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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : रामगढ़ के चुटूपालू घाटी में ढलान उतरते ही एक भारी कंटेनर का ब्रेक अचानक फेल हो गया और इसके बाद वहां जो कोहराम मचा, उसने पूरे इलाके को दहला दिया। बेकाबू कंटेनर ने आगे चल रही हुंडई कार को पीछे से जोरदार टक्कर मारी और उसे रौंदते हुए उसके ऊपर चढ़ गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार कंटेनर के नीचे दबकर पूरी तरह पिचक गई। हादसे में कार में सवार सारा तबस्सुम की मौके पर ही जान चली गई, जबकि पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतका रामगढ़ मुख्यालय डीएसपी अकरम रजा की मौसी थीं। कार में सवार सभी लोग आपस में रिश्तेदार हैं और रांची से वापस रामगढ़ लौट रहे थे।

ढलान पर बेकाबू हुआ भारी कंटेनर, कार को रौंदते हुए ऊपर चढ़ा
हादसा उस वक्त हुआ जब नगालैंड नंबर का कंटेनर रांची की ओर से तेज रफ्तार में रामगढ़ की तरफ आ रहा था। चुटूपालू घाटी के तीव्र मोड़ और ढलान पर अचानक कंटेनर का ब्रेक फेल हो गया। चालक ने गाड़ी को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश की, लेकिन भारी लोड और ढलान के कारण गाड़ी बेकाबू होकर दौड़ने लगी। चंद पलों में ही इस भारी वाहन ने आगे चल रही हुंडई कार को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर लगते ही कार सड़क किनारे घिसटती चली गई और कंटेनर उसके ऊपर पलट जैसा गया। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़े और तुरंत पुलिस को सूचना दी।
क्रेन की मदद से आधे घंटे तक चला रेस्क्यू, बच्ची को सुरक्षित निकाला
हादसे की जानकारी मिलते ही रामगढ़ थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। कार की हालत देखकर समझ आ गया था कि अंदर फंसे लोगों को निकालना आसान नहीं होगा। पुलिस अधिकारियों ने तुरंत हाइड्रा और क्रेन मंगवाई। इसके बाद क्रेन से कंटेनर को थोड़ा ऊपर उठाया गया और फिर कार को खींचकर बाहर निकाला गया। इस पूरे रेस्क्यू में सबसे ज्यादा मुश्किल एक 10 साल की बच्ची को निकालने में आई, जो सीट और लोहे की चादर के बीच बुरी तरह फंसी थी। पुलिस और स्थानीय लोगों ने करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद फिरोज राही, तरजा सलियां, सिफ्ता ताजमीन और अनुजा तबस्सुम समेत सभी घायलों को तुरंत अस्पताल भेजा गया।

खबर सुनते ही पहुंचे डीएसपी और एसपी, फिर उठे घाटी की सुरक्षा पर सवाल
हादसे की खबर मिलते ही डीएसपी अकरम रजा बदहवास हालत में घटनास्थल पर पहुंचे। बाद में रामगढ़ एसपी मुकेश कुमार लुणायत और एसडीपीओ आलोक रंजन ने भी अस्पताल पहुंचकर घायलों की स्थिति का जायजा लिया और डॉक्टरों को बेहतर इलाज के निर्देश दिए। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर चुटूपालू घाटी में वाहनों की तकनीकी जांच और रफ्तार नियंत्रण के दावों की पोल खोल दी है। घाटी के इस खतरनाक रास्ते पर अक्सर भारी वाहनों के ब्रेक फेल होते हैं और मासूम लोग अपनी जान गंवाते हैं। हर बड़े हादसे के बाद रेस्क्यू तो तेजी से होता है, लेकिन ढलान पर भारी वाहनों के लिए कोई स्थायी और सुरक्षित इंतजाम आज तक नहीं हो सका है।
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