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Ramgarh (Dharmendra Pradhan, Bhurkunda) : सुबह की हल्की धूप में देवरिया बरगांवा का पंचायत भवन गूंज उठा। वहां जमा हुए रैयत केवल जमीन के दावों को लेकर नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व और मेहनत की पहचान के लिए आए थे। लंबे समय से खाता संख्या 06, 17, 48 सहित अन्य खाता भूमि पर फर्जी दावे किए जा रहे थे। अपने परिवार की जमींदारी को लेकर चिंतित सिकंदर मुर्मू “हमारी मेहनत और हमारी जमीन को कोई गलत तरीके से हड़प नहीं सकता।”
फर्जी दस्तावेज और रैयतों की बेचैनी
बैठक में रैयतों ने बताया कि कुछ लोग फर्जी वंशावली तैयार कर उनके खातों पर अवैध दावा कर रहे हैं। यह सिर्फ जमीन का सवाल नहीं है, बल्कि उनके परिवार की पहचान और पीढ़ियों की मेहनत का मामला है। लालदेव मुर्मू कहते हैं, “जब अपने खाता में किसी और का नाम देखकर दिल धड़कता है, तो समझ आता है कि यह लड़ाई सिर्फ कागजों की नहीं, इंसानियत की है।”
न्याय की उम्मीद
रैयतों ने अंचलाधिकारी पतरातू और रामगढ़ डीसी से अपील की कि उनकी जमीन की निष्पक्ष जांच कराई जाए और फर्जी दावों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो। मोतीलाल मांझी ने कहा, “हम सब मिलकर न्याय की मांग करेंगे, ताकि भविष्य में कोई भी सही रैयत की जमीन पर कब्जा न कर सके।”
एकजुटता की ताकत
बैठक में मौजूद रैयतों का कहना था कि केवल विरोध करने से काम नहीं चलेगा। सिकंदर टुडू और अरविंद टुडू जैसे युवा रैयत भी अपने बुजुर्गों के साथ खड़े हैं। यह संघर्ष सिर्फ जमीन के लिए नहीं, बल्कि अपने समुदाय के भविष्य और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए है।
आगे की योजना
सभी रैयत तय कर चुके हैं कि वे जल्द ही उपायुक्त और अंचल अधिकारी से मिलेंगे और न्याय की मांग करेंगे। यह सिर्फ प्रशासन से अपील नहीं, बल्कि एक मजबूत संदेश है कि जब सही रैयत एकजुट होते हैं, तो कोई भी फर्जी दस्तावेज उनके हक को छीन नहीं सकता।
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