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Dhanbad : धनबाद की सड़कों पर जब किसी बड़े कारोबारी के फोन की घंटी बजती थी, तो स्क्रीन पर इंटरनेट कॉलिंग देखकर पसीने छूट जाते थे। दूसरी तरफ से एक ही आवाज गूंजती थी, “मैं वासेपुर से प्रिंस खान बोल रहा हूं, अगर कोयलांचल में सलामत रहना है तो रंगदारी चुकानी होगी।” दुबई में बैठकर धनबाद को दहलाने वाले इस गैंगस्टर ने कारोबारियों की नींद हराम कर रखी थी। दिनदहाड़े शोरूम पर फायरिंग, पर्चे फेंककर धमकियां और मटकुरिया से लेकर बैंक मोड़ तक गोलियों की तड़तड़ाहट आम बात हो चली थी। लेकिन तभी धनबाद पुलिस की कमान एक ऐसे शांत और सख्त मिजाज अफसर के हाथ में आई, जिसने तय किया कि जवाब फोन से नहीं, सीधे बुलडोजर और कानून के डंडे से दिया जाएगा। उस अफसर का नाम है प्रभात कुमार। आज उसी कड़े पुलिसिंग मॉडल की बदौलत फेम इंडिया की देश के 25 चुनिंदा आईपीएस अधिकारियों की सूची में प्रभात कुमार का नाम दर्ज हुआ है, और वे पूरे झारखंड से चुने जाने वाले इकलौते पुलिस कप्तान बने हैं।
गांव की मिट्टी से आईपीएस तक… एक शांत अफसर के कड़े फैसले
प्रभात कुमार का सफर एक आम परिवार के नौजवान की अथक मेहनत और अनुशासन की मिसाल है। पढ़ाई के दिनों से ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें समाज में सीधे बदलाव लाने वाली सेवा में जाना है। यूपीएससी की कठिन परीक्षा पास करने के बाद उन्हें झारखंड कैडर मिला। खाकी वर्दी पहनने के बाद से ही उन्होंने कभी दफ्तर में बैठकर फाइलें पलटने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उनकी पहचान हमेशा जमीन पर उतरकर मोर्चा संभालने वाले फील्ड ऑफिसर की रही। पाकुड़ के एसपी के तौर पर उन्होंने सुदूर ग्रामीण इलाकों में पुलिस और जनता के बीच की दूरी को पाटा। इसके बाद जमशेदपुर जैसे बड़े औद्योगिक शहर में एसएसपी रहते हुए उन्होंने संगठित सिंडिकेट और स्ट्रीट क्राइम की रीढ़ तोड़ी। उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी खूबी रही है कि वे किसी राजनीतिक या सामाजिक दबाव में आए बिना सिर्फ कानून के दायरे में काम करते हैं। जब धनबाद जैसे संवेदनशील और अपराध की गहरी जड़ों वाले जिले की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई, तो वहां पहले से कई चुनौतियां मुंह बाए खड़ी थीं।
वासेपुर में गरजा बुलडोजर, प्रिंस खान के सिंडिकेट पर सीधा प्रहार
धनबाद में कदम रखते ही प्रभात कुमार की सीधी टक्कर प्रिंस खान के गिरोह से हुई। प्रिंस खान ने पुराने बाजार के कपड़ा व्यापारियों, कतरास मोड़ की आउटसोर्सिंग कंपनियों और शहर के नामचीन डॉक्टरों तक को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। बात न मानने पर उसके भाड़े के शूटर दिनदहाड़े गोलियां बरसाकर फरार हो जाते थे। प्रभात कुमार ने इस सिंडिकेट पर वार करने के लिए एक अलग रणनीति बनाई। उन्होंने सिर्फ शूटरों को पकड़ने के बजाय प्रिंस खान के पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करने की ठानी।
पुलिस की टीम ने सबसे पहले उन लोगों की सूची बनाई जो प्रिंस खान के लिए मुखबरी करते थे, हथियारों का इंतजाम करते थे या वसूली का पैसा ठिकाने लगाते थे। इसके बाद हुआ वह एक्शन जिसने पूरे कोयलांचल को चौंका दिया। वासेपुर में स्थित प्रिंस खान के आलीशान ठिकाने पर पुलिस का भारी अमला पहुंचा और कानूनी प्रक्रिया के तहत कुर्की-जब्ती करते हुए उस घर को ढहा दिया गया। यह संदेश साफ था कि सात समंदर पार बैठकर फोन घुमाने से जमीन पर बचा नहीं जा सकता। इसके साथ ही प्रिंस खान के पासपोर्ट रद्दीकरण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिकंजा कसने की कवायद तेज की गई। साल 2025 के दौरान ही जिले भर में 1,799 अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा गया, जिससे इस गिरोह के हाथ-पैर पूरी तरह कट गए।
बदले मिजाज का धनबाद… थानों में सुनवाई और खौफ में अपराधी
प्रभात कुमार की पुलिसिंग सिर्फ अपराधियों पर सख्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने आम लोगों के मन से पुलिस का डर निकालने पर भी उतना ही काम किया है। थानों में सीधे जनसुनवाई का ऐसा ढांचा तैयार किया गया कि किसी पीड़ित को अपनी रिपोर्ट लिखाने के लिए किसी पैरवी या बिचौलिए की जरूरत न पड़े। रात के सन्नाटे में गश्त तेज हुई, चौराहों पर औचक चेकिंग शुरू हुई और साइबर ठगी के बड़े नेटवर्कों को बेनकाब किया गया। कभी रंगदारी की दहशत से सहमे रहने वाले धनबाद में अब कानून का इकबाल कायम दिख रहा है। फेम इंडिया की राष्ट्रीय सूची में प्रभात कुमार का शामिल होना सिर्फ एक अफसर का सम्मान नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे की जीत है जो उन्होंने खाकी वर्दी पहनकर कोयलांचल की जनता के दिलों में जगाया है।
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