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नई दिल्ली| देश में संक्रमण के मामलों की संख्या दो करोड़ 26 लाख के पार जा चुकी है| हालांकि कई जानकारों का मामला है कि असली संख्या दस गुना ज्यादा हो सकती है| इस बीच लोग अस्पताल, ऑक्सीजन और दवाइयों के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं| श्मशान घाटों के बार शवों की लंबी लाइनों वाली डरावनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर हो रही हैं|
इस सबके बीच लोगों के बीच ऐसी बातें भी साझा हो रही हैं कि शरीर पर गाय के गोबर के लेप से कोविड-19 नहीं होता| गुजरात में कुछ लोग इसी उम्मीद में अपने शरीर पर गाय के गोबर और पेशाब का लेप करने के लिए गोशालाओं में पहुंच रहे हैं| उन्हें लगता है कि इससे उनके शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ेगी और कोरोना वायरस से छुटकारा मिलेगा|
लेकिन देश और दुनिया के कई डॉक्टर बार-बार कहते रहे हैं कि इस तरह की वैकल्पिक थेरेपी के कोविड-19 पर असर के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं| कई डॉक्टरों का कहना है कि इससे लोगों में अपनी इम्यूनिटी को लेकर भ्रम हो सकता है और कई तरह की स्वास्थ्यगत समस्याएं पैदा हो सकती हैं| इंडियन मेडिकल असोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जे ए जयलाल कहते हैं, “ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि गाय के गोबर या पेशाब से कोविड-19 के खिलाफ इम्यूनिटी बढ़ती है| यह बस आस्था का मामला है| ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल करने या सेवन करने से स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है| जानवरों से कई अन्य बीमारियां भी इन्सानों को हो सकती हैं.”
इसके साथ ही ऐसी भी आशंकाएं जताई जा रही हैं कि इस तरह की थेरेपी से कोरोना वायरस और ज्यादा फैल सकता है क्योंकि इसके लिए लोग समूहों में जमा होते हैं|

