अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Patna : गांव के किसी दालान पर बैठे 70 साल के बुजुर्ग हों, अपनी लाठी के सहारे जिंदगी की राह आसान करने की कोशिश में जुटा कोई दिव्यांग भाई हो या फिर घर की सारी जिम्मेदारियां अकेले संभाल रही विधवा बहन, महीने की 10 तारीख अब इनके लिए सिर्फ कैलेंडर का एक पन्ना नहीं रही। यह वह दिन बन गया है जब मोबाइल पर आने वाला एक छोटा सा मैसेज इनके चेहरे पर राहत और स्वाभिमान की बड़ी मुस्कान बिखेर देता है। शनिवार को भी यही हुआ, जब बिहार के एक करोड़ आठ लाख से ज्यादा जरूरतमंदों के बैंक खातों में एक साथ पेंशन के पैसे खनक उठे। पटना में सीएम आवास के ‘संकल्प’ सभागार से सीएम सम्राट चौधरी ने एक सिंगल क्लिक के जरिए 1,237.48 करोड़ रुपए सीधे लाभार्थियों के खातों में भेज दिए। त्योहारों के इस मौसम में प्रति व्यक्ति 1100 रुपए की यह सीधी मदद किसी बड़े संबल से कम नहीं है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की स्क्रीन पर जब सुदूर गांवों से जुड़े बुजुर्गों और महिलाओं के हाथ जुड़े, तो साफ दिखा कि यह सिर्फ सरकारी योजना नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का एक पक्का सहारा है।

400 से 1100 तक का सफर, हर महीने जुड़ रहे हजारों नए नाम
यह कहानी सिर्फ एक दिन पैसे भेजने की नहीं है, बल्कि उस बदलाव की है जो पिछले कुछ सालों में जमीन पर उतरा है। पहले मिलने वाले 400 रुपए महीने के खर्चों के आगे बहुत मामूली साबित होते थे। पूर्व सीएम नीतीश कुमार के कार्यकाल में जब इसे बढ़ाकर 1100 रुपए किया गया, तो लोगों की छोटी-मोटी जरूरतों, दवाइयों और रोज के खर्चों का बोझ काफी हद तक कम हो गया। राहत का यह दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि हर महीने करीब 90 हजार से एक लाख नए लोग इस सामाजिक सुरक्षा तंत्र का हिस्सा बन रहे हैं। अकेले सितंबर महीने में ही 93,835 नए चेहरे इस सूची में जुड़े हैं, जिनके घरों तक अब सरकारी मदद बिना किसी बिचौलिए के सीधे बैंक खाते में पहुंच रही है।
दफ्तरों के चक्कर बंद, अब फिक्स हो गई तारीख
सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने, बाबुओं की मिन्नतें करने और महीनों पेंशन लटकी रहने के दिन अब पीछे छूट रहे हैं। सीएम सम्राट चौधरी ने साफ कर दिया कि सरकार की प्राथमिकता एकदम स्पष्ट है कि हर महीने की 10 तारीख को पेंशन की राशि हर हाल में खाते में आ जानी चाहिए। इससे लाभार्थियों को यह भरोसा रहता है कि उनकी दवाई या राशन के पैसे कब आ रहे हैं। सीएम ने कहा कि सरकार समाज के सबसे कमजोर तबके के आत्मसम्मान को लेकर गंभीर है। जब बुजुर्गों को किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता और महीने की तय तारीख पर उनका अपना पैसा उनके पास आ जाता है, तो परिवार और समाज में उनका मान अपने आप बढ़ जाता है।

घर-घर जाकर खोजे जाएंगे हकदार, सर्वे में भी होगी पड़ताल
मदद सिर्फ उन तक ही सीमित न रहे जो जागरूक हैं, इसके लिए सरकार ने अब प्रशासनिक मशीनरी को सीधे गांवों की गलियों में उतारने की तैयारी की है। सीएम ने सभी जिलाधिकारियों को दो टूक निर्देश दिया है कि कोई भी योग्य व्यक्ति पेंशन से छूटना नहीं चाहिए। इसके लिए केवल दफ्तर में बैठकर फॉर्म भरने का इंतजार नहीं होगा, बल्कि पंचायत विकास दिवस पर विशेष अभियान चलाकर छूटे हुए लोगों के नाम जोड़े जाएंगे।
इतना ही नहीं, जब स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों में हेल्थ सर्वे के लिए घर-घर जाएंगी, तो वे बीमारी की जानकारी लेने के साथ-साथ यह भी देखेंगी कि घर के बुजुर्ग, दिव्यांग या विधवा महिला को पेंशन मिल रही है या नहीं। जनप्रतिनिधियों से भी कहा गया है कि वे जब भी अपने इलाके का दौरा करें, तो चौपालों में बैठकर खुद तस्दीक करें कि किसी जरूरतमंद का हक अटका तो नहीं है।
इसे भी पढ़ें : तारीख पर तारीख से मुक्ति, बिहार के गांवों में मोबाइल से सुलझ गए 44 हजार लफड़े


