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Home » खुले नाले ने छीनी मासूम की जान, सिस्टम की संवेदना बनकर पहुंचे डालसा सचिव
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खुले नाले ने छीनी मासूम की जान, सिस्टम की संवेदना बनकर पहुंचे डालसा सचिव

January 21, 2026No Comments4 Mins Read
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डालसा
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Ranchi : राजधानी रांची के कांटाटोली इलाके में खुले नाले में डूबकर दो साल के मासूम फरहान की मौत के बाद उसके परिवार के लिए सबसे पहले सहारा बनकर सामने आए डालसा सचिव राकेश रौशन। अखबारों में खबर प्रकाशित होते ही उन्होंने बिना देर किए एक टीम गठित की और खुद पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर न केवल उन्हें ढांढस बंधाया, बल्कि हर संभव सरकारी और कानूनी मदद का भरोसा भी दिलाया।

न्यायिक निर्देश पर त्वरित कार्रवाई

झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के सह कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजित नारायण प्रसाद के निर्देश और सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना के मार्गदर्शन में न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 के नेतृत्व में डालसा रांची ने इस मामले में तुरंत संज्ञान लिया। डालसा सचिव राकेश रौशन की देखरेख में गठित टीम में एलएडीसी सदस्य सौरभ कुमार पांडेय, मोनु कुमार और पीएलवी लता कुमारी शामिल थे।

पीड़ित परिवार से मिलकर जाना दर्द

टीम कांटाटोली स्थित मौलाना आजाद कॉलोनी रोड नंबर 07 पहुंची, जहां फरहान अपने माता-पिता के साथ रहता था। उन्होंने देखा कि वह गली आज भी खामोश है। घर के आंगन में बिखरे छोटे-छोटे खिलौने अब भी वहीं पड़े हैं, लेकिन उन्हें उठाने वाला नन्हा हाथ अब कहीं नहीं। दो साल का मासूम फरहान, जिसकी हंसी से घर गुलजार रहता था, एक खुले नाले में गिरकर हमेशा के लिए खामोश हो गया था।

खेलते-खेलते बुझ गया एक नन्हा जीवन

डालसा सचिव ने बच्चे की मां निखत प्रवीण और पिता मो. अरशद से बात कर पूरी घटना की जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि फरहान रोज की तरह अपने घर के पास खाली मैदान में खेल रहा था। घर से कुछ ही कदम की दूरी पर खुला नाला था, जिस पर न कोई घेराबंदी थी, न कोई चेतावनी। खेलते-खेलते कब वह नाले के पास पहुंच गया, किसी को पता नहीं चला। कुछ ही पलों में परिवार की दुनिया उजड़ गई। मां निखत प्रवीण की आंखें अब भी अपने बेटे को ढूंढती हैं। वह बार-बार उसी जगह देखती हैं, जहां से फरहान आखिरी बार खेलते हुए गया था। पिता मो. अरशद की आवाज भर्रा जाती है जब वह कहते हैं, “अगर वहां नाला ढंका होता, तो आज मेरा बेटा मेरे पास होता।”

चार भाइयों में तीसरा था फरहान

फरहान अपने माता-पिता की चार संतानों में तीसरा था। बड़ा भाई राशिद सात साल का है और पास के स्कूल में पढ़ता है। अरहम चार साल का है और सबसे छोटा हामिद अभी सात महीने का है। एक कमरे के पक्के घर में रहने वाला यह परिवार बेहद साधारण जिंदगी जीता है।

माली हालत भी ठीक नहीं

पिता मो. अरशद एक निजी मोटर कंपनी में नौकरी करते हैं। उनकी माली हालत बहुत बढ़िया नहीं है। आमदनी सीमित है और परिवार सिर्फ राशन कार्ड के सहारे गुजर-बसर कर रहा है। उन्हें किसी अन्य सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा।

“अब किसी और का बच्चा न मरे”

टीम ने घटनास्थल का जायजा भी किया। पाया गया कि पीड़ित परिवार का घर नाले से बिल्कुल सटा हुआ है और उसके पास खुला मैदान है, जहां बच्चे अक्सर खेलते हैं। घटनास्थल पर खड़े होकर डालसा सचिव राकेश रौशन ने कहा कि यह केवल एक परिवार का दर्द नहीं है, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है। उन्होंने संबंधित विभागों से बात कर नाले की जल्द घेराबंदी कराने का भरोसा दिया। उन्होंने परिवार को आश्वासन दिया कि सरकारी योजनाओं से उन्हें जोड़ा जाएगा और हर संभव कानूनी मदद दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस दुख की घड़ी में पीड़ित परिवार को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।

टूटी हुई मां की एक ही मांग

फरहान की मां बस इतना कहती हैं, “मेरा बेटा तो वापस नहीं आएगा, लेकिन किसी और मां की गोद उजड़ने से बच जाए, यही चाहती हूं।”

एक तरफ जहां फरहान की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है, वहीं डालसा सचिव और उनकी टीम की त्वरित पहल ने पीड़ित परिवार को यह भरोसा जरूर दिया है कि दुख की इस घड़ी में सिस्टम पूरी तरह से उनके साथ खड़ा है।

इसे भी पढ़ें : रांची की सड़क पर तड़पती एक जिंदगी, डालसा सचिव बने सहारा

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