अभ्यर्थियों ने सफलता का स्वाद चखा। जो छात्र पहले कभी संघ लोक सेवा आयोग, बिहार लोक सेवा आयोग या दरोगा भर्ती की पीटी, मेन्स या इंटरव्यू तक पहुंचे हैं, उन्हें यहां दाखिले में प्राथमिकता मिलती है ताकि वे अंतिम पायदान पर न चूकें। राजधानी में मिली इस शानदार कामयाबी के बाद अब सरकार इस योजना को राज्य के हर जिले तक ले जाने की तैयारी में है। इसका सीधा फायदा उन दूर-दराज के मेधावी छात्र-छात्राओं को मिलेगा जो पैसे की कमी के चलते पटना नहीं आ पाते थे। अब जिले में ही रहकर उनके सपनों को नई उड़ान मिलेगी।
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