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Patna : सोमवार की शाम पटना का पाटलिपुत्र जंक्शन आम दिनों जैसा नहीं था। शंख की ध्वनि, डमरू की थाप और ‘हर हर महादेव’ के गूंजते जयकारे थे। मौका था ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के तहत बिहार से गुजरात के सोमनाथ मंदिर के लिए रवाना होने वाली विशेष ट्रेन को विदा करने का। पूरे बिहार से आए 1150 श्रद्धालुओं के चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। एक ऐसी यात्रा पर जाने की खुशी, जो सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि बिहार के आत्मसम्मान और सांस्कृतिक गौरव से जुड़ी है।
सीएम सम्राट चौधरी ने जैसे ही इस विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाई, पूरा स्टेशन परिसर तालियों और जयकारों से गूंज उठा। लेकिन ट्रेन खुलने से ठीक पहले एक बेहद भावुक और सुंदर नजारा देखने को मिला। सीएम सम्राट चौधरी खुद ट्रेन की बोगियों के भीतर गए। उन्होंने बुजुर्ग श्रद्धालुओं के पैर छुए, उनका आशीर्वाद लिया और एक-एक करके यात्रियों से पूछा, “ट्रेन में कोई दिक्कत तो नहीं है ना? खाने-पीने और रहने का इंतजाम कैसा है?” मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर कई बुजुर्ग महिला श्रद्धालुओं की आंखें खुशी से भर आईं।

एक हाथ में कलश, दूसरे में ध्वज… यह है नए बिहार का संदेश
यात्रा की शुरुआत बेहद पारंपरिक और भव्य तरीके से हुई। दीप जलाकर और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मुख्यमंत्री ने बिहार की जनता की ओर से श्रद्धालु शोभा सिंह को एक पवित्र कलश और अजीत कुमार को एक बड़ा सांस्कृतिक ध्वज सौंपा। इन प्रतीकों को सौंपते हुए मुख्यमंत्री ने भावुक होकर कहा, “यह सिर्फ एक कपड़ा या तांबे का बर्तन नहीं है। यह हमारे बिहार की अटूट आस्था, स्वाभिमान और समृद्धि का प्रतीक है। यह ट्रेन देश के कई राज्यों से होकर गुजरेगी। मेरी आप सभी श्रद्धालुओं से यही गुजारिश है कि जहां-जहां से आपकी यह ट्रेन गुजरे, वहां-वहां आप बिहार की इस महान सांस्कृतिक विरासत और स्वाभिमान का संदेश फैलाते हुए जाएं।”


नालंदा से सोमनाथ तक… इतिहास के जख्मों पर गौरव का मरहम
सीएम सम्राट चौधरी ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को गर्व से भर दिया। उन्होंने कहा, “आज से करीब एक हजार साल पहले विदेशी आक्रांताओं ने हमारे सोमनाथ मंदिर को लूटा और तहस-नहस किया। उसी दौर में हमारे ज्ञान के प्रतीक नालंदा विश्वविद्यालय को भी जलाकर राख कर दिया गया था। लेकिन हम रुकने वाले समाज नहीं हैं।”
उन्होंने याद दिलाया कि 75 साल पहले जब सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ, तो उसमें बिहार के माटी के लाल और देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद शामिल हुए थे। आज का दौर देखिए, एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मिलकर नालंदा विश्वविद्यालय को फिर से जीवित कर दिया है, तो दूसरी तरफ बिहार का यह जत्था सोमनाथ जा रहा है। यह यात्रा दिखाती है कि बिहार अपने गौरवशाली इतिहास को फिर से पाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

सोमनाथ के साथ काशी विश्वनाथ का भी आशीर्वाद
सीएम सम्राट चौधरी ने श्रद्धालुओं से एक खास अपील भी की। उन्होंने कहा कि जब आप सोमनाथ जा ही रहे हैं, तो रास्ते में बाबा काशी विश्वनाथ के दरबार में भी हाजिरी जरूर लगाइएगा। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “भगवान सोमनाथ के आशीर्वाद से आज गुजरात और देश तरक्की की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। आप सभी बाबा विश्वनाथ और सोमनाथ से यही प्रार्थना करिएगा कि हमारा बिहार भी विकास, सुख-शांति और समृद्धि के नए शिखर पर पहुंचे।”
विदाई की वो खूबसूरत घड़ी
जब ट्रेन धीरे-धीरे प्लेटफॉर्म से आगे बढ़ने लगी, तो खिड़कियों से श्रद्धालुओं ने हाथ हिलाकर सबका अभिवादन किया। इस मौके पर कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। स्टेशन पर उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव समेत कई बड़े नेता और अधिकारी मौजूद रहे, जो ट्रेन के ओझल होने तक श्रद्धालुओं का हौसला बढ़ाते रहे।

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