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Patna : अक्सर सुबह के वक्त पटना का गांधी मैदान वॉक करने वालों और कसरत में पसीना बहाते नौजवानों से गुलजार रहता है। लेकिन आने वाली 3 नवंबर की सुबह यहां का नजारा कुछ अलग और बेहद खास होने वाला है। जब आसमान में भोर की लालिमा फूट रही होगी, ठीक सुबह 5 बजे गांधी मैदान से हजारों कदमों की गूंज सुनाई देगी। मौका होगा राष्ट्रीय रेड रन 4.0 का, जिसकी मेजबानी इस बार बिहार कर रहा है। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) और बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति के संयुक्त प्रयास से होने वाली यह 10 किलोमीटर की राष्ट्रीय दौड़ एचआईवी को लेकर समाज की सोच बदलने और स्वस्थ जीवन का संदेश घर-घर पहुंचाने का एक बड़ा अभियान है।
मरीन ड्राइव की ताजी हवा और 10 किलोमीटर का संकल्प
इस दौड़ का रूट ऐसा तय किया गया है जो पटना की खूबसूरती और ऊर्जा दोनों को एक साथ दिखाता है। गांधी मैदान के मुख्य मंच से हरी झंडी दिखाते ही धावक जेपी गंगा पथ यानी शहर के मरीन ड्राइव की ओर बढ़ेंगे। गंगा नदी के ठीक किनारे वाली लेन से जब ठंडी हवाओं के बीच सैकड़ों युवा कदमताल करेंगे, तो नजारा देखने लायक होगा। 10 किलोमीटर की मुख्य रेस के साथ-साथ एक 2 किलोमीटर की वॉकथॉन भी रखी गई है, ताकि जो लोग लंबी दौड़ नहीं लगा सकते, वे भी चलकर इस मुहिम का हिस्सा बन सकें। दोनों ही इवेंट्स गंगा पथ का चक्कर लगाकर वापस गांधी मैदान में बने मुख्य मंच के पास आकर खत्म होंगे।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक के धावकों का संगम
इस बार पटना सिर्फ राज्य ही नहीं, पूरे देश के युवाओं का स्वागत करने जा रहा है। देश के अलग-अलग राज्यों से करीब 250 युवा धावक और नोडल अधिकारी पटना पहुंच रहे हैं। हर राज्य की अपनी भाषा और अपनी संस्कृति होगी, लेकिन सबका मकसद एक ही होगा। वहीं पटना के स्थानीय लोगों को जोड़ने के लिए आयोजित 2 किलोमीटर की वॉकथॉन में लगभग 1000 स्थानीय युवा, छात्र और आम नागरिक कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे। जब मैदान में स्थानीय नागरिकों के साथ देशभर से आए धावक कदम मिलाएंगे, तो एकता और सामाजिक बदलाव की एक अलग ही तस्वीर देखने को मिलेगी।
दौड़ केवल फिटनेस की नहीं, सोच बदलने की भी
अक्सर समाज में एचआईवी को लेकर एक झिझक, डर और गलतफहमी देखने को मिलती है। इसी हिचक को तोड़ना इस पूरे आयोजन का असली मकसद है। स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत ने भी राज्य के युवाओं से खुलकर आगे आने की अपील की है। उनका कहना है कि एचआईवी से जुड़ी चुनौतियों का हल सिर्फ अस्पतालों की चारदीवारी में नहीं, बल्कि समाज के खुले दिमाग में है। समय पर जांच कराना, इलाज से परहेज न करना और सबसे बढ़कर, बीमारी से जूझ रहे लोगों को अपनापन और सम्मान देना ही एक जागरूक समाज की असली पहचान है। 3 नवंबर की सुबह पटना इसी संदेश को अपने कदमों की रफ्तार देकर पूरे देश तक पहुंचाने जा रहा है।
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