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News Samvad : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट यानी 0.50% की कटौती की है, जिससे बैंकों की लोन देने की लागत में कमी आई है। इस निर्णय का सीधा लाभ होम लोन लेने वालों को मिल सकता है, क्योंकि जब बैंक रेपो रेट घटाते हैं, तो आमतौर पर होम लोन पर ब्याज दरें भी कम होती हैं। ऐसे में यदि आपने घर खरीदा है या खरीदने का विचार कर रहे हैं, तो EMI कम करने का यह एक सुनहरा अवसर हो सकता है।
EMI में कमी के फायदे
EMI घटाने का मतलब केवल महीने की किस्त कम करना नहीं है, बल्कि इससे आप लंबे समय में लाखों रुपये के ब्याज की बचत भी कर सकते हैं। इसके लिए कुछ स्मार्ट फाइनेंशियल फैसले लेने की आवश्यकता है।
लोन ट्रांसफर करें : यदि आपके मौजूदा लोन पर ब्याज दर अधिक है, तो उसे किसी अन्य बैंक या फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन में ट्रांसफर करना समझदारी भरा कदम हो सकता है। कई बैंक इस समय 8.75% से शुरू होने वाली कम दरों पर बैलेंस ट्रांसफर ऑफर कर रहे हैं। ट्रांसफर से पहले प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्जेस की जांच करना न भूलें।
पार्ट-पेमेंट करें : यदि आपको बोनस, टैक्स रिफंड या बचत से एकमुश्त राशि मिलती है, तो उसका उपयोग होम लोन के हिस्से का भुगतान करने में करें। इससे आपका मूलधन कम होगा और भविष्य की EMI भी घटेगी। फ्लोटिंग रेट वाले लोन में आमतौर पर प्रीपेमेंट पेनल्टी नहीं लगती।
टेनर बढ़ाएं : यदि मौजूदा EMI आपकी मासिक आय पर भारी पड़ रही है, तो बैंक से बात करके लोन की अवधि बढ़वा सकते हैं। इससे EMI कम हो जाएगी, लेकिन ध्यान रखें कि इससे कुल ब्याज भुगतान बढ़ जाएगा। यह विकल्प तब चुनें जब कैश फ्लो की दिक्कत हो।
EMI बढ़ाने पर विचार करें : यदि आपकी इनकम बढ़ी है या भविष्य में रेगुलर इनकम ग्रोथ की उम्मीद है, तो EMI की राशि थोड़ी बढ़ाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इससे लोन जल्दी खत्म होगा और कुल ब्याज भी कम देना पड़ेगा।
स्टेप-अप EMI प्लान अपनाएं : कुछ बैंक स्टेप-अप EMI प्लान ऑफर करते हैं, जिसमें शुरुआत में EMI कम होती है और समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ती है। यह योजना उन लोगों के लिए फायदेमंद होती है जिन्हें शुरुआत में सीमित आय होती है लेकिन भविष्य में इनकम ग्रोथ की संभावना रहती है।
इन उपायों को अपनाकर, होम लोन लेने वाले लोग अपनी EMI को कम कर सकते हैं और आर्थिक रूप से अधिक मजबूत बन सकते हैं।
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