अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
News Samvad : फिल्म निर्माता नीरज पांडे की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में इस फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने फिल्म निर्माता और अभिनेता मनोज बाजपेयी के पुतले जलाए और फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
शीर्षक को लेकर नाराजगी
विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि फिल्म का शीर्षक ब्राह्मण समुदाय का अपमान करता है। उनका तर्क है कि ‘घूसखोर’ शब्द भ्रष्टाचार से जुड़ा है और इसे ‘पंडित’ शब्द के साथ जोड़ना एक विशेष समुदाय को निशाना बनाना है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे समाज में गलत संदेश जाएगा और जातिगत भावनाएं आहत होंगी।
प्रयागराज और इंदौर में पुतला दहन
प्रयागराज के सुभाष चौक पर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए। वहां नीरज पांडे, निर्देशक रितेश शाह और फिल्म से जुड़े कलाकारों के पुतले जलाए गए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि फिल्म हिंदुओं और ब्राह्मणों को निशाना बनाकर बनाई गई है और इसे नेटफ्लिक्स पर रिलीज नहीं होने दिया जाना चाहिए। इंदौर में भी ब्राह्मण समाज के लोगों ने प्रदर्शन किया। परशुराम सेना के सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि फिल्म पर रोक नहीं लगी तो वे और उग्र विरोध करेंगे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे चेहरों पर कालिख पोतकर विरोध जताएंगे।
I respect the emotions and concerns people have shared, and I take them seriously. When something you are part of causes hurt to some people, it makes you pause and listen.
As an actor, I come to a film through the character and the story I am playing. For me, this was about… https://t.co/IGlQtLQeNs
— manoj bajpayee (@BajpayeeManoj) February 6, 2026
भोपाल में नारेबाजी और कार्रवाई की मांग
भोपाल में अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के सदस्यों ने तख्तियां लेकर विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने फिल्म निर्माताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
राजनीति में भी पहुंचा मामला
इस विवाद ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल पैदा कर दी है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने फिल्म की आलोचना करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और ब्राह्मण समाज को निशाना बनाना उचित नहीं है। उन्होंने ऐसी फिल्मों को रिलीज न करने की बात कही।
फिल्म संगठन की आपत्ति
फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज ने भी फिल्म के शीर्षक पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की है। संगठन का कहना है कि यह शीर्षक एक समुदाय और उसकी पारंपरिक पहचान को गलत तरीके से प्रस्तुत करता है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आगे की परियोजनाओं से दूरी बना सकते हैं।
कानूनी कार्रवाई तेज
लखनऊ में फिल्म के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। दिल्ली उच्च न्यायालय में फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर की गई है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस भेजा है। शिकायत में कहा गया है कि फिल्म का शीर्षक नकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है।
क्या बोले निर्माता
नीरज पांडे ने कहा है कि यदि किसी को शीर्षक से ठेस पहुंची है तो वे उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं। मनोज बाजपेयी ने भी बयान जारी कर कहा कि वे लोगों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हैं और संवाद के लिए तैयार हैं। हालांकि इन बयानों के बावजूद कई शहरों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। सामुदायिक संगठन फिल्म का नाम बदलने या रिलीज पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग पर अड़े हुए हैं।
इसे भी पढ़ें : सांसद पप्पू यादव हाईवोल्टेज ड्रामा के बाद आधी रात गिरफ्तार… देखें वीडियो



