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Patna/New Delhi : GFCC यानी गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग का मुख्यालय अब दिल्ली नहीं जाएगा, बल्कि पहले की तरह पटना में ही काम करता रहेगा। नई दिल्ली में आयोजित गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 19वीं बैठक में बिहार के डिप्टी सीएम और जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने मुख्यालय को पटना से दिल्ली शिफ्ट करने का कड़ा विरोध दर्ज कराया। डिप्टी सीएम ने साफ शब्दों में कहा कि साल 1972 में आयोग की स्थापना के समय से ही इसका मुख्यालय पटना में रहा है। हाल ही में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा इसे दिल्ली शिफ्ट करने का फैसला लिया गया था, जिससे बिहार में बाढ़ से जुड़ी योजनाओं की मंजूरी और बचाव कार्यों में गंभीर देरी का संकट खड़ा हो जाता।
बिहार की इस मांग पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और उत्तर प्रदेश के जल संसाधन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने भी तुरंत सहमति जताई। पड़ोसी राज्यों के पुरजोर समर्थन और डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी के तर्कों को देखते हुए बैठक की अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने मुख्यालय को पूर्ववत पटना में ही बनाए रखने का निर्देश जारी कर दिया।

फरवरी तक मिले बाढ़ परियोजनाओं को मंजूरी, तभी जमीन पर दिखेगा काम
डिप्टी सीएम ने केंद्र के सामने बाढ़ प्रबंधन से जुड़े कार्यक्रमों (FMP और RMB) को समय पर मंजूरी देने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार दिसंबर के आखिरी हफ्ते तक बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी तमाम योजनाएं केंद्र को भेज देगी। इसके बाद केंद्रीय जल आयोग और जल शक्ति मंत्रालय को फरवरी अंत तक इन्हें स्वीकृत कर देना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर फरवरी तक योजनाओं को हरी झंडी मिल जाती है, तो मानसून से पहले काम पूरा करने के लिए अधिकारियों को कम से कम तीन महीने का समय मिल सकेगा। तय समय पर काम न होने से बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। इस पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने भरोसा दिलाया कि प्रस्तावों पर तेजी से कार्रवाई की जाएगी।

गाद के चलते उथली हो रही नदियां, राष्ट्रीय नीति बनाने की उठी मांग
बैठक में बिहार के भीतर नदियों में जम रही गाद (सिल्ट) को दूसरी सबसे बड़ी चुनौती बताया गया। डिप्टी सीएम ने कहा कि नदियों के तल में भारी मात्रा में गाद जमा होने से उनकी पानी रोकने की क्षमता घटती जा रही है, जिससे हर साल बाढ़ पहले से ज्यादा विकराल रूप ले रही है। तलहटी ऊंची होने की वजह से नदियां खतरे के पुराने रिकॉर्ड तोड़कर नए जलस्तर को छू रही हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर गाद निकालने का ठोस उपाय नहीं किया गया, तो नदियां पूरी तरह दम तोड़ देंगी। डिप्टी सीएम ने जानकारी दी कि बिहार ने देश में पहली बार गाद के व्यावसायिक इस्तेमाल को जोड़ते हुए राज्य स्तर पर जलस्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति बनाई है। उन्होंने केंद्र सरकार से भी इसी तर्ज पर एक राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति तैयार करने की मांग रखी।
बैठक में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, बिहार जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह समेत झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ जैसे गंगा बेसिन से जुड़े राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी और नीति आयोग के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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