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New Delhi/Patna : बिहार अब लालटेन और बिजली किल्लत वाले पुराने दौर से बहुत आगे निकल चुका है। राज्य अब देश भर के बड़े उद्योगपतियों को बुलाकर कह रहा है कि आइए और बिहार में ग्रीन एनर्जी का कारखाना लगाइए, सरकार आपकी पूरी मदद करेगी। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित रिन्यूएबल एनर्जी समिट में बिहार सरकार ने अपना बड़ा विजन पेश किया है। राज्य के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने उद्योग जगत के दिग्गजों को खुला न्योता देते हुए साफ कहा कि बिहार अब तेजी से बढ़ रहा है और यहां पैसा लगाने वाली कंपनियों को बढ़िया मुनाफा मिलेगा। राज्य में कुल मिलाकर 2 लाख 57 हजार 316 करोड़ रुपये के निवेश की तैयारी है, जिससे आने वाले दिनों में न सिर्फ बिजली का ढांचा मजबूत होगा बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों की भरमार भी होगी।
सम्मेलन में बिहार की ओर से पेश किए गए आंकड़ों ने वहां मौजूद देश-विदेश के प्रतिनिधियों को चौंका दिया। वर्ष 2005 में जहां पूरे राज्य की बिजली मांग महज 700 मेगावाट के आसपास सिमटी रहती थी, वहीं आज यह आंकड़ा बढ़कर 10 हजार मेगावाट के पार पहुंच चुका है। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सूबे के हर घर तक बिजली पहुंचा दी गई है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि बिहार का सूर्य देव से नाता सदियों पुराना है और छठ महापर्व इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। ऐसे में सौर ऊर्जा को अपनाना बिहार के लोगों के स्वभाव में शामिल है। सरकार अब पीएम कुसुम और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसी योजनाओं को जमीन पर तेजी से उतारकर बिहार को देश के प्रमुख ग्रीन एनर्जी उत्पादक राज्यों में शामिल करने की तैयारी में जुटी है।
बिजली वितरण में सुधार और 25 हजार मेगावाट की भविष्य की तैयारी
बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के सीएमडी और ऊर्जा सचिव अजय यादव ने बैठक में राज्य की पूरी रूपरेखा पेश की। उन्होंने बताया कि अगले दस सालों में राज्य की बिजली खपत बढ़कर 25 हजार मेगावाट तक पहुंच जाएगी। इस भारी भरकम मांग को पूरा करने के लिए सिर्फ पारंपरिक बिजली पर निर्भर नहीं रहा जा सकता, इसलिए बड़े पैमाने पर सौर और बैटरी बैकअप प्रोजेक्ट्स लगाए जा रहे हैं। लखीसराय के कजरा में 301 मेगावाट का सौर ऊर्जा प्लांट और 523 मेगावाट आवर की बैटरी स्टोरेज प्रणाली पर काम चल रहा है। इसके साथ ही औरंगाबाद में 150 मेगावाट का नया सोलर पार्क तैयार करने की योजना है। सरकारी दफ्तरों की छतों पर भी सोलर पैनल लगाने का काम तेजी से चल रहा है।
सबसे बड़ी बात यह रही कि बिहार की दोनों बिजली वितरण कंपनियां, यानी नॉर्थ बिहार और साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी, अब मुनाफे में चल रही हैं। देश भर में जहां बिजली कंपनियों का लाइन लॉस बड़ी सिरदर्दी बना रहता है, वहीं बिहार में यह नुकसान राष्ट्रीय औसत से भी नीचे आ चुका है। राज्य में अब तक करीब एक करोड़ स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं, जिसकी वजह से बिजली बिलों की वसूली लगभग सौ फीसदी तक पहुंच गई है। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल 78 हजार 400 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स अलग-अलग चरणों में चल रहे हैं। राज्य की नई नीतियों के तहत साल 2030 तक 24 गीगावाट अक्षय ऊर्जा और 6 गीगावाट आवर ऊर्जा भंडारण का बड़ा लक्ष्य तय किया गया है।
रिसर्च, ट्रेनिंग और टेक्नोलॉजी के लिए तीन बड़े करार
ग्रीन एनर्जी के मिशन को रफ्तार देने के लिए समिट के दौरान तीन अहम समझौतों पर दस्तखत किए गए। पहला करार बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी और भोपाल के मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के बीच हुआ। इसके तहत दोनों संस्थान मिलकर सौर ऊर्जा की बेहतर प्लानिंग और ग्रिड मैनेजमेंट पर काम करेंगे।

दूसरा त्रिपक्षीय समझौता पावर सेक्टर स्किल काउंसिल, बिहार पावर होल्डिंग कंपनी और गौरीचक स्थित बिहार पावर ट्रेनिंग मैनेजमेंट सोसाइटी के बीच हुआ। इसका मकसद राज्य के युवाओं और तकनीकी कर्मचारियों को नई तकनीकों में माहिर बनाना है, ताकि सोलर प्लांट और सब-स्टेशनों के संचालन में स्थानीय हुनर का इस्तेमाल हो सके।

तीसरा समझौता देश के प्रतिष्ठित संस्थान टेरी यानी द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट के साथ हुआ। टेरी तकनीकी स्तर पर बिहार को सहयोग देगा और स्वच्छ ऊर्जा के नए विकल्पों पर रिसर्च को बढ़ावा देगा। इन समझौतों से यह साफ हो गया है कि बिहार सरकार सिर्फ सोलर पैनल लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि राज्य में तकनीकी समझ और प्रशिक्षित मैनपावर की पूरी फौज तैयार करने के मूड में है।

छतों पर सोलर प्लेट और स्टोरेज पर सबसे ज्यादा जोर
समिट के दौरान आयोजित पैनल चर्चा में देश की दिग्गज कंपनियों के प्रमुख शामिल हुए। अडानी ग्रीन एनर्जी, टाटा पावर, एशियन डेवलपमेंट बैंक और जर्मन बायोगैस एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने बिहार की नीतियों पर मंथन किया। इस चर्चा में ऊर्जा सचिव ने बताया कि अगले दो से पांच वर्षों में राज्य का फोकस तीन मुख्य चीजों पर रहेगा, जिनमें विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा, बड़ी बैटरियां लगाना और सोलर उपकरणों का निर्माण शामिल है। सरकार की योजना है कि पीएम कुसुम के तहत 2700 मेगावाट क्षमता बढ़ाई जाए, सरकारी भवनों से 500 मेगावाट बिजली निकाली जाए और करीब 15 लाख आम परिवारों की छतों पर सोलर रूफटॉप लगाए जाएं।

नदियों, बड़े जलाशयों और खाली पड़ी जमीनों पर भी फ्लोटिंग सोलर पैनल लगाने पर विचार चल रहा है। इसके अलावा ग्रीन हाइड्रोजन और पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स के लिए भी जमीन तैयार की जा रही है। निजी कंपनियों ने भी माना कि बिहार में नियम-कानून पहले से काफी आसान हुए हैं और सिंगल विंडो सिस्टम की वजह से प्रोजेक्ट्स लगाना अब पहले जितना पेचीदा नहीं रहा। कुल मिलाकर दिल्ली के मंच से बिहार ने साफ संदेश दे दिया है कि वह केवल बिजली खरीदने वाला राज्य नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में देश को हरित ऊर्जा बेचने की हैसियत हासिल करेगा।
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